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    कानपुर-कचहरी की 5वीं मंजिल से कूदकर वकील ने जान दी:लिखा- बच्चों पर उतना ही टॉर्चर करें, जितना सह सकें; पापा आप जीत गए, मैं हारा

    8 hours ago

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    "मैं प्रियांशु श्रीवास्तव आज 23 अप्रैल को दोपहर 12.05 बजे सुसाइड नोट लिख कर अपनी जान दे रहा हूं। 23 साल की उम्र तक जो चीजें मेरे साथ घटित हुई हैं, मुझे नहीं लगता कि इस तरह से बेगैरत की जिंदगी जीने के लायक है। करीब 6 वर्ष की उम्र में फ्रिज में रखा आम का जूस पी लिया तो निर्वस्त्र कर घर से बाहर भगा दिया गया। माना कि हर मां–बाप को शुरू से ही सख्त रवैया अपनाना चाहिए, लेकिन इतनी भी सख्ती न हो कि बच्चों को हर पल घुटन महसूस होने लगे। पढ़ाई के लिए जरूरत से ज्यादा प्रेशर करना, सिलेबस पूरा नहीं है तो मारने लग जाना। हर मिनट शक की नजरों से देखना, एक एक मिनट का हिसाब लेना… ये मानसिक टॉर्चर ही है। हाईस्कूल रिजल्ट आने से पहले मेरे पापा ने मुझे धमकी दी कि अगर नंबर कम आए तो निर्वस्त्र कर घर से भगा देंगे। रोज घुट–घुट कर मरने से लाख गुना बेहतर है कि एक दिन मरके खत्म हो। सभी मां–बाप से मेरी यह अपील है कि अपने बच्चों पर उतना ही टॉर्चर करें, जितना वो बर्दाश्त कर सकें। मेरा ये निवेदन है कि मेरी लाश को मेरे पापा छू भी न पाएं। मैं उन पर कोई भी कार्रवाई नहीं करना चाहता हूं, ताकि मेरा परिवार बर्बाद न हो। मैं हार गया, पापा जीत गए। लव यू मम्मी…।'' दो पेज में सुसाइड की ये बातें लिखकर कानपुर में 23 साल के वकील प्रियांशु श्रीवास्तव गुरुवार दोपहर कचहरी की 5वीं मंजिल से कूद गए। उनकी मौत हो गई। विस्तार से जानिए पूरा मामला- 15 मिनट बैठने के बाद खिड़की से कूदा बर्रा-8, वरुण विहार निवासी वकील राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव का 23 साल का बेटा प्रियांशु श्रीवास्तव लॉ ग्रेजुएशन करने के बाद पिता के साथ प्रैक्टिस कर रहा था। गुरुवार दोपहर प्रियांशु कचहरी परिसर की 5वी मंजिल पर पहुंचा। जहां टूटी हुई खिड़की की बाउंड्री पर जाकर बैठ गया। करीब 15 मिनट तक खिड़की के पास बैठने के बाद खिड़की से कूद गया। तेज धमाके की आवाज सुनकर आसपास के वकील मौके पर पहुंचे तो प्रियांशु लहुलूहान हालत में पड़ा हुआ था। उसे साथी वकील और पुलिस उर्सला अस्पताल लेकर पहुंची, जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। मृतक के मोबाइल में दो पेज का सुसाइड नोट भी पुलिस को मिला। पुलिस ने घटना का जानकारी मृतक के परिजनों को देकर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया है। जांच में सामने आया कि अधिवक्ता ने सुसाइड करने से पहले दोपहर 12.05 बजे 2 पेज का सुसाइड नोट लिखा। इसे वॉट्सऐप स्टेटस पर लगाया। सुसाइड से 21 मिनट पहले सुसाइड नोट