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    गोरखपुर की ग्राउंड पर नेपाली खिलाड़ियों की ट्रेनिंग:हॉकी की बारीकियां सीख जापान में करेंगी प्रदर्शन, प्लेयर्स ने कहा- बहुत कुछ सीखा

    1 hour ago

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    गोरखपुर के बीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में इन दिनों नेपाल के हॉकी प्लेयर्स को निखारा जा रहा है। कोच शशि नवैत उन्हें हॉकी की बारीकियों को सिखा रहीं हैं। यह तैयारी जापान में होने वाले अंडर- 18 एशिया कप के लिए की जा रही है। ट्रेनिंग लेने के लिए कुल 25 महिला सब जूनियर खिलाड़ी आई हुई हैं। कोच शशि ने बताया कि नेपाल की ये टीम इंडोनेशिया में आयोजित होने वाले क़्वालिफाइंग टूर्नामेंट में पार्टिसिपेट करेगी। वहां बेहतर प्रदर्शन करने पर जापान में हो रहे एशिया कप में प्रतिभाग करने का मौका मिलेगा। वहीं ट्रेनिंग लेने आई खिलाड़ियों का कहना है यहां आकर बहुत कुछ सीखने को मिला है। मैम के बताए गए हर टेक्टिक्स हमेशा याद रहेंगे। हॉकी की ग्राउंड से लेकर खेल की हर छोटी- बड़ी चीजों की जानकारी मिली है। फिटनेस से लेकर गेम की टैटिक्स पर दिया जा रहा ध्यान कोच शशि नवैत ने बताया कि सभी प्लेयर इस फिल्ड में अभी बहुत ही नए हैं। उन्हें हॉकी के विषय में भी कुछ नहीं पता है। मुश्किल से एक-दो बच्चे ही जानते हैं। नेपाल में हॉकी गेम की शुरुआत हाल ही में हुई है। उनके फिटनेस, स्किल, हॉकी की बारीकियां, फिजिकल एक्टिविटी, बॉडी मूवमेंट और पोस्चर से लेकर रनिंग और अन्य एक्सरसाइज के साथ डाइट हर चीज पर बहुत ज्यादा ध्यान देना पड़ रहा। इनको तैयार करना बहुत टफ है। हालांकि वे बहुत जल्दी सीख रहें हैं लेकिन उनके ऊपर और मेहनत करने की जरूरत है। उनके प्रयासों की सराहना की जा सकती है। सभी बहुत ही मेहनत और लगन से सीखते हैं। नेपाल में हॉकी के मुताबिक ग्राउंड न होने की वजह से टर्स की जानकारी भी नहीं है। इससे पहले फुटबाल ग्राउंड पर वे ट्रेनिंग लेती थी। तो हॉकी के ग्राउंड को भी समझाने के लिए मेहनत की जाती है। रोज 6 घंटे की होती है ट्रेनिंग कोच ने बताया- मॉर्निंग सेशन में 5:30 से 7:30 तक फिजिकल की ट्रेनिंग दी जाती है। जिसमें अलग- अलग दिन इंडोरेंस, स्पीड, स्ट्रेंथ और अन्य एक्टिविटी शामिल हैं। उसके बाद आधे घंटे का रेस्ट दिया जाता है। फिर 8: 30 से एक घंटे का स्किल बेस्ड ट्रेनिंग होता है। फिर इवनिंग सेशन 4 बजे से शाम 7:30 तक होता है। इस दौरान उन्हें हॉकी की हर बारीकियों को समझाया जाता है। जिसमें गेम खेलने का तरीका, बॉडी मूवमेंट और पॉस्चर से लेकर गोल करने के तरीके डिफेंस के तरीके हर चीज की ट्रेनिंग दी जाती है। डिनर में रोज खाते नॉनवेज सभी प्लेयर्स के डाइट का विशेष ध्यान रखा जाता है। जिसमें अलग- अलग दिन सुबह से शाम तक का मेन्यू फिक्स है। नास्ते में दलिया, दूध, ड्राई फ्रूट, अंडा फल और अन्य चीजें शामिल हैं। दोपहर में नार्मल दाल, चावल रोटी और सब्जी। फिर डिनर में हर रोज नॉनवेज दिया जाता है। सिर्फ मंलवार को नॉनवेज की जगह पनीर या कोई अन्य सब्जी होती है। 12 दिन में आया बहुत बदलाव कोच शशि का कहना है कि 10 दिन की ट्रेनिंग कैंप को बढ़ा कर 15 दिन के लिए कर दिया गया है। जिससे खिलाड़ी हर तरीके से ट्रेंड हो जाए। पिछले 12 दिनों ने वे लगातार मेहनत और लगन से ट्रेनिंग ले रहे हैं। जिससे उनमें बहुत ज्यादा बदलाव देखा जा रहा है। उम्मीद है आगे अच्छा प्रदर्शन करेंगे। अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा मिला नेपाल के जूनियर महिला हॉकी टीम के हेड कोच अश्विनी अधिकारी ने कहा कि यह कैंप नेपाल हॉकी के भविष्य के लिए अहम है। जल्द नेपाल में भी एस्ट्रोटर्फ बनेगा। फिलहाल भारत की सुविधाओं का सहारा लेना जरूरी है। गोरखपुर का यह योगदान नेपाल की जूनियर महिला हॉकी को नई ऊंचाई देने में मदद कर रहा है। स्थानीय प्रशासन और हॉकी संघ भी इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दे रहे हैं। कैसा रहा खिलाड़ियों का एक्सपीरिएंस नेपाल से गोरखपुर में आई हॉकी खिलाड़ी नमिता ने बताया कि यहां का माहौल बहुत मोटिवेटिंग है। इंटरनेशनल लेवल की सुविधाएं मिल रही हैं, जिससे हम अपने लक्ष्य के करीब महसूस कर रहे हैं। वहीं पूर्णिमा नेगी का कहना है कि पहले घास पर खेलते थे तो स्पीड बहुत ही स्लो था। यहां सब कुछ फास्ट है। इससे हमारी टेक्निक और डिसिप्लिन दोनों सुधर रहे हैं। हॉकी प्लेयर करुणा ने बताया कि हम शूटिंग पर खास ध्यान दे रहे हैं। टर्फ पर बॉल सही टाइमिंग से मारना जरूरी है। यहां रोज प्रैक्टिस से फिनिशिंग बेहतर हो रही है। मेरे अंदर कॉन्फिडेंस आ रहा है। मुस्कान बताया-एस्ट्रोटर्फ पर बॉल की स्पीड अलग ही होती है। शुरुआत में टाइमिंग मिस हो रही थी, लेकिन अब रिफ्लेक्स बेहतर हो रहे हैं। कोच के साथ खास गोलकीपिंग सेशन से बहुत फायदा मिला है। गीता का कहना है कि टर्फ पर डिफेंस करना चुनौतीपूर्ण है क्योंकि बॉल तेज चलती है, लेकिन इससे हमारी रिएक्शन स्पीड बढ़ रही है और हम ज्यादा कॉन्फिडेंट हो रहे हैं।
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