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    IPS पर हमला मामले में 16 आरोपियों को उम्रकैद:मुरादाबाद में बवाल की सूचना पर शांत कराने पहुंचे थे, भीड़ ने पथराव किया

    3 hours ago

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    मुरादाबाद में 2011 में DIG/SSP रहे आईपीएस अशोक कुमार सिंह पर हमले के मामले में 15 साल बाद कोर्ट का फैसला आया है। कोर्ट ने डीआईजी पर हुए हमले में 16 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इससे पहले 24 मार्च को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराया था। अशोक कुमार सिंह वर्तमान में अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) हैं और लखनऊ में तैनात हैं। घटना 6 जुलाई 2011 की है। मुरादाबाद जिले के मैनाठेर इलाके में बवाल की सूचना पर मुरादाबाद के तत्कालीन पुलिस कप्तान अशोक कुमार सिंह तत्कालीन डीएम राजशेखर के साथ भारी फोर्स लेकर बवाल को शांत करने निकले थे। कप्तान अशोक कुमार सिंह डीएम की कार में सवार थे। डीआईजी अशोक कुमार सिंह लाउड हेलर से भीड़ को समझाने की कोशिश कर रहे थे, इतने में भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया था। भीड़ को उग्र होता देख डीएम राजशेखर मौके से अपनी कार में बैठकर निकल गए थे। एसएसपी के हमराही समझे कि डीआईजी भी डीएम की कार में सवार हैं और इसी गलतफहमी में SSP के हमराही भी डीएम की गाड़ी के पीछे ही अपनी गाड़ी दौड़ा दिए। जिसके बाद डीआईजी अशोक कुमार भीड़ में अकेला फंसे रह गए थे। अब विस्तार से पढ़िए पूरा मामला मैनाठेर थाने पर हुआ था पथराव और आगजनी 5 जुलाई 2011 को मैनाठेर थाने के एक गांव में छेड़छाड़ के आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस टीम ने दबिश दी थी। दबिश के दौरान पुलिस ने आरोपी को पकड़ भी लिया था। लेकिन आरोपियों और कुछ अराजक तत्वों ने यह कहकर शोर मचा दिया कि पुलिस टीम ने दबिश के दौरान धार्मिक पुस्तक का अपमान किया है। इसके बाद भीड़ मैनाठेर थाना क्षेत्र में सड़क पर उतर आई थी। अगले दिन 6 जुलाई 2011 को भीड़ ने मैनाठेर थाने पर हमला करके पहले थाने पर पथराव किया फिर आग लगा दी थी। इसी बवाल की सूचना पर डीआईजी अशोक कुमार सिंह भारी फोर्स लेकर मुख्यालय से निकले थे। उन दिनों संभल भी मुरादाबाद जिले का ही हिस्सा था। पीयूष श्रीवास्तव संभल के अपर पुलिस अधीक्षक थे। मौजूदा वक्त में बरेली रेंज के डीआईजी अजय कुमार साहनी उस वक्त मुरादाबाद में ASP अंडर ट्रेनिंग थे और कुंदरकी थाने के इंचार्ज थे। DIG जान बचाने को पेट्रोल पंप में छिपे तो हमलावरों ने दीवार तोड़ डाली दरअसल डीआईजी को सूचना मिली थी कि बवाल मुरादाबाद-संभल रोड पर मैनाठेर में हो रहा है। उन्हें उससे कई किमी पहले डींगरपुर में भीड़ जुटने की सूचना नहीं थी। डीआईजी और डीएम एसईजेड बाईपास से होते हुए जैसे ही डींगरपुर चौराहे पर पहुंचे वहां भीड़ चौराहे पर आगजनी और उपद्रव कर रही थी। डीआईजी ने भीड् को समझाने