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    हाथी पर बारात निकाली, लगाई 20 साल की कमाई:2 लाख 60 हजार में बुलाया शाही गजराज, दूल्हा बोला- गरीब-अमीर क्या, सपना तो सपना होता है

    1 hour ago

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    मेरठ के एक युवक ने अपने बचपन का सपना सच करने के लिए 20 साल की कमाई दांव पर लगा दी। वह अपनी बारात घोड़ी की बजाय हाथी पर लेकर गया। 5 साल की उम्र में उसने ये सपना संजोया था और अपने पिता और दादा को इसके बारे में बताया था। परिवार ने तब से ही बच्चे की इस जिद को दिल से लगा लिया था और तय कर लिया था कि अंकित को हाथी पर ही बैठाया जाएगा। 21 अप्रैल को अंकित की बारात जमालपुर से मंडौरा गांव तक हाथी पर निकली। दूल्हा अंकित पहले अपने गांव में हाथी पर सवार होकर घूमा। इसके बाद उसी शान के साथ दुल्हन के गांव पहुंचा। बारात में दूल्हे को हाथी पर देख गांववाले हैरान रह गए। इस नजारे को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। इंचौली थाना क्षेत्र के जमालपुर गांव की यह शादी वह क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है। दैनिक भास्कर से बातचीत में अंकित ने कहा, “सपना तो सपना होता है। गरीब हो या अमीर, हर किसी को उसे पूरा करने का हक है। मेरा भी सपना था कि मैं हाथी पर बैठकर दुल्हन लाने जाऊं, आज वो पूरा हो गया।” पहले ये तस्वीरें देखिए… अंकित और उनके पिता से पूरी बातचीत पढ़िए… झोपड़ीनुमा घर में गुजर-बसर करता परिवार अंकित के पिता का नाम कालू है। परिवार में कुल 6 बच्चे हैं, जिनमें 4 बेटियां और 2 बेटे हैं। अंकित अपने परिवार के साथ जमालपुर गांव में रहता है। उनका मकान कच्चा है। कई कमरों पर छत भी नहीं है। पूरा परिवार झोपड़ीनुमा घर में खुले में रहता है। अंकित के पिता मजदूरी करते हैं। अंकित भी खेतों में गन्ना काटने और मजदूरी का काम करता है। उसे रोज करीब 500 रुपए की दिहाड़ी मिलती है। इसी से परिवार का खर्च चलता है। उसने 12वीं के बाद आईटीआई किया है। हाल ही में रेलवे का एग्जाम दिया है। आगे भी कई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। पहले छोटे भाई-बहनों की शादी कराई अंकित ने बताया- मैंने अपने सपनों के लिए कभी भाई-बहनों का हक नहीं मारा। सबसे पहले छोटे भाई की शादी कराई। उसकी लव मैरिज हो चुकी है। उसके तीन बच्चे हैं और वह अलग रहता है। दो बड़ी बहनों की भी शादी हो चुकी है। अब मैं अपने दादाजी, पिताजी, माताजी और दो छोटी बहनों के साथ रहता हूं। दो बहनों और छोटे भाई की शादी के बाद ही मैंने अपनी शादी के बारे में सोचा, ताकि किसी पर कोई दबाव न पड़े। परिवार की रजामंदी से हुआ रिश्ता अंकित ने कहा कि मेरा सपना था कि मैं हाथी पर बैठकर बारात निकालूं। अपना यह शौक पूरा करने के लिए मैंने पूरी बचत लगा दी। मेरी शादी मुजफ्फरनगर के मंडौरा गांव की रहने वाली पूजा से हुई है। यह अरेंज मैरिज है। शादी के कार्ड पर भी हमने हाथी की तस्वीर छपवाई थी, जिसे देखकर लोग काफी उत्साहित थे। जब मैं हाथी पर बैठकर बारात