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    लखनऊ नगर निगम पैनल के वकीलों की छंटनी शुरू:खराब परफॉर्मेंस की बन रही रिपोर्ट, पैरवी नहीं आएगी काम

    5 hours ago

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    लखनऊ नगर निगम पैनल से बड़ी संख्या में वकीलों को बाहर करने का रास्ता दिखाया जाएगा। इसके लिए अब स्क्रुटनी शुरू हो गई है। मेयर सुषमा खर्कवाल और नगर आयुक्त गौरव कुमार की तरफ से विधि विभाग की समीक्षा बैठक के बाद में इसका फैसला लिया गया है। इसके साथ ही विधि विभाग द्वारा सही ढंग से काम करने का निर्देश दिया गया है। वकीलों को केस देने के मामले में भी एक्सपीरियंस और अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड की वरीयता दी जाएगी। 220 वकील नगर निगम के पैनल में लिस्टेड नगर निगम के पैनल से ऐसे वकील बाहर किए जाएंगे, जिनकी परफोर्मेंस खराब है। या फिर ऐसे वकील जिन्होंने लंबे समय से कोई केस नहीं लड़ा है। नगर निगम के कुल करीब 480 केस हैं। इसमें प्रॉपर्टी से जुड़े हुए मामले सबसे अधिक हैं। सिविल में भी मुकदमों की संख्या दूसरे नंबर है। अधिकारी बताते हैं कि शहर के अधिकतर मामलों में अतिक्रमण, रोड निर्माण, कर्मचारी से जु सहित अन्य हैं। नगर निगम के कुल मुकदमों की संख्या 480 है। इसमें सबसे अधिक मुकदमे हाईकोर्ट में चल रहे हैं। 30 से अधिक वकील होंगे बाहर नगर निगम में छंटनी होने वाले वकीलों में न्यूनतम 30 से अधिक की संख्या है। बैठक के दौरान मेयर सुषमा खर्कवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि ऐसे वकीलों की सूची तैयार की जाए, जिन्हें बाहर करना है। ऐसे में अधिकारियों की तरफ से वकीलों को पैनल से बाहर निकालने की तैयारी शुरू हो गई है। सूची बनाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि हमारे पास में केसों की संख्या कम है, जबकि अधिक संख्या में वकील हैं। ऐसे में काम के आधार पर छंटनी होगी, लेकिन अधिकारियों के सामने यह भी चुनौती है कि भाजपा नेताओं और आला अधिकारियों की पैरवी वाले वकीलों को बाहर न किया जाए। खराब पैरवी से बचने के लिए लिया निर्णय सिविल कोर्ट के आदेश पर 10 मार्च को नगर आयुक्त के ऑफिस की कुर्की करने के लिए टीम पहुंची थी। इसमें कमजोर पैरवी के चलते स्थिति खराब हुई। बाद में नगर आयुक्त की सख्ती के बाद स्थिति सही हुई। अब ऐसे मामलों से बचने के लिए नगर निगम ने यह निर्णय लिया है। दरअसल, मैसर्स गंगा संस्थान कैसरबाग में 2019 में शेल्टर होम का संचालन करता था। नगर निगम ने दिसंबर 2019 में संस्था को बताया कि शेल्टर होम संचालन की अनुमति सितम्बर 2019 में रद्द कर दी गई है। संस्था ने सितम्बर से दिसंबर 2019 तक 3 महीने का सेल्टर होम संचालन में खर्च की गई राशि का भुगतान मांगा।नगर निगम ने भुगतान करने से मना कर दिया। नगर निगम के मना करने पर सिविल कोर्ट में बकाया राशि भुगतान के लिए वाद दायर किया। कोर्ट ने उनके फेवर में 2.17 लाख की डिक्री पारित की। उसी डिक्री के तहत आज टीम कुर्की की कार्रवाई करने पहुंची थी।
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