अपने वॉट्सऐप स्टेट्स पर लगाया था। साथ ही नोट अपने पिता और दोस्तों को भी फारवर्ड किया था। जब तक परिजन और दोस्त सुसाइड नोट देखते, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने मोबाइल कब्जे में लेकर स्टेटस और अन्य पहलुओं की जांच शुरू कर दी है। साथी वकील शरद ने बताया कि कुछ दिनों पहले ही प्रियांशु से मुलाकात हुई थी, वह भी प्रियांशु के साथ प्रैक्टिस कर रहा था। बातचीत में कभी ऐसा लगा नहीं कि वह इतने तनाव से गुजर रहा है। उसने कभी परिवार को लेकर इस तरह की बातों का जिक्र नहीं किया था। अब पढ़िए सुसाइड नोट में क्या लिखा है… करीब 5 साल की उम्र में ही मुझे मानसिक यातनाएं मिलनी शुरू हो गई मेरी ये अंतिम इच्छा है कि सब लोग मेरे इस सुसाइड नोट को अंत तक पूरा पढ़े… मैं प्रियांशु श्रीवास्तव निवासी वरुण विहार, बर्रा-8 कानपुर का रहने वाला हूं। आज 23 अप्रैल समय लगभग दोपहर 12.05 बजे मैं अपने पूरे होश में बिना किसी जोर–दबाव और जबरदस्ती के यह सुसाइड नोट लिख कर अपनी जान दे रहा हूं। मैं एक रजिस्टर्ड अधिवक्ता हूं, जिसने अपनी लॉ की पढ़ाई कानपुर नगर से 2025 में पूरी की है। समय की कमी होने के कारण मैं अपना पंजीकरण उत्तर प्रदेश बार कांउसिल प्रयागराज से प्राप्त नहीं कर सका हूं। कहानी शुरू होती है मेरे बचपन से, जहां करीब 5 या 6 वर्ष की उम्र में ही मुझे मानसिक यातनाएं मिलनी शुरू हो गई। बताने में तो मुझे बहुत शर्म महसूस हो रही है, लेकिन मैं आज ये सारी बातें जरूर बताना चाहूंगा, क्योकि जो आज मैं यह कदम उठाने जा रहा हूं… भविष्य में ऐसी नौबत किसी के साथ न आ जाए। 6 साल की उम्र में फ्रिज से जूस पी लिया तो निर्वस्त्र कर पीटा था करीब 6 वर्ष की उम्र में मुझे चोरी से सिर्फ फ्रिज में रखे आम के जूस को पीने के चलते निर्वस्त्र करके घर से बाहर भगा दिया गया। माना कि हर मां–बाप को शुरू से ही सख्त रवैया अपनाना चाहिए, ताकि उनके बच्चों का भविष्य संवर सके। परंतु इतनी भी सख्ती न हो कि बच्चों को हर पल घुटन महसूस होने लगे। मैंने कई बार कोशिश की कि इन सब माहौल से निकल आगे बढ़कर जिंदगी जी सकूं। परंतु 23 साल की उम्र तक आज तक जो चीजें मेरे साथ घटित हुई हैं, मुझे नहीं लगता कि इस तरह से बेगैरत की जिंदगी जीने के लायक है। पढ़ाई के लिए जरूरत से ज्यादा प्रेशर करना, परीक्षा से एक दिन पहले अगर सिलेबस पूरा तैयार नहीं है तो मारने लग जाना। ये सब तो एक हद तक समझ आया है। लेकिन, हर समय हर मिनट शक की नजरों से देखना, जरूरत से ज्यादा, एक एक मिनट का हिसाब लेना, कहीं न कहीं ये मानसिक टॉर्चर ही है। इस टॉर्चर के साथ मैं ज्यादा समय तक और नहीं जी सकता हूं। सख्ती लगाव और प्रेम इस सीमा तक भी नहीं होना चाहिए कि वो नफरत में बदल जाए। पिता ने धमकाया था, हाईस्कूल में अच्छे नंबर न आए तो निर्वस्त्र कर घर से भगा दूंगा बात है वर्ष 2016 