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    जयपुर कैफे विवाद: धोती-चप्पल पर एंट्री रोकी:सोशल-मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही छिड़ी बहस; कैफे मैनेजमेंट बोला- ओपन फुटवियर में नहीं देते एंट्री

    4 hours ago

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    राजस्थान की राजधानी जयपुर से सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद धोती चप्पल को लेकर बहस छीड़ गई है। वायरल वीडियो में JLN मार्ग स्थित रेस्टोरेंट 1932-ट्रेवी में वृंदावन से आए एक आचार्य को उनकी पारंपरिक वेशभूषा यानी लुंगी और चप्पल की वजह से प्रवेश देने से इनकार कर दिया गया। इधर कैफे के फ्लोर मैनेजर विश्वजीत ने दलील दी कि उनके कैफे में एन्ट्री के कुछ ड्रेस कोड हैं जिन्हें फॉलो किया जाना ज़रूरी है। उनका का तर्क है कि यहां आने के लिए 'शूज़ और ट्राउज़र्स' पहनना अनिवार्य है। हालांकि उन्होंने वायरल वीडियो पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वीडियों में दिख रहे युवक ने कांट छाट कर वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया है। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे 'ड्रेस कोड' बनाम 'भारतीय संस्कृति' की नई बहस छिड़ गई है। उत्तर प्रदेश के वृंदावन के निवासी हैं आचार्य सतीश कृष्णा वीडियो में दिख रहे शख्स का नाम आचार्य सतीश कृष्णा है, जो उत्तर प्रदेश के वृंदावन के निवासी हैं। आचार्य कृष्णा भगवान श्री कृष्ण और राम के अनन्य भक्त हैं और सामान्यतः इसी सात्विक वेशभूषा (लुंगी और साधारण पहनावे) में रहते हैं। वे किसी कार्यवश वृंदावन से जयपुर आए थे और जब वे जेएलएन मार्ग स्थित एक नामी कैफे में पहुंचे, तो वहां तैनात स्टाफ ने उन्हें दरवाजे पर ही रोक दिया। 'शूज़ और ट्राउज़र्स में आएं, लुंगी अलाउड नहीं' आचार्य का आरोप है कि उन्हें कैफे के अंदर जाने से सिर्फ इसलिए रोका गया क्योंकि उन्होंने जूते और पैंट नहीं पहनी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कैफे कर्मियों ने उनसे कहा कि यहां का नियम है कि यहां केवल वेस्टर्न वेशभूषा या औपचारिक जूतों में ही आ सकते हैं। लुंगी और चप्पल में एंट्री देना कैफे की पॉलिसी के खिलाफ बताया। आहत आचार्य ने सीएम और गृह मंत्री से लगाई गुहार उन्होंने मौके पर ही वीडियो बनाकर अपनी पीड़ा साझा की। एक दूसरे वीडियो में उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम को संबोधित करते हुए कहा कि राजस्थान जैसे राज्य में, जो अपनी गौरवशाली परंपराओं के लिए जाना जाता है, वहां भारतीय वेशभूषा के आधार पर भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कैफे प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। ओपन फुट वियर, शॉर्ट्स और स्पॉर्ट्स टाउजर में नहीं एंट्री कैफे के फ्लोर मैनेजर विश्वजीत ने बताया कि वायरल हो रहे वीडियो की घटना रविवार 12 अप्रेल की है। उन्होंने बताया कि कैफे में एन्ट्री के बाकायदा ड्रेस कोड हैं जिसके लिए आचार्य को कहा गया। फ्लोर मैनेजर ने आरोप लगाया कि वायरल वीडियो में शख्स कैफे शुरू होने के आधे घंटे पहले ही कैफे में आए थे। कैफे खुलने का समय 12.30 बजे है। वायरल शख्स किसी महिला के साथ आधा घंटा पहले यहां आए थे। तब उनसे कैफे की पॉलिसी के अनुसार ओपन फुट वियर में एंट्री नहीं देने की बात कही थी। लेकिन शख्स बार-बार ओपन फुट वियर की जगह धोती को कोड करके अपनी महिला साथी के साथ वीडियो बना रहे थे। उन्होंने बताया कि वीडियो कांट छांट कर जारी किया गया है। उन्होंने कहा- जो गेस्ट आए थे वे शायद वीडियो बनाने के मकसद से ही आए थे। वीडियो बनाने वाले सतीश गुप्ता ने मौके से ही कुछ ऑफिसर्स को कथित रूप से फोन भी किया, और डायरेक्टर्स को देख लेने की बात भी कही। उन्होंने घटनाक्रम के तीन सीसीटीवी वीडियो भास्कर को उपलब्ध करवाएं है जिसमें घटनाक्रम भी नजर आ रहा है। साथ ही मामला बढ़ने पर पुलिस की पेट्रोलिंग टीम 112 चेतक भी मौके पर पहुंची थी। सोशल मीडिया पर कैफे के खिलाफ आए लोग वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने कैफे के इस रवैये को लेकर नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि भारत में रहकर भारतीय पहनावे पर पाबंदी लगाना गुलामी की मानसिकता का परिचायक है। वहीं कुछ लोगों ने इसे कैफे का निजी अधिकार बताया है, लेकिन बहुसंख्यक वर्ग आचार्य के समर्थन में खड़ा दिख रहा है। बता दें कि मामले में अब तक कैफे की ओर से थाने में शिकायत दर्ज नहीं की है, हालांकि मामले में कैफ कर्मचारी संचालक से चर्चा करने के बाद संबंधित थाने में शिकायत दर्ज करने की बात कह रहे है।
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