के लिए लाउडहेलर से बोलना शुरू किया। इतने में भीड़ और भी उग्र हो गई। भीड़ ने अधिकारियों पर ही पथराव शुरू कर दिया। यह देख तत्कालीन डीएम राजशेखर अपनी कार में बैठे और एसईजेड गेस्ट हाउस की तरफ चल दिए। चूंकि डीएम और डीआईजी एक ही गाड़ी में बैठकर घटनास्थल पर पहुंचे थे इसलिए डीएम की गाड़ी को दौड़ता देख डीआईजी के हमराही समझे कि डीएम और डीआईजी मौके से निकल गए हैं। ऐसे में डीआईजी के हमारी भी अपनी गाड़ी लेकर डीएम की कार के पीछे चल दिए। एसईजेड गेस्ट हाउस पहुंचने के बाद पता चला कि डीआईजी और उनका पीआरओ मौके पर ही छूट गए हैं। उधर, डीआईजी को अकेला पाकर भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। जान बचाने के लिए अशोक कुमार सिंह डींगरपुर चौराहे के पास में स्थित पेट्रोल पंप पर पहुंचे और खुद को कैश रूम में लॉक कर लिया था। भीड़ से बचने की कोशिश में उनकी सर्विस पिस्टल भी मौके पर ही गिर गई थी। भीड़ ने इसके बाद पेट्रोल पंप के कैशरूम की दीवार तोड़कर डीआईजी को मरणांसन्न् हालत में पहुंचा था। डींगरपुर पुलिस चौकी में भी आग लगा दी थी। 2 घंटे बाद पहुंची मदद, तब तक लहूलुहान हो चुके थे DIG हिंसक भीड़ में फंसने के करीब 2 घंटे बाद डीआईजी अशोक कुमार सिंह तक मदद पहुंच सकी थी। तत्कालीन आईजी रेंज एमके बशाल भारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे थे और अशोक कुमार सिंह को रेस्क्यू किया गया था। बलवाइयों ने उन्हें मौत के करीब पहुंचा दिया था। करीब एक महीने तक वो मुरादाबाद के साईं अस्पताल में एडमिट रहे। इसके बाद लंबे समय तक AIIMS में उनका इलाज चला। DIG की सुरक्षा में तैनात 7 पुलिस कर्मी बर्खास्त हुए थे, DM ट्रांसफर हुए इस घटना के बाद डीआईजी की सुरक्षा में तैनात 7 पुलिस कर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया था। मामले में डीआईजी के पीआरओ की ओर से मैनाठेर थाने में घटना की FIR दर्ज कराई गई थी। घटना के करीब 15 दिन बाद तक मुरादाबाद का माहौल संवेदनशील रहा था। तत्कालीन मायावती सरकार को मुरादाबाद में डैमेज कंट्रोल के लिए अफसरों की फौज भेजनी पड़ी थी। यूपी के तत्कालीन एडीजी लॉ एंड ऑर्डर ब्रजलाल ने कई दिनों तक मुरादाबाद में कैंप किया था। यूपी के अलग-अलग हिस्सों से कई तेज तर्रार पुलिस अधिकारी रातोंरात मुरादाबाद भेजे गए थे। मामले में आईपीएस एसोसिएशन के डीएम के एक्ट की शिकायत मुख्यमंत्री से की थी। घटना के 2 दिन बाद ही मुरादाबाद के डीएम राजशेखर को यहां से हटा दिया गया था। कोर्ट ने 24 मार्च को 16 आरोपियों को दोषी ठहराया था सोमवार को मुरादाबाद में रहने वाले अमरीश, डींगरपुर के रहने वाले मंजूर अहमद, मोहम्मद अली, मैनाठेर निवासी हाशिम, फिरोज, कमरूल, मोहम्मद नाजिम, मोहम्मद यूनुस, मोहम्मद रिजवान, परवेज आलम, मोहम्मद मुजीब, जाने आलम तहजीब आलम, असमोली के रहने वाले कासिम, अमरोहा के रहने वाले मोहम्मद मोबीन,तहजीब आलम को दोषी करार दिया था।
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