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    CSJMU में गूंजा नवकार महामंत्र:108 देशों के साथ कानपुर ने भी मांगी विश्व शांति की दुआ

    5 hours ago

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    शहर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) में गुरुवार को एक अलग ही आध्यात्मिक ऊर्जा देखने को मिली। मौका था 'विश्व नवकार महामंत्र दिवस' का, जहां तात्या टोपे सीनेट हॉल में सैकड़ों कंठों से निकले महामंत्र के स्वर गूंज उठे। खास बात यह रही कि कानपुर के साथ-साथ दुनिया के 108 देशों में एक साथ यह सामूहिक आराधना की गई, जिसका मकसद पूरी मानवता के लिए शांति और सद्भाव की कामना करना था। संगीत की लहरों पर तैरा महामंत्र का जाप कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण और आचार्य राहुल जैन व आर्जव जैन के जयघोष से हुई। संगीत विभाग के डॉ. आर.के. त्रिपाठी और उनकी टीम ने जब वाद्य यंत्रों की धुन पर मंत्रों का जाप शुरू किया, तो पूरा हॉल भक्तिमय हो गया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने महसूस किया कि मंत्रों की ध्वनि तरंगें कैसे मन को एकाग्र और शांत करती हैं। भीतर के शत्रुओं को जीतना ही सच्ची विजय विश्वविद्यालय के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने इस अवसर पर महामंत्र की गहराई को साझा किया। कार्यक्रम में चर्चा हुई कि: अरिहंत का अर्थ: यह मंत्र हमें सिखाता है कि असली दुश्मन बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर (लोभ, मोह, क्रोध) हैं। जो इन पर विजय पा ले, वही अरिहंत है। प्राचीन इतिहास: यह मंत्र कितना पुराना है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दूसरी शताब्दी में राजा खारवेल ने इसे शिलालेखों पर टंकवाया था। आत्म-शुद्धि: यह आयोजन महज एक रस्म नहीं, बल्कि खुद को पहचानने और आंतरिक शुद्धि का जरिया बना। जैन आहार पद्धति और आयुर्वेद का गहरा रिश्ता आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक ने स्वास्थ्य के नजरिए से जैन जीवनशैली पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया खान-पान की बीमारियों से जूझ रही है, तब जैन ग्रंथों में वर्णित 'सात्विक आहार' पद्धति सबसे कारगर है। भारतीय समाज को शाकाहार की ओर मोड़ने में ऋषि-मुनियों का बड़ा योगदान रहा है। यह आहार न केवल शरीर को ऊर्जा देता है, बल्कि मानसिक शांति भी बनाए रखता है। छात्रों और शहर के गणमान्य लोगों की रही मौजूदगी इस विशेष अनुष्ठान में विश्वविद्यालय के शिक्षक, भारी संख्या में छात्र-छात्राएं और शहर के कई प्रमुख लोग शामिल हुए। बालिका छात्रावास की छात्राओं से लेकर योग विभाग के विद्यार्थियों तक ने इस सकारात्मक ऊर्जा को महसूस किया। कार्यक्रम का प्रबंधन आचार्य विद्यासागर सुधासागर जैन शोध पीठ द्वारा किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई।
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