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    कानपुर मेट्रो कॉरिडोर-2:सीएसए से बर्रा-8 के बीच नींव का काम पूरा, अब जमीन के ऊपर पिलर्स और ट्रैक बिछाने में आएगी तेजी

    1 hour ago

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    शहर के दूसरे मेट्रो कॉरिडोर (सीएसए से बर्रा-8) के निर्माण में कानपुर मेट्रो ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। लगभग 4.50 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड यानी जमीन के ऊपर वाले हिस्से में जमीन के नीचे खुदाई और पाइलिंग का काम शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। इस पूरे हिस्से में मेट्रो के भारी-भरकम पिलर्स को मजबूती देने के लिए कुल 963 पाइल्स यानी नींव के खंभे जमीन के अंदर उतारे गए हैं। यूपीएमआरसी के इंजीनियरों ने सीएसए स्टेशन के पास आखिरी पाइल का काम सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया है। नींव का काम हुआ खत्म, अब दिखेगी पिलर्स की रफ्तार मेट्रो निर्माण की तकनीकी भाषा में समझें तो पाइलिंग दरअसल पूरे ढांचे की 'जड़' होती है। मेट्रो के पिलर्स और उन पर दौड़ने वाली ट्रेनों का पूरा भार सहन करने के लिए जमीन के काफी नीचे तक खुदाई की जाती है। इसमें लोहे का भारी जाल डालकर कंक्रीट भरी जाती है। आमतौर पर 3 से 6 पाइल के समूह को ऊपर से एक 'पाइल कैप' से जोड़ दिया जाता है, जिसके ऊपर हमें दिखने वाला मेट्रो का पिलर खड़ा किया जाता है। अब यह शुरुआती और सबसे कठिन काम पूरा हो चुका है, जिससे पिलर्स और ट्रैक बिछाने के काम में और अधिक तेजी आएगी। दो हिस्सों में बन रहा एलिवेटेड सेक्शन कॉरिडोर-2 का यह एलिवेटेड सेक्शन दो अलग-अलग हिस्सों में तैयार किया जा रहा है। पहला हिस्सा सीएसए से कॉरिडोर-2 डिपो रैंप तक है, जबकि दूसरा हिस्सा डबल पुलिया रैंप से शुरू होकर बर्रा-8 तक जाता है। इस पूरे रूट पर 5 प्रमुख स्टेशन बनाए जा रहे हैं, जिनमें कृषि विश्वविद्यालय, विजय नगर चौराहा, शास्त्री चौक, बर्रा-7 और बर्रा-8 शामिल हैं। इन इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों को जल्द ही जाम से मुक्ति मिलेगी और सफर आसान होगा। अंडरग्राउंड टनल का काम भी अंतिम दौर में लगभग 8.60 किलोमीटर लंबे इस पूरे कॉरिडोर में एलिवेटेड के साथ-साथ अंडरग्राउंड हिस्सा भी शामिल है। रावतपुर, काकादेव और डबल पुलिया वाले करीब 4.10 किलोमीटर लंबे भूमिगत खंड में टनल (सुरंग) बनाने का काम हाल ही में पूरा किया जा चुका है। अब एलिवेटेड हिस्से में पाइलिंग का काम खत्म होने के बाद पूरे कॉरिडोर के सिविल स्ट्रक्चर का काम अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रहा है। यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने इस सफलता पर टीम को बधाई देते हुए कहा कि,पाइलिंग का लक्ष्य हासिल होने के बाद अब सारा ध्यान पाइल कैप की कास्टिंग और पिलर्स को खड़ा करने पर है। मेट्रो प्रशासन की कोशिश है कि शहर के इस दूसरे सबसे महत्वपूर्ण रूट को तय समय सीमा के भीतर पूरा कर जनता के सुपुर्द किया जाए। वर्तमान में आईआईटी से कानपुर सेंट्रल तक मेट्रो पहले ही दौड़ रही है और अब इस दूसरे कॉरिडोर के तैयार होने से शहर का ट्रांसपोर्ट सिस्टम पूरी तरह बदल जाएगा।
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