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    कानपुर में तेजी से फैल रहा आई फ्लू:लट-उर्सला में रोज मरीजों की भीड़, गलत आई ड्रॉप से बढ़ रहा खतरा

    1 hour ago

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    कानपुर में भीषण गर्मी और उमस के बीच आंखों की बीमारी कंजक्टिवाइटिस (आई फ्लू) तेजी से फैलने लगी है। हैलट (एलएलआर), उर्सला और कांशीराम अस्पताल की ओपीडी में हर दिन आंखों के संक्रमण से जूझते मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं। इस बार साधारण आई फ्लू के साथ माइक्रोस्पोरिडियोसिस संक्रमण भी देखने को मिल रहा है, जो आंखों की रोशनी के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। आंकड़ों के अनुसार, अकेले एलएलआर अस्पताल की ओपीडी में रोजाना औसतन 30 मरीज पहुंच रहे हैं। वहीं उर्सला में 27 और कांशीराम अस्पताल में करीब 15 नए मामले सामने आ रहे हैं। धूल, पसीना और तेज धूप इस संक्रमण को और ज्यादा गंभीर बना रहे हैं। संक्रमित मरीजों की आंखों में गाढ़ा पीला कीचड़ आना, पलकों में भारी सूजन और तेज जलन जैसी समस्याएं देखी जा रही हैं। समय पर इलाज न मिला तो दिमाग तक पहुंच सकता है संक्रमण जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की नेत्र रोग विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. शालिनी मोहन के अनुसार, इस बार का संक्रमण पिछले वर्षों की तुलना में अधिक गंभीर है। आमतौर पर सीजनल आई फ्लू 5 से 7 दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन इस समय सामने आ रहे बैक्टीरियल कंजक्टिवाइटिस को पूरी तरह ठीक होने में 2 से 3 सप्ताह तक लग रहे हैं। उन्होंने बताया कि यदि समय पर सही इलाज न मिले, तो बैक्टीरिया आंख की आई बॉल के पिछले हिस्से से होते हुए मस्तिष्क तक पहुंच सकता है। इससे न केवल आंखों की कॉर्निया को नुकसान होता है, बल्कि दिमाग के कई हिस्सों पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। सेल्फ मेडिकेशन से बढ़ रहा कॉर्निया अल्सर डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लोग बिना डॉक्टरी सलाह के मेडिकल स्टोर से स्टेरॉयड वाली आई ड्रॉप खरीदकर इस्तेमाल कर रहे हैं। इस लापरवाही के कारण ओपीडी में कॉर्निया अल्सर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कॉर्निया आंख का सामने वाला वह हिस्सा होता है, जहां घाव होने पर रोशनी अंदर नहीं जा पाती। ऐसी स्थिति में ठीक होने के बाद भी आंख में स्थायी निशान बन सकता है, जो जीवनभर दृष्टि को प्रभावित कर सकता है। कई मरीजों को ठीक करने के लिए अब हाई एंटीबायोटिक दवाओं का सहारा लेना पड़ रहा है। कमजोर इम्यूनिटी वालों को सबसे ज्यादा खतरा बैक्टीरियल कंजक्टिवाइटिस का सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों में देखा जा रहा है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है। खासकर टीबी, एचआईवी, चर्म रोग और एनीमिया यानी कम हीमोग्लोबिन वाले मरीजों पर यह संक्रमण तेजी से हमला कर रहा है। ऐसे लोगों को आंखों में हल्की लाली या खुजली होने पर भी तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। बचाव के लिए इन बातों का रखें ध्यान संक्रमण से बचने के लिए आंखों को बार-बार छूने या धोने से बचें। यदि हाथ आंखों पर लग जाए, तो तुरंत सैनिटाइज करें। मरीज अपना रुमाल और तौलिया परिवार के अन्य सदस्यों से अलग रखें और धूल भरे क्षेत्रों में जाने से बचें। संक्रमण के दौरान कॉन्टैक्ट लेंस का प्रयोग बिल्कुल न करें। स्विमिंग पूल और लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन देखने से भी परहेज करें। आंखों में जलन होने पर ठंडे पानी के हल्के छींटे मारे जा सकते हैं, लेकिन किसी भी दवा का इस्तेमाल बिना डॉक्टर की सलाह के न करें।
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