की। कक्षा 9 में प्रवेश के दौरान मेरे पापा ने ये शर्त रखी थी कि मैं अगर कंप्यूटर ऑफ फिजिकल एजुकेशन के विषय में कंप्यूटर का चयन नहीं करूंगा तो वो मुझे पूरा निर्वस्त्र कर घर से भगा देंगे। उनके दबाव में आकर मैंने ऐसे विषय का चयन किया, जिसमें मेरी रूचि नहीं थी। जिसका नतीजा यह रहा कि मेरे 9वीं में उस विषय को ज्यादा पढ़ने के बावजूद उसमें ज्यादा नंबर नहीं ला सका। इसके चलते अन्य विषयों में कम समय देने के कारण मेरे 9वीं के रिजल्ट में कम नंबर आए। वर्ष 2016 में घर के निर्माण काम में करीब 4 महीने का समय लग जाने के चलते मेरे हाईस्कूल की पढ़ाई ज्यादा प्रभावित हुई। रिजल्ट आने से पहले मेरे पापा द्वारा मुझे धमकी दी गई कि अगर हाईस्कूल में नंबर कम आए तो पूरा निर्वस्त्र कर घर से भगा देंगे। घर और समाज में इज्जत जाने के भय से मैंने घर से भागकर ट्रेन से मथुरा स्टेशन तक पहुंच गया था। क्योंकि मुझे पूरा विश्वास था कि अगर मेरे नंबर कम आए तो जो उन्होंने व्यवहार मेरे साथ छोटी उम्र में निर्वस्त्र कर किया था, वहीं हाल वे मेरा इस बार भी कर देंगे। पिता चिल्लाकर मोहल्ले में मुझे बेइज्जत करते हैं छोटी उम्र में अगर मैंने सही, गलत और ज्ञान के अभाव में एक या दो रुपए का सिक्का टॉफी खाने के लालच में चुरा लिया होता तो आज की तारीख तक घर से जुड़े किसी भी बात में बहस के समय पापा मुझे चिल्ला–चिल्ला कर गाली देकर मोहल्ले में मेरी बेईज्जती करते हैं। इंटर की परीक्षा वर्ष सन 2018 में मेरे घर में निर्माण कार्य के चलते फिर से चार महीने का समय लगा। जिससे मेरी पढ़ाई प्रभावित हुई। फलस्वरूप मेरे नंबर इंटर में भी 60% आए। मैं एक मध्यम वर्ग परिवार से ताल्लुक रखता हूं, जिसे हमेशा यह ख्याल रहता है कि घर का मेहनत से जोड़ा गया पैसा कम से प्रयोग करो। इंटर पास होते ही मैंने ट्यूशन पढ़ाने शुरू कर दिए। जिससे कि मैं अपने घर वालों पर बोझ न बन सकूं। जब मुझे यह महसूस हुआ कि इस काम में ज्यादा मेहनत है तो मैंने अपना खुद का ऑनलाइन इंटरनेट वर्क स्टार्ट कर दिया। इससे कि मैं साइड में अपना काम कर घर का खर्च अपनी जरूरतों को बिना घर में किसी से मांगे पूरा कर सकूं। इस दौरान मैंने अपना मोबाइल और पापा का मोबाइल, बहन का मोबाइल, स्कूटी घर के दैनिक खर्चों, जरूरतों और बिजली के बिल का खर्च स्वयं वहन किया। लेकिन, इन सब प्रयासों के बावजूद मेरे पिता जी मुझे नामर्द, अपंग, विकलांग तरह–तरह की गंदी गालियां और अपशब्दों का प्रयोग कर घर से बाहर निकाल कर चिल्लाकर मुझे बेईज्जत करते हैं। मैं दिनभर उनके कचहरी के काम में उनका सहयोग कर उनका कार्यभार कम करने की कोशिश करता हूं, न ही मेरे कोई गलत शौक है, न ही मैं किसी गलत संगत में लिप्त हूं। आज मैं मजबूर हूं कि मेरे पास खुद का घर नहीं… पूरा दिन सिर्फ अपने काम को आगे बढ़ाने का प्रयास करता हूं। बावजूद इसके