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    मलेशिया में कानपुर का डंका:सेलंगोर ओपन डार्ट्स चैंपियनशिप में जीते पदक, जुड़वां भाइयों ने दिलाया कांस्य

    2 hours ago

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    मलेशिया में आयोजित ‘सेलंगोर ओपन डार्ट्स चैंपियनशिप 2026’ में भारत का डंका बजा है। 12 देशों के 247 खिलाड़ियों को पछाड़ते हुए भारतीय दल ने कई पदक अपने नाम किए। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर उत्तर प्रदेश के कानपुर के खिलाड़ियों ने अपनी सटीक निशानेबाजी से न केवल देश का मान बढ़ाया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि जुनून हो तो कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं होता। कानपुर के जुड़वां भाई राहुल गुप्ता (ईपीएफओ) और रोहित गुप्ता (सेंट्रल बैंक) ने व्हीलचेयर वर्ग में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘पैरा स्पोर्ट्स आइकन’ के नाम से मशहूर इन भाइयों ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। वहीं, कानपुर के ही महेंद्र प्रताप सिंह ने स्टैंडिंग वर्ग में शानदार खेल दिखाते हुए रजत पदक पर कब्जा जमाया। इन खिलाड़ियों की सफलता से पूरे कानपुर में खुशी की लहर दौड़ गई। 12 देशों की कड़ी चुनौती, भारत ने दिखाया दम यह चैंपियनशिप इसलिए भी खास रही क्योंकि इसमें दिव्यांग और सामान्य दोनों वर्गों के खिलाड़ियों ने एक साथ प्रतिस्पर्धा की। 12 देशों के 247 खिलाड़ियों की मौजूदगी के बीच भारतीय टीम का प्रदर्शन बेहद संतुलित और प्रभावी रहा। सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि राजस्थान, कर्नाटक और महाराष्ट्र के खिलाड़ियों ने भी अलग-अलग श्रेणियों में पदक जीतकर भारत को पदक तालिका में ऊपर पहुंचाया। क्या है डार्ट्स खेल और क्यों है खास? डार्ट्स महज एक खेल नहीं, बल्कि एकाग्रता, धैर्य और मानसिक संतुलन की परीक्षा है। इसमें एक गोल बोर्ड पर छोटे तीरनुमा डार्ट्स फेंककर अंक जुटाने होते हैं। खिलाड़ी को तय दूरी से निशाना साधना होता है और हर सटीक थ्रो अंक दिलाता है। डार्ट्स की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब यह ‘वर्ल्ड पुलिस गेम्स’ का भी हिस्सा बन चुका है। मलेशिया में इस खेल को राष्ट्रीय स्तर पर सरकारी समर्थन और प्रायोजन भी मिलता है, जिससे वहां के खिलाड़ियों का मनोबल हमेशा ऊंचा रहता है और उन्हें बेहतर सुविधाएं मिलती हैं। दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए बनी नई मिसाल राहुल, रोहित और महेंद्र की इस जीत ने दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का एक नया अध्याय लिख दिया है। इन्होंने दिखा दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो दिव्यांग खिलाड़ी किसी भी मंच पर सामान्य खिलाड़ियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इतिहास रच सकते हैं। कानपुर के इन खिलाड़ियों की उपलब्धि निश्चित रूप से देश में पैरा स्पोर्ट्स के भविष्य को एक नई दिशा देने का काम करेगी।
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