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    हाईकोर्ट ने कहा-एसिड हमले अलग श्रेणी के अपराध:FIR रद्द करने की मांग खारिज, पुलिस को लगाई फटकार

    22 hours ago

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    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एसिड हमले के मामलों को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि जिन अपराधों में एसिड को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, वे अलग श्रेणी के होते हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में गहन जांच जरूरी है। इसी आधार पर कोर्ट ने संपत्ति विवाद में हुए कथित सुनियोजित एसिड हमले से जुड़ी एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की बेंच ने कहा-एफआईआर में लगाए गए आरोप गंभीर हैं और इसमें घिनौनी साजिश की बात सामने आ रही है। शिकायतकर्ता पर तेजाबी एसिड से हमला करने की योजना बनाई गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार यह हमला संपत्ति विवाद को लेकर सुनियोजित तरीके से किया गया था। एफआईआर के मुताबिक रोहित शर्मा ने इस साजिश में मुख्य भूमिका निभाई, जबकि याचिकाकर्ता अरुण शुक्ला और एक अन्य आरोपी को पीछे से साजिश रचने वाला बताया गया है। यूपी पुलिस पर जताई गहरी नाराजगी मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि सुनवाई शुरू होने से पहले चोट की रिपोर्ट समय पर पेश नहीं की गईं। इस पर कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि वह केवल चोट की रिपोर्ट समय पर पाने के लिए अलग-अलग जिलों के इंस्पेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को बार-बार समन नहीं भेज सकता। सुधार नहीं हुआ तो अफसरों को समन बेंच ने साफ कहा कि अगर तुरंत सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो कोर्ट को उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक या अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को समन भेजना पड़ेगा। कोर्ट अरुण शुक्ला की आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें प्रयागराज के करछना थाने में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई थी। इस मामले में बीएनएस की धारा 352, 351(3) और 124(1) लगाई गई हैं। कोर्ट ने कहा कि एसिड जैसे खतरनाक हथियार के इस्तेमाल को देखते हुए मामले की गहन जांच जरूरी है। इसलिए याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए इसे खारिज कर दिया गया।
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