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    मां पर 7 साल के बेटे की हत्या का शक:मेरठ में बॉयफ्रेंड से दोस्ती कराई थी, CCTV सामने आया; दुबई से आज पहुंचेंगे पिता

    21 hours ago

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    मेरठ में 7 साल के बच्चे अंगदवीर की हत्या में उसकी मां गुरुप्रीत भी शक के घेरे में है। पुलिस को 15 जून का एक CCTV मिला है। इसमें अंगदवीर, मां गुरुप्रीत और उसका बॉयफ्रेंड अर्पित एक साथ दिखाई दिए। तीनों गांव की एक बेकरी में गए थे। पुलिस के मुताबिक, मां ने बेटे को बॉयफ्रेंड से मिलवाया था और दोनों में जान-पहचान कराई थी। अगले दिन यानी 16 जून को अर्पित, अंगदवीर को कार से घुमाने के बहाने साथ ले गया। वहां उसकी चाकू मारकर हत्या कर दी। शव हस्तिनापुर के जंगल में फेंक दिया। पुलिस मां को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। आज गुरुवार को अंगदवीर के पिता गुरुसेवक भी दुबई से मेरठ पहुंच रहे हैं। वह बेटे का अंतिम संस्कार करेंगे। वारदात 16 जून को मेरठ के रामराज गांव में हुई। HDFC बैंक में काम करने वाले अर्पित ने अपनी शादीशुदा गर्लफ्रेंड के बेटे की हत्या कर दी थी। पुलिस ने 17 जून को आरोपी को गिरफ्तार कर शव बरामद कर लिया था। गुरप्रीत ने 8 साल पहले अरेंज मैरिज की थी मेरठ के रामराज गांव में स्वर्गीय अवतार सिंह का मकान है। अवतार का परिवार मूल रूप से पटियाला का रहने वाला है, लेकिन काफी साल पहले परिवार मेरठ आकर रहने लगा। यहां रामराज गांव में अपना मकान बना लिया और खेती करने लगे। अवतार की पत्नी बलजिंदर कौर हैं। उनके दो बेटे हैं- बड़ा बेटा गुरसेवक और एक छोटा बेटा। 8 साल पहले बड़े बेटे गुरसेवक की नजीबाबाद की गुरप्रीत से अरेंज मैरिज हुई। गुरसेवक मेरठ में कंस्ट्रक्शन कंपनियों के लिए ड्राइवरी करते थे। छोटा बेटा अपनी पत्नी और बच्चों के साथ पटियाला में रहता है। गुरप्रीत और गुरसेवक की शादी से उनका एक बेटा हुआ, जिसका नाम अंगदवीर रखा गया। अवतार की मौत के बाद घर में गुरसेवक, उसकी पत्नी गुरप्रीत, दादी बलजिंदर कौर और अंगदवीर रहने लगे। शादी के बाद गुरप्रीत गांव के ही एक प्राइवेट स्कूल में टीचर हो गई। मगर कुछ समय बाद गुरसेवक और गुरप्रीत के बीच झगड़े होने लगे। आए दिन के विवाद से परेशान होकर गुरसेवक दो साल पहले दुबई चला गया। वहां ड्राइवरी करने लगा। इसके कुछ दिन बाद उसकी पत्नी गुरप्रीत भी घर छोड़कर अपने मायके बिजनौर के नजीबाबाद चली गई। इसके बाद अंगदवीर को लेकर उसकी दादी पटियाला चली गई। अंगदवीर वहीं पढ़ने लगा। इंस्टाग्राम पर दोस्ती हुई, फिर अफेयर हुआ आरोपी अर्पित एचडीएफसी बैंक में एरिया मैनेजर है। वह मूल रूप से मुजफ्फरनगर का रहने वाला है। 11 महीने पहले उसकी गौरी नाम की युवती से शादी हुई थी। पुलिस के मुताबिक, करीब 5 साल पहले गुरप्रीत की इंस्टाग्राम पर आरोपी अर्पित से मुलाकात हुई। अर्पित और गुरप्रीत के बीच बातचीत बढ़ी और यह प्यार में बदल गई। इसके बाद से गुरप्रीत अपने पति से झगड़ा करने लगी। वह लड़ाई से तंग आकर दुबई चला गया। गुरसेवक के दुबई जाने के बाद गुरप्रीत आजाद हो गई। वह अपने बॉयफ्रेंड अर्पित के साथ रोज बाहर घूमने जाने लगी। रोकटोक हुई तो वह दो साल पहले मायके चली गई। अर्पित और गुरप्रीत शादी करना चाहते थे। दो साल पहले गुरप्रीत ने पति गुरसेवक से तलाक देने की बात कही। पति ने कहा कि जब मैं लौटकर आऊंगा, तब बात करेंगे। बेटे के आते ही मायके से ससुराल पहुंची गुरप्रीत गुरसेवक और गुरप्रीत का 7 साल का बेटा अंगदवीर अपनी दादी के पास पटियाला में रहता था। 5 दिन पहले वह दादी के साथ पटियाला से अपने गांव रामराज आया था। इसकी जानकारी अंगदवीर की मां गुरप्रीत को हुई, तो वह भी गांव आ गई। बोली कि बेटे के बिना अच्छा नहीं लगता। दादी ने कहा कि 2 साल से तो बेटे की सुध नहीं ली, अचानक ममता कहां से उमड़ आई। गुरप्रीत ने कहा कि वह डिप्रेशन में चली गई है। उसने कहा- मुझे बेटे के साथ कुछ दिन रहने दीजिए। जब वह गिड़गिड़ाई तो दादी ने उसे रहने की इजाजत दे दी। पुलिस के मुताबिक, 15 जून को गुरप्रीत अपने बॉयफ्रेंड अर्पित के साथ अंगदवीर को बेकरी ले गई। वहां उसने अंगदवीर की अपने बॉयफ्रेंड अर्पित से दोस्ती कराई। तीनों ने वहां खाया-पिया और फिर चले गए। अगले दिन अर्पित ने अंगदवीर की हत्या कर दी। 