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    हाथरस में न्यायिक अधिकारियों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जानकारी दी:जिला जज की अध्यक्षता में हुआ कार्यक्रम, अधिकारियों को प्रशिक्षित किया

    1 hour ago

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    हाथरस में जनपद न्यायाधीश विनय कुमार-III की अध्यक्षता में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान जनपद न्यायालय के समस्त न्यायिक अधिकारियों को सतत सीखने का वातावरण प्रदान करने के उद्देश्य से मेडिकल रिपोर्ट और पोस्टमार्टम आदि के संबंध में जानकारी दी गई। डॉ. मिथुन घोष ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष में यह प्रशिक्षण प्रदान किया। डॉ. घोष ने बताया कि पोस्टमॉर्टम में बाहरी जांच के तहत शरीर पर चोट, खरोंच, रंग में बदलाव और मौत के समय का आकलन किया जाता है। शरीर को खोलने के लिए मुख्य रूप से 'वाई' या 'आई' आकार का चीरा लगाया जाता है। आंतरिक जांच में दिल, फेफड़े, लिवर और दिमाग जैसे प्रमुख अंगों को निकालकर उनकी अंदरूनी चोट या बीमारी की जांच की जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि जहर का संदेह हो, तो अंगों के नमूने लेकर फॉरेंसिक लैब भेजे जाते हैं। इससे वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर मौत का सटीक कारण, जैसे दम घुटना, सदमा या चोट आदि, ज्ञात होता है। इसके अतिरिक्त, डॉ. घोष ने चोटों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चोट तब लगती है जब शरीर के किसी हिस्से को बाहरी बल, दुर्घटना, गिरने या किसी तेज वस्तु से नुकसान पहुंचता है। यह मामूली खरोंच से लेकर गंभीर फ्रैक्चर तक हो सकती है। चोटों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है: मामूली चोटें और खरोंच, जो त्वचा की ऊपरी परत के छिल जाने से संबंधित होती हैं। इस अवसर पर अपर जनपद न्यायाधीश महेंद्र श्रीवास्तव, हर्ष अग्रवाल, निर्भय नारायण राय, शैलेंद्र सिंह, महेंद्र कुमार रावत, प्रशांत कुमार, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जय हिन्द कुमार सिंह, सिविल जज (व.प्र.) आकांक्षा गर्ग, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दीपकनाथ सरस्वती, सिविल जज (क.प्र.) हर्षिका रस्तोगी और न्यायिक मजिस्ट्रेट खुशबू चंद्रा सहित कई न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।
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