Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    भारत के लिए बड़ी खुशखबरी, सरकार का बड़ा फैसला, LPG का झंझट खत्म

    3 hours from now

    1

    0

    जब रास्ता बंद होता है तो समझदार देश दूसरा रास्ता खोज लेते हैं। मिडिल ईस्ट में जंग, हॉर्मोज स्ट्रेट पर खतरा और भारत के किचन तक पहुंचती गैस की किल्लत। अब तस्वीर बदलने वाली है क्योंकि बता दें कि भारत ने उठा लिया है एक सबसे बड़ा कदम। खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने की तैयारी कर ली गई है और अब नजर टिक गई है अफ्रीका के एक ऐसे देश पर जिसका नाम आपने कम सुना होगा यानी कि अंगोला। जी हां, भारत अब अंगोला से एलपीजी यानी कि रसोई गैस खरीदने की तैयारी कर रहा है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर अंगोला ही क्यों चुना गया? क्या इससे गैस संकट खत्म होगा?  क्या यह भारत की ऊर्जा रणनीति का गेम चेंजर बनने वाला है? दरअसल बता दें कि ईरान युद्ध और हॉर्मोन स्ट्रेट पर बढ़ते तनाव के बीच भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती है ऊर्जा सुरक्षा। क्योंकि आज की सच्चाई बिल्कुल सामने है और वो यह है कि भारत अपनी लगभग 92% एलपीजी सप्लाई खाड़ी देशों से मंगाता है। जैसे कि यूएई, कतर, सऊदी अरब और कुवैत। और इन सभी सप्लाई का एक ही रास्ता है और वो है स्ट्रेट ऑफ हार्मोस जो सिर्फ 33 कि.मी. चौड़ा है। लेकिन दुनिया के करीब 20% तेल और गैस व्यापार का रास्ता भी यही है। यानी अगर यह रास्ता बंद हुआ तो सीधे असर भारत के किचन तक पहुंच सकता है। और यहीं से शुरू होती है भारत की नई रणनीति। सरकारी कंपनियां, इंडियन ऑयल और बाकी जो कंपनियां हैं जैसे कि बीपीसीएल, एचपीसीएल और गेट। अब अफ्रीकी देश अंगोला की सरकारी कंपनियों से एलपीजी खरीदने पर बातचीत कर रही है। रिपोर्ट्स जो सामने आई उसके मुताबिक भारत का लॉन्ग टर्म डील पर विचार चल रहा है। यानी अब भारत सिर्फ एक रीजन पर निर्भर नहीं रहना चाहता।इसे भी पढ़ें: 8000 KM दूर बैठा दोस्त भारत के लिए खोलेगा खजाना! इस गरीब देश से मोदी ने गैस भंडार की कौन सी डील कर ली?भारत और अंगोला के बीच पहले से ही तेल व्यापार होता रहा है। और सबसे बड़ी बात अंगोला से आने वाला जहाज स्ट्रेट टॉप हॉर्नमूस से नहीं गुजरेगा। यानी सीधे अटलांटिक और अरब सागर के रास्ते भारत पहुंचेगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अंगोला से गैस सिर्फ 12 से 18 दिन में भारत पहुंच सकती है और यह सप्लाई अमेरिका से आने वाली गैस से 10 से 15 दिन तेज हो सकती है। यानी तेज सप्लाई कम जोखिम और बेहतर विकल्प। अब जरा आप आंकड़ों से समझिए। साल 2024-25 में भारत ने 31.32 मिलियन टन एलपीजी इस्तेमाल किया। लेकिन उत्पादन लगभग 12.79 मिलियन टन पर ही अटका हुआ है। बाकी का बड़ा हिस्सा इंपोर्ट करना पड़ता है। यानी मांग बढ़ रही है। उत्पादन नहीं है और यही वजह है कि भारत को अब नए स्त्रोत तलाशने पड़ रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Income Tax, LPG, Banking में बड़े बदलाव, आज से आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असरसरकार ने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के मद्देनजर देश में पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के कदम उठाए गए हैं। तेल एवं गैस मंत्रालय ने कहा कि सभी रिफाइनरीज पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार है। मंत्रालय ने कहा कि सिटी गैस डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों से कहा गया है कि वे घरेलू उपभोक्ताओं के साथ रेस्टोरेंट, होटलों और कैंटीन सहित कमर्शल उपभोक्ताओं को पीएनजी कनेक्शन देने को भी प्राथमिकता दें, जिससे कमर्शल एलपीजी की उपलब्धता से जुड़ी चिंता दूर हो सके। मंत्रालय ने कहा कि इसके साथ ही नैशनल पीएनजी ड्राइव 2.0 की अवधि अब बढ़ाकर 30 जून तक कर दी गई है, जिससे पीएनजी नेटवर्क को बढ़ावा मिल सके। यह अभियान इस साल पहली जनवरी को शुरू किया गया था और इसकी अवधि 31 मार्च को पूरी हो रही थी।
    Click here to Read more
    Prev Article
    Parliament का Budget Session आगे बढ़ेगा! एजेंडे में Lok Sabha सीटों में बढ़ोतरी और महिला आरक्षण
    Next Article
    Google, Apple, Tesla, IBM सबके ऑफिस आज रात उड़ा देंगे, ईरान की खुली धमकी ने हिलाई दुनिया

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment