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    क्या है America का 50 साल पुराना 'War Powers Resolution' कानून, जिसने Iran से जंग पर बढ़ाईं Trump की मुश्किलें?

    4 hours from now

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    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने ईरान के खिलाफ जारी युद्ध को समाप्त करने की समयसीमा तेजी से नजदीक आ रही है। इस समयसीमा के उल्लंघन का मतलब अमेरिकी कानून का उल्लंघन होगा। 1973 के ‘वॉर पावर्स रिजोल्यूशन’ के तहत, अमेरिकी राष्ट्रपति कांग्रेस की अनुमति के बिना केवल 60 दिनों तक ही युद्ध छेड़ सकते हैं। इसके बाद या तो कांग्रेस को युद्ध की घोषणा या उसे मंजूरी देनी होती है, या राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई समाप्त करनी पड़ती है। फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम लागू है, लेकिन ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी बनाए रखने के लिए तैनात अमेरिकी नौसैनिक बलों और जहाजों पर यह कानून लागू होगा। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि 60 दिनों की समयसीमा समाप्त हो जाती है और ट्रंप पीछे हटने से इनकार करते हैं, तो क्या होगा? ‘वॉर पावर्स रिजोल्यूशन‘ क्या है? ‘वॉर पावर्स रिजोल्यूशन’ नवंबर 1973 में तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के वीटो के बावजूद कांग्रेस द्वारा पारित किया गया था। इसका उद्देश्य युद्ध घोषित करने के कांग्रेस के अधिकार में राष्ट्रपति के अतिक्रमण को सीमित करना था।इसे भी पढ़ें: 'हमारे बिना आप फ्रेंच बोल रहे होते', King Charles III ने इतिहास के बहाने Donald Trump को मजेदार अंदाज में घेरा यह कानून वियतनाम युद्ध से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के तुरंत बाद लाया गया था, जिसे कांग्रेस की मंजूरी नहीं मिली थी। यह कानून, इसके प्रावधानों में अस्पष्टता, कई अपवादों और खामियों के कारण प्रभावी साबित नहीं हुआ है। निक्सन के बाद किसी भी राष्ट्रपति पर इसका खास असर नहीं पड़ा और कई बार बिना कांग्रेस की अनुमति के युद्ध शुरू करने वाले राष्ट्रपतियों ने इसके प्रावधानों का औपचारिक पालन भर किया। कांग्रेस ने भी युद्ध घोषित करने के अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा में अनिच्छा दिखाकर इस कानून की प्रभावशीलता को कमजोर किया है। इसके बावजूद मौजूदा ईरान संघर्ष में इसे पूरी तरह अप्रासंगिक मानना जल्दबाजी हो सकती है, क्योंकि यह सतर्क रिपब्लिकन सांसदों को अलोकप्रिय युद्ध समाप्त करने का एक माध्यम प्रदान करता है। कानून क्या कहता है? इस कानून की दो धाराओं के तहत युद्ध समाप्त करने की समयसीमा लागू होती है। धारा चार के अनुसार, राष्ट्रपति को अमेरिकी सैनिकों को “युद्ध” में शामिल करने के 48 घंटे के भीतर कांग्रेस को रिपोर्ट देना अनिवार्य है, जिसमें कार्रवाई का संवैधानिक और कानूनी आधार, उसका औचित्य तथा अमेरिकी भागीदारी की अवधि और दायरा बताया जाता है। इसके बाद धारा पांच के तहत 60 दिनों की समयसीमा शुरू होती है। यदि इस अवधि तक कांग्रेस युद्ध को मंजूरी नहीं देती या समयसीमा नहीं बढ़ाती, तो राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई समाप्त करनी होती है। इस प्रावधान की खासियत यह है कि यह स्वतः लागू होता है और सांसदों को इसे लागू करने के लिए अलग से कोई कदम नहीं उठाना पड़ता। उन्हें राष्ट्रपति की सैन्य नीति के खिलाफ मतदान का रिकॉर्ड भी दर्ज नहीं करना पड़ता।