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    जौनपुर DM ने स्कूलों को दिए कड़े निर्देश:फीस, वाहन, किताबों की मनमानी पर कार्रवाई; बिना फिटनेस वाहन न चलें

    12 hours ago

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    जौनपुर में जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने स्ववित्तपोषित विद्यालयों के शुल्क विनियमन अधिनियम 2018 पर एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित इस बैठक में सीबीएसई, आईसीएसई और यूपी बोर्ड से मान्यता प्राप्त सभी विद्यालयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जिलाधिकारी ने इस दौरान विद्यालयों को कई कड़े निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि बिना फिटनेस के कोई भी स्कूली वाहन संचालित नहीं होना चाहिए। उन्होंने बिना फिटनेस वाले वाहनों पर तत्काल कार्रवाई करने और बच्चों की ओवरलोडिंग रोकने का आदेश दिया। प्रत्येक स्कूल बस की फिटनेस जांच के बाद ही उसे चलाने की अनुमति होगी। विद्यालयों में वाहन पार्किंग की उचित व्यवस्था भी अनिवार्य की गई है। संबंधित पोर्टल पर वाहन फिटनेस की जानकारी अपलोड करना भी सुनिश्चित करने को कहा गया है। बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि विद्यालय प्रबंधन किसी भी बच्चे के अभिभावक को ड्रेस या किताबें किसी निश्चित दुकान से खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा। विद्यालय समिति को शासनादेश के अनुसार ही शिक्षण शुल्क लेने के प्रावधानों का पालन करना होगा। जिले के कुल 6184 विद्यालयों को फिटनेस सहित अन्य नियमों के संबंध में निर्धारित प्रारूप पर शपथ पत्र देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही, संबंधित पोर्टल पर विद्यालयों का पंजीकरण कराना भी अनिवार्य किया गया है। जिलाधिकारी ने जिला शुल्क समिति के गठन का भी निर्देश दिया। शासनादेश का उल्लंघन करने पर पहली बार में 1 लाख रुपये और दूसरी बार में 5 लाख रुपये का अर्थदंड लगेगा, जबकि तीसरी बार उल्लंघन करने पर विद्यालय की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। डॉ. चंद्र ने यह भी निर्देश दिए कि बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम जारी होने के बाद किसी भी बच्चे से अंक पत्र या टीसी के नाम पर पैसे न लिए जाएं। आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों का आरटीई एक्ट के तहत प्रवेश सुनिश्चित किया जाए और विद्यालयों में अन्य पब्लिकेशन की बजाय एनसीईआरटी की किताबें ही लागू की जाएं। उन्होंने वाहन चालकों का सत्यापन कराने और विद्यालय स्तर पर अनिवार्य रूप से विद्यालय सुरक्षा समिति का गठन करने पर भी जोर दिया। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह समिति उत्तर प्रदेश के दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए है और बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है।
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