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    जयपुर में कैफे ने धोती-चप्पल पर कस्टर की एंट्री रोकी:मैनेजमेंट बोला- ओपन फुटवियर में प्रवेश नहीं; आचार्य ने कहा- वेशभूषा के आधार पर भेदभाव बर्दाश्त नहीं

    7 hours ago

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    जयपुर में एक रेस्टोरेंट में कस्टमर को धोती और चप्पल की वजह से एंट्री नहीं दी गई। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर रहा है। वहीं घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर होने के बाद यूजर्स में रेस्टोरेंट में 'ड्रेस कोड' बनाम 'भारतीय संस्कृति' पर बहस छिड़ गई है। घटना 12 अप्रेल की जेएलएन मार्ग स्थित रेस्टोरेंट '1932-ट्रेवी' की है। वृंदावन से आए एक आचार्य सतीश कृष्णा को उनकी पारंपरिक वेशभूषा यानी धोती और चप्पल की वजह से रेस्टोरेंट के कर्मचारियों ने उन्हें एंट्री देने से इनकार कर दिया था। इस पर आचार्य सतीश कृष्णा ने वीडियो बनाते हुए कहा- राजस्थान गौरवशाली परंपराओं के लिए जाना जाता है। यहां भारतीय वेशभूषा के आधार पर भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। वहीं कैफे के फ्लोर मैनेजर विश्वजीत ने कहा- कैफे में एंट्री के कुछ ड्रेस कोड हैं, जिन्हें फॉलो करना जरूरी है। उनका तर्क है कि यहां आने के लिए 'शूज और ट्राउजर्स' पहनना अनिवार्य है। हालांकि उन्होंने कहा कि युवक ने कांट-छाटकर वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया। आचार्य बोले- रेस्टोरेंट ने शूज और ट्राउजर्स में आने के लिए कहा वीडियो में दिख रहे शख्स का नाम आचार्य सतीश कृष्णा है, वे उत्तर प्रदेश के वृंदावन के निवासी हैं। आचार्य कृष्णा भगवान श्री कृष्ण और राम के भक्त हैं। वे सामान्यतः इसी वेशभूषा (धोती और साधारण पहनावे) में रहते हैं। वे किसी काम से वृंदावन से जयपुर आए थे। जब वे जेएलएन मार्ग स्थित एक कैफे में पहुंचे तो वहां तैनात स्टाफ ने उन्हें दरवाजे पर ही रोक दिया। आचार्य का आरोप है- कैफे में जाने से मुझे सिर्फ इसलिए रोका गया, क्योंकि मैंने जूते और पैंट नहीं पहनी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कैफेकर्मियों ने मुझसे कहा कि यहां का नियम है कि केवल वेस्टर्न वेशभूषा या औपचारिक जूतों में ही आ सकते हैं। कैफेकर्मियों ने धोती और चप्पल में एंट्री देना कैफे की पॉलिसी के खिलाफ बताया। आचार्य ने सीएम और गृह राज्य मंत्री से लगाई गुहार आचार्य सतीश कृष्णा ने मौके पर वीडियो बनाकर पीड़ा बताई। वहीं एक वीडियो में उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम को संबोधित करते हुए कहा- राजस्थान जैसे राज्य में, जो गौरवशाली परंपराओं के लिए जाना जाता है। वहां भारतीय वेशभूषा के आधार पर भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कैफे प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। मैनेजर ने कहा- ओपन फुटवियर, शॉर्ट्स और स्पॉर्ट्स टाउजर में एंट्री नहीं कैफे के फ्लोर मैनेजर विश्वजीत ने बताया- वीडियो की घटना 12 अप्रेल की है। उन्होंने बताया कि कैफे में एंट्री का बाकायदा ड्रेस कोड है, जिसके लिए आचार्य को कहा गया। फ्लोर मैनेजर ने आरोप लगाया कि वह शख्स कैफे शुरू होने के आधे घंटे पहले आए थे। कैफे खुलने का समय 12:30 बजे है। इस समय से पहले शख्स किसी महिला के साथ यहां आए। तब उनसे कैफे की पॉलिसी के अनुसार ओपन फुटवियर में एंट्री नहीं देने की बात कही थी, लेकिन शख्स बार-बार ओपन फुटवियर की जगह धोती को कोड करके अपनी महिला साथी के साथ वीडियो बना रहे थे। फ्लोर मैनेजर विश्वजीत ने बताया- वीडियो कांट-छांट कर जारी किया गया है। फ्लोर मैनेजर विश्वजीत ने कहा- जो गेस्ट आए थे। वे शायद वीडियो बनाने के मकसद से ही आए थे। वीडियो बनाने वाले सतीश गुप्ता ने मौके से ही कुछ ऑफिसर्स को कथित रूप से फोन भी किया और डायरेक्टर्स को देख लेने की बात भी कही। वहीं उन्होंने घटनाक्रम के तीन सीसीटीवी वीडियो भास्कर को उपलब्ध करवाए हैं, जिसमें घटनाक्रम नजर आ रहा है। साथ ही मामला बढ़ने पर पुलिस की पेट्रोलिंग टीम 112 चेतक भी मौके पर पहुंची थी। सोशल मीडिया पर कैफे के खिलाफ आए लोग वीडियो शेयर होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने कैफे के इस रवैये को लेकर नाराजगी जताई है। लोगों ने कहा- भारत में रहकर भारतीय पहनावे पर पाबंदी लगाना गुलामी की मानसिकता का परिचायक है। वहीं कुछ लोगों ने इसे कैफे का निजी अधिकार बताया है, लेकिन बहुसंख्यक वर्ग आचार्य के समर्थन में खड़ा दिख रहा है। बता दें कि मामले में अब तक कैफे की ओर से थाने में शिकायत दर्ज नहीं की है। हालांकि मामले में कर्मचारी कैफे संचालक से चर्चा करने के बाद थाने में शिकायत दर्ज करने की बात कह रहे हैं।
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