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    कोर्ट के स्थगनादेश के बावजूद बेदखली का प्रयास:जमानियां पुलिस पर आरोप, अपर जिला जज ने थाना प्रभारी से मांगा जवाब

    1 hour ago

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    गाजीपुर में न्यायालय ने पुलिस प्रशासन के रवैये पर कड़ा रुख अपनाया है। अपर जनपद न्यायाधीश शक्ति सिंह की अदालत ने जमानियां थाना प्रभारी को व्यक्तिगत शपथ-पत्र के साथ तलब किया है। यह मामला सिविल अपील संख्या-37/2025, इन्द्रासनी देवी बनाम गोवर्धन पाण्डेय से संबंधित है। मामला एक सिविल अपील से जुड़ा है। पूर्व में सिविल जज वरिष्ठ संवर्ग, गाजीपुर द्वारा 8 अप्रैल 2025 को एक निर्णय पारित किया गया था। इसके विरुद्ध इन्द्रासनी देवी ने जिला जज की अदालत में अपील दायर की थी। 22 मई 2025 को दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद, जिला जज गाजीपुर ने प्रार्थना-पत्र 6ग पर आदेश देते हुए दोनों पक्षों को विवादित संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था। बाद में यह पत्रावली अपर जिला जज शक्ति सिंह की अदालत में स्थानांतरित हुई। 22 मई 2025 को पारित यह स्थगनादेश अभी भी प्रभावी है। अपीलार्थी ने प्रार्थना-पत्र 47ग दाखिल कर अदालत को सूचित किया कि जमानियां थाना पुलिस उन्हें बेदखल कर विवादित भूमि पर कब्जा और निर्माण का प्रयास कर रही है। अपीलार्थी द्वारा पुलिस को जिला जज का स्थगनादेश दिखाए जाने पर, पुलिस ने परगनाधिकारी के आदेश का हवाला दिया। पुलिस ने यह कहते हुए कोर्ट के आदेश को मानने से इनकार कर दिया कि न्यायालय के आदेश में थाने के लिए कोई विशिष्ट निर्देश नहीं है। अपर जिला जज ने अपने आदेश में कहा कि आवेदन में थाना जमानियां से संबंधित जो तथ्य सामने आए हैं, वे प्रकरण की गंभीरता को बढ़ाते हैं और यह विधि के शासन में हस्तक्षेप का प्रयास प्रतीत होता है। कोर्ट ने साफ कहा कि जहां सिविल न्यायालय का आदेश प्रभावी है, वहां पुलिस और प्रशासन का दायित्व है कि उसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। यदि पुलिस स्वयं ही आदेश की अवहेलना में शामिल होती है, तो न्यायालय को आगे विधिक कार्रवाई करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। कोर्ट ने प्रभारी निरीक्षक, जमानियां को प्रार्थना-पत्र की प्रति भेजते हुए अगली तारीख पर व्यक्तिगत शपथ-पत्र के साथ तीन सवालों पर जवाब मांगा है: किन परिस्थितियों में जिला जज के स्थगनादेश के बावजूद उसका पालन नहीं किया गया? सिविल न्यायालय के आदेश के रहते परगनाधिकारी के आदेश को वरीयता क्यों दी गई? आदेश की अवहेलना पर आदेश 39 नियम 2ए के तहत संपत्ति कुर्क कर तीन माह तक सिविल कारावास क्यों न दिया जाए? ‘न्यायिक पदानुक्रम तक भूल गए’ कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जिला जज के स्थगनादेश के बाद भी परगनाधिकारी के आदेश को प्राथमिकता देना यह दर्शाता है कि प्रभारी निरीक्षक न्यायिक पदानुक्रम तक भूल चुके हैं। अब इस मामले में अगली तारीख पर थाना प्रभारी का जवाब और कोर्ट का रुख महत्वपूर्ण होगा। न्यायालय के सख्त तेवर से यह साफ है कि आदेश की अवहेलना पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।
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