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    केएनपीजी महाविद्यालय में महिला आरक्षण संगोष्ठी आयोजित:प्राचार्य बोले- भारतीय राजनीति में महिला आरक्षण समय की आवश्यकता

    1 hour ago

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    भदोही के ज्ञानपुर स्थित काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भारतीय राजनीति में महिला आरक्षण के औचित्य विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी शासन के निर्देशानुसार हुई, जिसकी अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. रमेश चंद्र यादव ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य और वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. बालकेश्वर ने सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया। अपनी अध्यक्षीय टिप्पणी में प्राचार्य डॉ. रमेश चंद्र यादव ने कहा कि भारतीय राजनीति में महिला आरक्षण केवल औचित्य का विषय नहीं, बल्कि समय की आवश्यकता है। उन्होंने जोर दिया कि आजादी के 75 वर्षों बाद भी भारतीय संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व मात्र 15 प्रतिशत तक सीमित है, जबकि आधी आबादी को आधा प्रतिनिधित्व मिलना अनिवार्य है। मध्यकालीन इतिहास के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. बालकेश्वर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महिला आरक्षण विधेयक भारतीय समाज सुधारक ज्योतिबा फुले और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के उस सपने को साकार करने में सहायक होगा, जिसमें आधी आबादी को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व तभी बढ़ेगा जब समाज शिक्षित होगा और लोकतंत्र में समावेशी विकास का दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। संगोष्ठी का संचालन संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. ऋचा ने किया। कार्यक्रम संयोजिका डॉ. अंशु बाला ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023' को एक ऐतिहासिक कदम बताया और भारतीय संसद में महिला आरक्षण पर समय-समय पर हुए प्रयासों पर विस्तार से चर्चा की। संस्कृत विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. ऊष्मा ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी के बिना विकसित भारत की संकल्पना को साकार नहीं किया जा सकता है। महाविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की विभाग प्रभारी डॉ सिमी आज़म ने लैंगिक विभेद पर चर्चा कर भारतीय राजनीति में महिला आरक्षण विधेयक की आवश्यकता क्यों पड़ी इस पर विस्तार से चर्चा किया। हिंदी विभाग की प्राध्यापिका डॉ ज्योति यादव ने कहा कि संसद देश की धड़कन को प्रतिबिंबित करने वाला दर्पण है, इस दर्पण में आधी आबादी का आधा प्रतिनिधित्व होना आवश्यक है ,और यह प्रतिनिधित्व सभी वर्गों की महिलाओं की उपस्थिति के साथ ही होना चाहिए। बी.एड विभाग से सहायक प्रोफेसर डॉ लता ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि जब तक नीति निर्माण में महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित नहीं हो जाती तब तक आदि आबादी के साथ न्याय के लिए निरंतर प्रयास की आवश्यकता है। गृह विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ जान्हवी ने आधी आबादी के प्रतिनिधित्व के बिना विकास संभव नहीं है इस तथ्य पर प्रकाश डाला। डॉ शिखा मेहता ने आरक्षण के साथ महिला सशक्तिकरण हेतु महिलाओं में अधिकारों के प्रति जागरूकता पर बल दिया। डॉ मधु , डॉ ज्योति तिवारी ,डॉ निधि खन्ना तथा डॉ रजनीश आदि ने इस विषय पर अपने विचार रखें । उक्त कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया ।कुमारी गुंजा राय कुमारी आंचल मिश्रा ,रंजीत यादव,नेहा दुबे ,उपासना इत्यादि छात्र-छात्राओं ने भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं के प्रतिनिधित्व हेतु महिला आरक्षण के आवश्यकता पर अपने विचार रखें ।इस अवसर पर महाविद्यालय के अधिकांश प्राध्यापक गण तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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