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    एक ही विभाग के दो जांच की अलग-अलग रिपोर्ट:करंट से मौत पर रिपोर्टों में टकराव, दो ने कहा- अचानक टूटकर तार गिरने से हुई मौत

    2 hours ago

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    गोंडा में 35 वर्षीय रंजीत तिवारी की करंट लगने से हुई मौत अब सवालों के घेरे में है। वजह—बिजली विभाग की दो अलग-अलग जांच रिपोर्ट, जिनमें घटना का कारण अलग-अलग बताया गया है। एक ही विभाग की रिपोर्टों में विरोधाभास ने न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे इलाके को उलझन में डाल दिया है कि आखिर सच क्या है। मुख्य अभियंता की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के समय रंजीत तिवारी अपने घर के सामने बिजली लाइन में हो रही स्पार्किंग का वीडियो बना रहे थे। इसी दौरान अचानक तार टूटकर उनके ऊपर गिर गया और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं दूसरी ओर तीन अधिकारियों की संयुक्त रिपोर्ट में पूरी कहानी अलग है। इस रिपोर्ट के अनुसार, रंजीत अपने घर से काम पर जा रहे थे, तभी तेज हवा के कारण बिजली का तार टूटकर उन पर गिरा और करंट लगने से उनकी जान चली गई। यानी एक रिपोर्ट उन्हें मौके पर खड़ा बताती है, तो दूसरी उन्हें रास्ते में चलते हुए। मुख्य अभियंता की रिपोर्ट में घटना की तकनीकी वजह भी विस्तार से बताई गई है। बताया गया कि रंजीत के घर के सामने से करीब 30 साल पुरानी 11 केवी हाईटेंशन लाइन गुजरती है। घर के पास एक ‘जंगल जलेबी’ का पेड़ है, जिसकी दूरी तार से बेहद कम थी। तेज हवा के कारण तार पेड़ के तने से टकराया और स्पार्किंग होने लगी। इसी दौरान तार टूटकर नीचे गिरा और रंजीत इसकी चपेट में आ गए। हालांकि विभाग ने यह भी दावा किया कि लाइन की ऊंचाई और सिस्टम मानकों के अनुसार सही था और हाल ही में पेड़ों की छंटाई भी कराई गई थी। जिम्मेदारी से बचने की कोशिश? पड़ोसी पर डाला गया ठीकरा दोनों जांच रिपोर्टों में एक बात समान है—किसी भी बिजली अधिकारी या कर्मचारी को दोषी नहीं ठहराया गया। इसके उलट, रिपोर्ट में रंजीत के पड़ोसी को जिम्मेदार बताया गया है। कहा गया कि जिस ‘जंगल जलेबी’ के पेड़ से तार टकराया, वह पड़ोसी की जमीन पर था और उसने पेड़ कटवाने का विरोध किया था। विभाग का दावा है कि कई बार कोशिश के बावजूद पेड़ की कटाई नहीं हो सकी, जबकि वही पेड़ हादसे की मुख्य वजह बना। अब सवाल उठ रहा है कि अगर खतरा इतना बड़ा था, तो विभाग ने वैकल्पिक उपाय क्यों नहीं किए? परिवार को मुआवजे की सिफारिश, लेकिन सवाल बरकरार तीन अधिकारियों की संयुक्त रिपोर्ट में मृतक की पत्नी पूजा तिवारी को विभागीय नियमों के तहत मुआवजा देने की सिफारिश की गई है। लेकिन इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है—क्या यह सिर्फ हादसा था या लापरवाही? दो अलग-अलग जांच रिपोर्टों ने घटना को और उलझा दिया है। एक ही विभाग के भीतर सच्चाई के दो संस्करण सामने आने से लोगों का भरोसा भी डगमगाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते पेड़ या लाइन को लेकर ठोस कदम उठाए जाते, तो शायद एक जान बचाई जा सकती थी। अब सबकी नजर इस पर है कि प्रशासन इस विरोधाभास को सुलझाकर असली जिम्मेदार तय करता है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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