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    बाराबंकी DIOS को हटाने का आदेश:हाईकोर्ट बोला- यह लापरवाही नहीं, गंभीर अपराध, STF को दी जांच

    3 hours ago

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    इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बाराबंकी के DIOS ओ.पी. त्रिपाठी को तत्काल पद से हटाने के आदेश दिए हैं। साथ ही पूरे मामले की जांच STF को सौंपी गई है। यह आदेश प्रबंधक सरदार आलोक सिंह की याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने दिया। मामला सिटी इंटरमीडिएट कॉलेज, बाराबंकी का है। यहां के सहायक अध्यापक (संस्कृत) अभय कुमार पर आरोप है कि उन्होंने प्रबंध समिति को बिना सूचना दिए छत्तीसगढ़ के बीजापुर स्थित एकलव्य विद्यालय में प्रवक्ता पद जॉइन कर लिया। आरोप है कि वहां से विधिवत कार्यमुक्त हुए बिना ही वे बाराबंकी लौट आए और DIOS व प्रधानाचार्य की मिलीभगत से दोबारा ज्वाइनिंग भी कर ली। एक ही समय में दो जगह नौकरी, वेतन भी जारी याचिकाकर्ता के अधिवक्ता आकाश दीक्षित ने कोर्ट में बताया कि शिक्षक छत्तीसगढ़ में तैनात रहते हुए भी बाराबंकी से वेतन ले रहे थे। DIOS कार्यालय ने अक्टूबर 2025 का वेतन भी जारी कर दिया, जबकि शिक्षक 14 नवंबर 2025 को वहां से कार्यमुक्त हुए थे। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आने पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने इसे केवल लापरवाही नहीं, बल्कि रिकॉर्ड में हेरफेर और जालसाजी का गंभीर मामला माना। कोर्ट ने टिप्पणी की— प्रशासनिक पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। अधिकारियों का यह रवैया शिक्षा व्यवस्था को खोखला कर रहा है। कोर्ट के बड़े आदेश • DIOS का तबादला: माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को निर्देश दिया गया है कि ओ.पी. त्रिपाठी को तुरंत बाराबंकी से हटाया जाए। • STF जांच के आदेश: मामले की जांच STF करेगी। जांच अधिकारी DSP रैंक से कम का नहीं होगा, जो DIOS, प्रधानाचार्य डॉ. शिव चरण गौतम और शिक्षक अभय कुमार की भूमिका की जांच करेगा। • वेतन की वसूली: अभय कुमार की पुनर्नियुक्ति को अवैध घोषित करते हुए कोर्ट ने दिए गए वेतन की वसूली संबंधित अधिकारियों से करने के निर्देश दिए हैं। • विभागीय कार्रवाई: संयुक्त शिक्षा निदेशक, अयोध्या मंडल के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। FIR दर्ज करने के भी संकेत कोर्ट ने साफ किया है कि यदि STF जांच में जालसाजी या भ्रष्टाचार के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज कर आपराधिक कार्रवाई की जाए। साथ ही झूठा हलफनामा देने के मामले में भी DIOS की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। फैसले के बाद मचा हलचल हाईकोर्ट के इस सख्त फैसले के बाद बाराबंकी से लेकर लखनऊ तक शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। अदालत ने यह भी कहा कि अब आदेशों की तामील डिजिटल माध्यमों जैसे व्हाट्सएप और ईमेल से सुनिश्चित की जाए, ताकि फाइल दबाने की प्रवृत्ति पर रोक लगे।
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