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    कासगंज में 31 लाख की साइबर ठगी का खुलासा:डिजिटल अरेस्ट मामले में महिला समेत दो गिरफ्तार, फर्जी तरीके से आधार कार्ड एडिट करती थी

    2 hours ago

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    कासगंज में डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से 31 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में एक महिला सहित दो शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई जनपदीय साइबर सेल और थाना गंजडुंडवारा की संयुक्त टीम ने की है। यह घटना कासगंज जिले के गंजडुंडवारा थाना क्षेत्र की है। मोहल्ला खैरू निवासी मुहम्मद स्वालेह अंसारी ने 31 लाख रुपये की ठगी की एफआईआर दर्ज कराई थी। पीड़ित के अनुसार, 12 मार्च 2026 को एक महिला ने उन्हें कॉल कर खुद को "डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड ऑफ इंडिया" का अधिकारी बताया। महिला ने दावा किया कि मुंबई में उनके नाम से बैंक खाता खोलकर आतंकियों को धन भेजा गया है। उसने "पुलावा मुंबई हेडक्वार्टर" में दर्ज एक कथित मामले का हवाला देते हुए स्थिति को गंभीर बताया। ठगों ने पीड़ित को 6 आतंकियों के पोस्टर भी भेजे। इसके बाद, खुद को पुलिस, सीबीआई, एनआईए और आरबीआई से जुड़ा अधिकारी बताकर उन्हें लगातार डराया गया और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर निशाना बनाया गया। क्षेत्राधिकारी क्राइम अमित कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। रकम विभिन्न खातों में ट्रांसफर की गई जांच में सामने आया कि ठगी की गई पूरी 31 लाख रुपये की रकम विभिन्न खातों में ट्रांसफर की गई थी। इन 31 लाख रुपये में से 6,10,000 रुपये मांगीलाल बिश्नोई पुत्र हनुमनाराम, निवासी सांचौर, जिला जालौर, राजस्थान के खाते में भेजे गए थे। मांगीलाल ने इसमें से 6 लाख रुपये का चेक निर्मला पुत्री मोहनलाल, निवासी शेरानियां का धनी, सिवाड़ा, जालौर, राजस्थान को दिया। निर्मला ने यह रकम कैश करवा ली। जांच अधिकारी ने मांगीलाल और निर्मला को 28 अप्रैल 2026 को अम्बर मोड के पास, एटा बाईपास, सिद्धपुरा से गिरफ्तार किया। पूछताछ में मांगीलाल ने खुलासा किया कि निर्मला फर्जी तरीके से लोगों के आधार कार्ड और पैन कार्ड एडिट करती थी। इन जाली दस्तावेजों का उपयोग कर वह बैंक खाते खुलवाती थी और चेक बुक भी जारी करवा लेती थी। ठगी से प्राप्त रकम को इन्हीं चेक के माध्यम से निकाला जाता था। पुलिस ने गिरफ्तार अभियुक्तों के पास से जाली पैन कार्ड की प्रतियां, फर्जी चेक और आधार कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं।
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