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    काशी में विक्रमोत्सव आज, MP-UP के मुख्यमंत्री भी आएंगे:कालाकारों ने रिहर्सल शुरू की, बाबा विश्वनाथ को समर्पित होगी वैदिक घड़ी

    13 hours ago

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    विक्रमोत्सव 2026 के अंतर्गत उज्जैन के महान सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन, न्यायप्रियता और गौरवशाली इतिहास को जन-जन तक पहुँचाने के लिए 3 से 5 अप्रैल तक वाराणसी में एक भव्य महानाट्य का मंचन किया जाएगा। इस विशेष आयोजन का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में होगा। सम्राट विक्रमादित्य शोध संस्थान के माध्यम से बी.एल.डब्ल्यू. मैदान में आयोजित होने वाले इस भव्य महानाट्य में सैकड़ों कलाकार हिस्सा लेंगे। इस दौरान हाथी, घोड़े और ऊंटों के साथ प्राचीन भारतीय परंपराओं और कलाओं का शानदार प्रदर्शन किया जाएगा। यह आयोजन भारतीय संस्कृति को जीवंत रूप में प्रस्तुत करेगा। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ की ओर से आयोजित होने जा रहे महानाट्य का शुभारंभ महाकाल की आरती से होगा। उत्तर प्रदेश में पहली बार बनारस में इस भव्य महानाट्य का मंचन किया जा रहा है। कार्यक्रम में 200 से अधिक कलाकार भाग लेंगे। 18 घोड़े, दो रथ, चार ऊंट, एक पालकी और एक हाथी भी प्रस्तुति को जीवंत बनाएंगे। महानाट्य में तीन मंचों का निर्माण किया गया है। सिंहासन बत्तीसी, बेताल पच्चीसी और भविष्य पुराण के प्रसंगों को दर्शाया जाएगा। 27 फीट ऊंचा सिंहासन मुख्य आकर्षण होगा। सम्राट विक्रमादित्य के जन्म से लेकर राजतिलक तक की गाथा, उनके आदर्श, न्यायप्रियता और शकों पर विजय की कथा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा। महानाट्य को पद्मश्री डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित ने रचा है। जबकि निर्माण राजेश कुशवाहा और निर्देशन संजीव मालवीय ने किया है। इसमें आधुनिक तकनीक का भी उपयोग होगा। 400 से अधिक लाइट, बड़ी एलईडी स्क्रीन और दो बार आतिशबाजी होगी। आयोजन में सम्राट विक्रमादित्य के जीवन, पराक्रम, न्यायप्रियता एवं सांस्कृतिक योगदान को प्रभावशाली मंचन के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही, कार्यक्रम स्थल पर विविध प्रदर्शिनियाँ भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। जिनमें ‘आर्ष भारत’, ‘सम्राट विक्रमादित्य और अयोध्या’, ‘शिव पुराण’, ‘चौरासी महादेव’, ‘श्रीहनुमान’ तथा मध्यप्रदेश के पवित्र स्थलों की झलक प्रस्तुत की जाएगी। श्री भस्म रमैया भक्त मंडल के 50 कलाकार द्वारा डमरू वादन की प्रस्तुति दी जाएगी। डॉ. अभय अरविंद बेडेकर मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के निदेशक ने कहा - इस महानाट्य की प्रस्तुति का उद्देश्य मात्र प्रदर्शन नहीं, बल्कि आम नागरिकों को इस बात से परिचित कराना था कि हमारा मध्यप्रदेश प्राचीन काल से ही कितना महान रहा है। आज जब हम जनकल्याण, सुशासन और विकास की बात कर रहे हैं, तो यह प्रेरणा हमें सम्राट विक्रमादित्य जैसे महान इतिहास पुरुषों से ही प्राप्त हुई है, जो हमारे वैभवशाली अतीत के महानायक हैं। ऐसे विक्रमादित्य जो काल गणना, विवेकपूर्ण न्याय, शौर्य और महानता के लिए जाने जाते हैं। इस नाटक में जितने भी कलाकार हैं वह मध्य प्रदेश के हैं जिनको यह पूरा नाटक सिखाया जाता है। पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने कहा कि यह पूरा आयोजन निशुल्क है लेकिन यहां आने वाले लोगों की क्षमता लिमिटेड है लगभग 7000 लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है जो भी इस मैदान में आएगा उसकी चेकिंग किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अलग-अलग टीमों को चेक पॉइंट पर लगाया गया है। ड्रोन से पूरे आयोजन की निगरानी की जाएगी। पंचांग से लेकर मौसम की जानकारी देगी यह वैदिक घड़ी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव आज काशी विश्वनाथ धाम न्यास को वैदिक घड़ी भेंट करेंगे। यह घड़ी भारतीय काल गणना पर आधारित है। इसमें दिन को 30 मुहूर्तों में बांटा गया है। यह घड़ी पूरी तरह से भारतीय परंपरा और विज्ञान पर आधारित विश्व की पहली वैदिक घड़ी है। इस घड़ी की खास बात यह है कि ये भारतीय काल गणना की प्राचीन समय से चलती आ रही परंपरा को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ती है। यह वैदिक घड़ी सूर्योदय और सूर्यास्त के मुताबिक समय की गणना करती है। सामान्य घड़ियों में 24 घंटों होते हैं। वहीं इसमें GMT के 24 घंटों को 30 मुहूर्त में बांटा गया है। इस घड़ी में आपको घंटे, मिनट, सेकेंड की सुई के अलावा पंचांग, मौसम, मुहूर्त और दूसरी तरह की धार्मिक जानकारी भी दिखेगी। इन सब के अलावा इस घड़ी में आप ग्रह नक्षत्रों की स्थिति, सूर्य किस राशि में है, चंद्रमा किस नक्षत्र आदि चीजें भी देख सकेंगे। इस घड़ी में आप समय देखने के साथ साथ कई और चीजों के बारे में भी पता कर सकेंगे। मध्य प्रदेश के पारंपरिक व्यंजन बनेंगे खास आकर्षण इस आयोजन में फूड कोर्ट भी खास रहेगा। जहां मध्य प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लिया जा सकेगा। यहां इंदौर के प्रसिद्ध पोहा-जलेबी, मक्के का कीस, मालवा की कचौरी, डिंडौरी का उड़द दाल और कोदो भात, कुटकी की गुड़ वाली खीर, बघेलखंडी निमोना-पुड़ी, बेड़ई पुड़ी और हींग वाले आलू जैसे व्यंजन उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही बुंदेलखंडी सन्नाटा छाछ, लेमन पुदीना, आम पना, सब्जा शिकंजी, गुलाब मलाई लस्सी और मावा बाटी जैसे पेय और मिष्ठान भी लोगों को आकर्षित करेंगे।
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