इसे भी पढ़ें: Trump का बड़ा दावा: 'तबाही की कगार पर Iran, Hormuz खोलने के लिए गिड़गिड़ाया'ट्रंप ने दो मार्च को ईरान युद्ध पर अपनी रिपोर्ट कांग्रेस को सौंपी थी, जिसके अनुसार 60 दिनों की समयसीमा एक मई को समाप्त हो रही है। अब तक कांग्रेस ने युद्ध को मंजूरी नहीं दी है, हालांकि रिपब्लिकन सदस्यों ने डेमोक्रेट्स के कई प्रस्तावों को रोक दिया है, जिनका उद्देश्य युद्ध समाप्त करना या ट्रंप की शक्तियों को सीमित करना था। कांग्रेस के पास 60 दिन की अवधि को अधिकतम 30 दिन तक बढ़ाने का विकल्प भी है, जिसके लिए प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में मतदान आवश्यक होगा। रिपब्लिकन सांसदों में बढ़ती असहजता ईरान के खिलाफ यह युद्ध हाल के अन्य अमेरिकी युद्धों से अलग है, क्योंकि यह ट्रंप के लिए बेहद प्रतिकूल साबित हो रहा है। रॉयटर्स-इप्सोस के एक हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, केवल 34 प्रतिशत अमेरिकी इस युद्ध का समर्थन करते हैं। इस बार राष्ट्रपति के सैन्य अभियान के समर्थन में आमतौर पर दिखने वाला “रैली-अराउंड-द-फ्लैग” प्रभाव भी नहीं दिख रहा है।कई सांसद अपने मतदाताओं की राय को लेकर संवेदनशील हैं और इस मुद्दे पर ट्रंप का विरोध करने से हिचक नहीं रहे हैं। यूटा से रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कर्टिस ने एक लेख में कहा है कि यदि 60 दिनों के भीतर कांग्रेस की मंजूरी नहीं मिलती, तो वे इस युद्ध का समर्थन नहीं करेंगे। अन्य रिपब्लिकन नेताओं ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त किए हैं। संभावना है कि ट्रंप अमेरिकी सैनिकों की वापसी के कानूनी निर्देश को नजरअंदाज कर सकते हैं। वे यह भी दावा कर सकते हैं कि ‘वॉर पावर्स रिजोल्यूशन’ असंवैधानिक है, जैसा कि निक्सन ने 1973 में कहा था और इस मामले को अदालत में चुनौती दे सकते हैं। यदि ट्रंप समयसीमा की अनदेखी करते हैं, तो आगे की स्थिति काफी हद तक कांग्रेस की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी।इसे भी पढ़ें: Iran US War Updates | Donald Trump की नई चाल: होर्मुज़ जलडमरूमध्य की लंबी घेराबंदी कर ईरान को आर्थिक रूप से तोड़ने की रणनीति डेमोक्रेट्स प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर करने पर विचार कर रहे हैं। वैसे अतीत में ऐसा करना कठिन साबित हुआ है। ट्रंप यह तर्क भी दे सकते हैं कि यह कानून लागू नहीं होता, क्योंकि अमेरिकी बल फिलहाल ईरान में प्रत्यक्ष लड़ाई में शामिल नहीं हैं, जैसा कि 2011 में लीबिया में सैन्य कार्रवाई के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने किया था। ट्रंप ने मार्च में कांग्रेस को भेजी गई सूचना में कहा था कि वे ‘‘कमांडर-इन-चीफ और मुख्य कार्यकारी’’ के रूप में अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत कार्रवाई कर रहे हैं, हालांकि इनमें से कोई भी अधिकार उन्हें कांग्रेस की अनुमति के बिना युद्ध छेड़ने की शक्ति नहीं देता। उन्होंने ‘वॉर पावर्स रिजोल्यूशन’ का सीधे उल्लेख नहीं किया, बल्कि केवल इतना कहा कि उनकी रिपोर्ट इसके अनुरूप है—यह एक सामान्य है जिसका उपयोग पूर्व राष्ट्रपतियों ने भी किया है। पूर्व में जब भी राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच इस कानून को लेकर टकराव हुआ है, तो आमतौर पर समझौता हो गया है, हालांकि यह परिस्थितियों पर निर्भर करता रहा है और अक्सर राष्ट्रपति के पक्ष में गया है। इस बार स्थिति अलग हो सकती है। ट्रंप एक अलोकप्रिय युद्ध का सामना कर रहे हैं और कांग्रेस में उनका बहुमत भी बेहद कम है, जबकि मध्यावधि चुनाव में केवल छह महीने शेष हैं। यदि एक मई तक अमेरिकी सैनिक पश्चिम एशिया में तैनात रहते हैं, तो ‘वॉर पावर्स रिजोल्यूशन’ पिछले 50 वर्षों में पहली बार वास्तविक रूप से प्रभावी साबित हो सकता है।
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