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    IIT कानपुर में मातृभाषा दिवस पर आयोजन:तकनीकी पढ़ाई के बीच गूंजीं कविताएं, विशेषज्ञों ने कहा- तरक्की के लिए अपनी भाषा जरूरी

    1 hour ago

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    भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर में बुधवार को भाषाई विविधता और साहित्य का अनूठा संगम देखने को मिला। संस्थान के आउटरीच ऑडिटोरियम में 'अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस' और 'वसंत काव्योत्सव' का आयोजन किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने साफ किया कि देश की तकनीकी और प्रशासनिक प्रगति के लिए मातृभाषा को बढ़ावा देना अब वक्त की जरूरत है। कार्यक्रम के पहले सत्र में 'राजभाषा कार्यान्वयन के अवसर और विषमताएं' विषय पर पैनल चर्चा हुई। इसमें विशेषज्ञों ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 मातृभाषा को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है, लेकिन इसे जमीन पर उतारने के लिए ठोस रणनीति चाहिए। वक्ताओं ने इस बात पर चिंता जताई कि आज भी प्रशासनिक कार्यों में अंग्रेजी का प्रभुत्व है, जिसे धीरे-धीरे कम करने की जरूरत है। चर्चा में यह बात निकलकर आई कि तकनीकी संसाधनों और शब्दावली को अपनी भाषा में ढालना होगा, तभी हम आम जनता तक सही ढंग से पहुँच पाएंगे। विदेशी छात्रों ने भी साझा किए विचार खास बात यह रही कि इस चर्चा में न केवल भारतीय विशेषज्ञों, बल्कि संस्थान के अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने भी हिस्सा लिया। पैनल में प्रो. अर्नब भट्टाचार्य, प्रो. अमर कुमार बेहरा और केंद्रीय विद्यालय के प्रधानाचार्य रवीश चंद्र पाण्डेय समेत अन्य विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। सभी का मानना था कि सर्वांगीण विकास के लिए मातृभाषा और अंग्रेजी के बीच एक संतुलन होना जरूरी है। इससे पहले श्रीमती मल्लिका द्विवेदी ने राजभाषा से जुड़े संवैधानिक अधिकारों की जानकारी दी। वसंत के रंगों में डूबी कविताओं की महफिल दूसरे सत्र में 'वसंत काव्योत्सव' ने समां बाँध दिया। यहाँ इंजीनियरिंग की जटिलताओं के बीच कविता और साहित्य की कोमल भावनाएं देखने को मिलीं। संस्थान के प्रोफेसरों से लेकर छात्रों और कर्मचारियों ने अपनी कविताओं के जरिए प्रेम, समाज, राष्ट्रभावना और समकालीन जीवन के विभिन्न पहलुओं को छुआ। काव्य पाठ करने वालों में प्रो. भारत लोहनी, प्रो. अंकुश शर्मा और छात्र कवि शामिल रहे।
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