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    कम उम्र की लड़कियों में बढ़ रहा ओवेरियन कैंसर:कानपुर की डॉ. सीमा बोलीं- 20 साल की युवतियां पीड़ित, कीटनाशक और खराब जीवनशैली से बढ़े केस

    2 hours ago

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    कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जच्चा-बच्चा अस्पताल में इन दिनों ओवेरियन (अंडाशय) कैंसर और गर्भाशय की गांठों के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। हैरान करने वाली बात यह है कि जो बीमारी पहले 50-60 साल की उम्र के बाद सामने आती थी, अब 20-30 साल की युवतियों और टीनएजर्स में भी तेजी से दिख रही है। डॉक्टर इसे बदलती लाइफस्टाइल और खान-पान से जुड़ा गंभीर संकेत मान रहे हैं। तीन महीने में 7-8 जटिल केस, हर महीने 20-30 नए मरीज स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सीमा द्विवेदी ने बताया कि पहले ऐसे मामले छह महीने या साल में एक-दो ही आते थे, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। उनकी यूनिट में ही पिछले तीन महीनों में 7 से 8 जटिल केस सामने आ चुके हैं। अगर पूरे अस्पताल के आंकड़े देखें, तो हर महीने करीब 20 से 30 नए कैंसर मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। ओवेरियन कैंसर के मामलों में यह अचानक उछाल चिकित्सा क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बन गया है। जंक फूड, प्रदूषण और कीटनाशक बन रहे बड़ा कारण डॉक्टरों के अनुसार, फसलों और सब्जियों में बढ़ता कीटनाशकों का इस्तेमाल, प्रदूषण और युवाओं में जंक फूड की बढ़ती आदत शरीर को अंदर से कमजोर कर रही है। इसके साथ ही अनियमित दिनचर्या- न समय पर सोना, न उठना, बीमारियों को बढ़ावा दे रही है। पहले के मुकाबले अब शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हुई है, जिससे कैंसर अधिक आक्रामक रूप में सामने आ रहा है। देरी से पहुंचती हैं मरीज, ऑपरेशन बन रहा चुनौतीपूर्ण डॉ. द्विवेदी ने बताया कि अधिकतर महिलाएं शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं। जब तक वे अस्पताल पहुंचती हैं, तब तक बीमारी स्टेज 2, 3 या 4 तक पहुंच चुकी होती है। ऐसे में ऑपरेशन करना बेहद मुश्किल हो जाता है, क्योंकि कैंसर की गांठें मूत्राशय और आंत जैसे अंगों से चिपक जाती हैं। हाल के मामलों में 2-3 एक्सपर्ट टीमों को एक साथ लगाकर घंटों ऑपरेशन करना पड़ा। इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज महिलाओं को माहवारी में अनियमितता, अत्यधिक ब्लीडिंग, पेट या पेडू में भारीपन, पेट का अचानक बढ़ना, लगातार अपच या भूख कम लगना जैसे लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिए। डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती स्टेज में बीमारी पकड़ में आ जाए तो इलाज संभव है, लेकिन देरी जानलेवा हो सकती है। संतुलित जीवनशैली और नियमित जांच ही बचाव विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ रहने के लिए संतुलित आहार, समय पर नींद और नियमित दिनचर्या बेहद जरूरी है। जंक फूड से दूरी, मानसिक तनाव से बचाव और समय-समय पर हेल्थ चेकअप इस बीमारी से बचने के सबसे प्रभावी उपाय हैं।
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