16 जून यानी मंगलवार सुबह करीब 11 बजे अंगदवीर घर के बाहर खेलते समय गायब हो गया। पुलिस जांच में सामने आया कि उस दिन घर में दादी बलजिंदर नहीं थीं। मां गुरप्रीत और बेटा अंगदवीर घर पर अकेले थे। बलजिंदर को डॉक्टर के यहां चेकअप के लिए जाना था। उन्होंने पोते अंगदवीर को साथ चलने के लिए कहा था, लेकिन गुरप्रीत ने बेटे को दादी के साथ नहीं भेजा। जैसे ही बलजिंदर घर से निकलीं, थोड़ी देर बाद मां ने अंगदवीर को बाहर खेलने भेज दिया। तभी घर के बाहर सफेद रंग की कार आकर रुकी, जिसमें आरोपी अर्पित था। उसने अंगदवीर से हाय-हैलो किया और उसे कार में बैठा लिया। इसकी सीसीटीवी फुटेज भी सामने आई है। इसके बाद उसने बच्चे की हत्या कर दी गई। हत्या के बाद देवी जागरण में गया आरोपी हत्या के बाद अर्पित घर पहुंचा, नहाया और पत्नी गौरी के साथ फलावदा के गड़ीना गांव में मोहनराम के यहां देवी जागरण में चला गया। अर्पित पूरी तरह आश्वस्त था कि वह पकड़ा नहीं जाएगा, लेकिन सीसीटीवी फुटेज के जरिए पुलिस उस तक पहुंच गई। सर्विलांस टीम ने देवी जागरण से ही आरोपी अर्पित को पकड़ लिया। अर्पित 17 जून को दिनभर पुलिस को गुमराह करता रहा। उसने कहा कि उसने शव को नहर में फेंका है। पुलिस टीमें दिनभर नहर में सर्च अभियान चलाती रहीं, लेकिन शव नहीं मिला। बाद में सख्ती से पूछताछ करने पर आरोपी ने बताया कि शव उसने जंगल में फेंका है। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर हस्तिनापुर के भद्रकाली जंगल से शव बरामद किया। आरोपी अर्पित ने पूछताछ में बताया कि उसने अंगदवीर को नशीली चीज दी थी, लेकिन उसे उल्टी हो गई। इसके बाद वह उसे कार से करीब 20 किमी दूर जंगल में ले गया और चाकू से हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई। सिंगापुर में सेटल होना चाहती थी गुरप्रीत अंगदवीर की दादी बलजिंदर ने बताया कि इसी महीने के आखिर में वह अपने पोते के साथ पटियाला शिफ्ट होने वाली थीं। गांव छोड़ने की तैयारी चल रही थी। शिफ्टिंग के कारण ही 5 दिन पहले अंगदवीर पटियाला से मेरठ आया था। पड़ोसियों ने बताया कि गुरप्रीत का सपना विदेश में जाकर रहने का था। इसलिए वह आईईएलटीएस (इंटरनेशनल इंग्लिश लैंग्वेज टेस्टिंग सिस्टम) की तैयारी कर रही थी, ताकि सिंगापुर जाकर पढ़ाई और नौकरी कर सके। जब गुरप्रीत बहसूमा के एम्बीशन स्कूल में टीचर थी, तब अर्पित उसी स्कूल में क्लर्क था। वहीं से दोनों की मुलाकात हुई और धीरे-धीरे नजदीकियां बढ़ीं। उस समय अर्पित भी सिंगल था, इसलिए दोनों साथ रहने की सोचने लगे। बाद में गुरप्रीत हापुड़ चली गई। कुछ समय बाद अर्पित की शादी हो गई। जब उसके पति को दोनों के अफेयर की जानकारी हुई, तो उसने गुरप्रीत का वहां पढ़ाना बंद करा दिया। एसपी देहात अभिजीत कुमार का कहना है- आरोपी की अंगदवीर की मां गुरप्रीत से उसकी दोस्ती थी, वो दोनों पहले से एक दूसरे को जानते हैं, बातचीत करते हैं। आरोपी पर मुकदमा दर्ज किया गया है। ………………. ये खबर भी पढ़िए- मंत्री राजभर, निषाद, अनुप्रिया की पार्टियां बेच रहीं टिकट:यूपी में विधायक टिकट का रेट 2 से 8 करोड़, देखिए ऑन कैमरा डील ‘निषाद पार्टी में विधायक के टिकट के 5 करोड़ रुपए लगेंगे। आधा अभी कर दें, आधा घोषणा से पहले कर देना। पिछली बार कहीं 7-8, तो कहीं 2-3 करोड़ था।’ यह कहना है यूपी की निषाद पार्टी के प्रदेश चुनाव प्रभारी का। विधानसभा चुनाव 3 महीने पहले कराने की सुगबुगाहट के बीच पॉलिटिकल पार्टियां अभी से टिकट बेचने में जुट गई हैं। पार्टी और सीट के अनुसार टिकट की कीमत तय की जा रही है। अगर पार्टी छोटी है और सीट पर उसकी पकड़ कमजोर है, तो 2 करोड़ रुपए में टिकट मिल सकता है। पढ़ें पूरी खबर
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