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    ​गाजियाबाद फैमिली कोर्ट का बड़ा फैसला:पहली शादी छिपाकर पति को रेप केस में फंसाने वाली पत्नी से मिला तलाक

    1 hour ago

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    ​गाजियाबाद फैमिली कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। पहली शादी छिपाकर पति को रेप केस में फंसाने वाली पत्नी से आखिर पति को तलाक मिल गया। गाजियाबाद के प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय ने एक पीड़ित पति को उस कानूनी जाल से आज़ाद कर दिया है। वरिष्ठ अधिवक्ता उमेश भारद्वाज ने बताया कि क्लाइंट को एक सोची-समझी साजिश के तहत फंसाया गया था। न्यायालय ने माना कि पहली शादी को छिपाकर दूसरी शादी करना और पति व उसके परिवार को फर्जी मुकदमों में जेल भिजवाना मानसिक और शारीरिक क्रूरता की पराकाष्ठा है। मुंबई की महिला से हुई थी शादी ​केस में वादी युवक की शादी 29 अक्टूबर 2018 को मुम्बई निवासी महिला से हुई थी। लेकिन कुछ समय बाद ही विवाद शुरू हो गए। पत्नी ने दबाव बनाने के लिए मुम्बई में पति और उसके परिवार वालों के खिलाफ धारा 376 (बलात्कार), 498A (दहेज) और 328 जैसे संगीन मामलों में FIR दर्ज करा दी, जिसके चलते पति व परिजनों को जेल तक जाना पड़ा। वादी के ​अधिवक्ता उमेश भारद्वाज की जिरह से पीड़ित पति को इंसाफ मिला। अधिवक्ता ने कहा कि हमें कोर्ट में सिर्फ कागजी दावों पर नहीं, बल्कि पुख्ता सबूतों के साथ साबित किया कि यह पूरा विवाह ही एक छल था। पत्नी पहले से ही एक अन्य व्यक्ति से शादीशुदा थी और उसने कोई कानूनी तलाक नहीं लिया था। उसने सिर्फ 100 रुपये के गुजराती स्टाम्प पेपर पर एक अविधिक 'विवाह विच्छेदनामा तैयार करवा रखा था। पैसों के लिए की गई शादी ​कोर्ट में सवालों से घिरने के बाद पत्नी को खुद अदालत में स्वीकार करना पड़ा कि उसने यह सब पैसे के लिए किया था, क्योंकि वह पेइंग गेस्ट का व्यापार करती है। ​न्यायालय ने सबूतों और दलीलों को देखने के बाद स्पष्ट किया कि पत्नी का कृत्य क्रूरता की श्रेणी में आता है। अदालत ने वादी यानी के हक में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत तलाक की डिक्री को मंजूरी दे दी।
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