लेकर लड़की के गांव पहुंचा, तो वहां के लोगों को भी मेरा ये अंदाज बहुत पसंद आया। ढाई लाख रुपए में राजस्थान से आया हाथी अंकित ने बताया कि हमें जैसा राजसी हाथी चाहिए था। वह मेरठ या आसपास नहीं मिल रहा था। लोगों से पूछने पर पता चला कि जयपुर, राजस्थान में अच्छे हाथी मिलते हैं। इसके बाद हमने गूगल पर सर्च किया। जयपुर के इमरान भाई का नंबर मिला, जो शादियों में हाथी उपलब्ध कराते हैं। हमने ऑनलाइन ही हाथी बुक किया और उसे मेरठ बुलाया। हाथी का किराया और आने-जाने का खर्च करीब 1 लाख 60 हजार रुपए रहा। राजस्थान से मेरठ तक हाथी लाने की परमिशन में करीब 1 लाख रुपए खर्च हुए। इस तरह कुल खर्च 2 लाख 60 हजार रुपए हो गया। हाथी के खाने का सामान कंपनी वाले खुद ही लेकर आए थे। उन्होंने हाथी के लिए कुछ चीजें बताईं थीं, जो हमने यहां उपलब्ध कराईं। अब मैं, मेरी पत्नी और पूरा परिवार बहुत खुश है। राजस्थान से ट्रक में लाया गया हाथी हाथी 21 अप्रैल को दोपहर करीब 2 बजे राजस्थान से अंकित के घर पहुंचा। उसे ट्रक में लाया गया था। घर पहुंचने के बाद गांव में रस्म हुई। अंकित दूल्हा बनकर सिर पर पगड़ी और हाथ में तलवार लेकर हाथी पर सवार हुआ। हाथी को पूरे गांव में घुमाया गया। इसके बाद हाथी को ट्रक से मुजफ्फरनगर के मंडौरा गांव ले जाया गया। गांव के बाहर अंकित दोबारा हाथी पर बैठा और बारात लेकर लड़की के घर पहुंचा। वहां भी लोग हाथी को देखकर काफी उत्साहित नजर आए। शादी की रस्मों के बाद रात करीब 2 बजे हाथी को ट्रक से ही मुजफ्फरनगर से वापस जयपुर भेज दिया गया। पिता बोले- बेटे की ख्वाहिश पूरी होने की खुशी अंकित के पिता कालू ने कहा- मेरे बेटे ने बचपन में ही तय कर लिया था कि वह दूल्हा बनकर हाथी पर बैठेगा। तभी हमने भी ठान लिया था कि इसकी बारात हाथी पर ही निकलेगी, चाहे इसके लिए कुछ भी करना पड़े।” अंकित और मैंने इसके लिए करीब 20 साल तक बचत की। मेहनत और मजदूरी करके यह रकम जुटाई। उसी पैसे से हाथी बुलाया और बेटे को हाथी पर बैठाकर बारात लेकर गए। आज खुशी है कि हम उसका सपना पूरा कर पाए। 75 साल बाद दिखा ऐसा नजारा पुराने समय में संभ्रांत लोगों के बीच हाथी पर बारात निकालने का चलन था। स्थानीय लोगों के अनुसार क्षेत्र में करीब 75 साल बाद ऐसा नजारा देखने को मिला। जब किसी दूल्हे ने हाथी पर सवार होकर बारात निकाली। बताया जाता है कि इससे पहले साल 1951 में दिल्ली निवासी निरंजन गुप्ता की बारात लावड़ आई थी। उस समय भी दूल्हा हाथी पर सवार होकर बारात लेकर पहुंचा था। ……………… ये खबर भी पढ़िए… जौनपुर में दूल्हे का हत्यारा दुल्हन का भाई निकला, बारात रोककर 3 गोलियां मारीं; बहन की लव-मैरिज से नाराज था जौनपुर में बारात लेकर जा रहे 22 साल के दूल्हे की हत्या दुल्हन के ममेरे भाई ने की थी। वह उसकी लव-मैरिज से नाराज था। परिवार वालों से रिश्ता तोड़ने के लिए कह रहा था। जब उन्होंने बात नहीं मानीं तो दूल्हे को ही मार डाला। इसकी पुष्टि एसपी कुंवर अनुपम सिंह ने की है। पढ़ें पूरी खबर…
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