मुझे सिर्फ और सिर्फ जलील किया जा रहा है। बात–बात में किसी मामूली विवाद के चलते घर से निकल जाने और ऑफिस छोड़ने की धमकी दी जाती है। आज मैं मजबूर हूं कि मेरे पास खुद का घर नहीं है, आफिस नहीं है। हर रोज इस तरह से बेइज्जती करके धमकी दी जा रही है। मैंने जिन लोगों के प्रति अपना 24 घंटा लगा दिया। अपने जरूरी काम छोड़कर उनके काम में ध्यान दिया। आज उन्होंने ही मुझे मोहल्ले में बेइज्जत कर मेरी इज्जत खत्म कर दी है। हर समय, हर मिनट कहां जा रहे हो, कब आओगे, किसका फोन आया है? क्या बातें की? जरूरत से ज्यादा मेरी जिंदगी में दखल देकर हर रोज मेरी जिंदगी घुटन जैसी हो गई है। और रोज रोज घुट–घुट कर मरने से लाख गुना बेहतर है कि एक दिन मरके खत्म हो। आज जो उन्होंने मेरे साथ मोहल्ले में बर्ताव किया है, उससे मेरी इज्जत धुल चुकी है। वह सिर्फ तेज आवाज में चिल्ला कर झूठा साबित कर नीचा दिखाने का प्रयास करते हैं। उन्हें उनकी जीत मुबारक हो। इतनी बंदिशों और बेइज्जती के साथ और नहीं जी सकता हूं आज मैं कचहरी परिसर में आत्महत्या करने जा रहा हूं, क्योंकि इतनी बंदिशों और बेइज्जती के साथ और नहीं जी सकता हूं। मां–बाप की 25वीं वर्षगांठ के लिए मैंने अपनी क्षमता अनुसार चांदी की अंगूठी गिफ्ट में देने की बात बताई थी, परंतु कुछ बाप ऐसे बेटे को डिजर्व ही नहीं करते हैं। सभी मां–बाप से मेरी यह अपील है कि अपने बच्चों पर उतना ही टॉर्चर करें, जितना वो बर्दाश्त कर सकें। नहीं तो अंत में हर किसी के साथ यही हश्र होगा। मेरा ये निवेदन है कि मेरी लाश को मेरे पापा छू भी न पाएं। मैं उन पर कोई भी कार्रवाई नहीं करना चाहता हूं, ताकि मेरा परिवार बर्बाद न हो। ऐसे पिता भगवान किसी को न मिलें, अगर समाज को जरा-सा भी यह लगता है कि मैं गलत हूं, तो मैं वे सब मेरी मां, बहन और मोहल्ले वालों से मेरे बारे में पूछ लें। मैं ऐसी ही बंदिशों और बेगैरत की तरह जिंदगी और नहीं जी सकता। मेरे सारे एफर्ट, कोशिश, भविष्य में कुछ बनने के सपने, आज सब खत्म हो जाएंगे। मैं हार गया, पापा जीत गए। लव यू मम्मी…। ------------------------ ये खबर भी पढ़िए- लोग चाहते हैं-UP के 354 विधायकों को टिकट न मिले, भास्कर के सबसे बड़े सर्वे के नतीजे, 88% भाजपा, 91% सपा विधायकों से लोग नाखुश यूपी में विधायकों को लेकर दैनिक भास्कर के सबसे बड़े सर्वे के चौंकाने वाले नतीजे आए हैं। मौजूदा 400 में से 354 यानी 88.5% विधायकों को लोग 2027 के चुनाव में दोबारा उम्मीदवार देखना नहीं चाहते। पार्टीवाइज देखें तो लोग चाहते हैं कि भाजपा के 257 विधायकों में 226, यानी 88% को दोबारा टिकट न मिले। सपा के 105 विधायकों में से 96, यानी 91% से लोग नाराज हैं। भाजपा के सहयोगी दलों के 33 में से 30 विधायक लोगों को पसंद नहीं आए। पढ़ें पूरी खबर…
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