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    'बनारसी-साड़ी जैसा खूबसूरत है...कई जतन के बाद बनारस आ पाई':‘सुर गंगा महोत्सव’ में बोली थीं आशा भोसले, गिरिजादेवी संग आखिरी प्रस्तुति

    4 hours ago

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    ‘वाराणसी उतना ही खूबसूरत है, जितनी यहां की रेशमी साड़ियां। मैं शिव भक्त हूं और मेरी लंबे समय से इच्छा थी कि काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करूं, जो ज्योतिर्लिंगों में से एक है। 84 साल की उम्र में अब मुझे लगता है कि मुझे वाराणसी पहले ही आ जाना चाहिए था। यहां के घाट बेहद आकर्षक और मनमोहक हैं।’ ये बातें मशहूर गायिका आशा भोसले ने कही थीं। साल 2017 में यूनेस्को के क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क के तहत भैसासुर घाट पर आयोजित ‘सुर गंगा महोत्सव’ में पहुंची थीं। इस संगीत महोत्सव में प्रस्तुति देते हुए उन्होंने बनारस के माहौल की जमकर सराहना की। यह उनका पहला काशी दौरा था और वह काफी उत्साहित नजर आईं। गंगा आरती में हुई भावुक उन्होंने कहा कि इस शहर को देखकर एहसास होता है कि हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं कितनी गहरी हैं। गंगा आरती के दौरान जब वह अपने बेटे आनंद के साथ नाव पर बैठी थीं, तब दोनों इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि हमारा धर्म समय की हर कसौटी पर खरा उतरा है। उन्होंने बताया कि 84 साल की उम्र में यह उनका पहला वाराणसी दौरा था और यहां आकर वह बेहद खुश थीं। उन्होंने कहा, “पहली बार काशी आई हूं, लेकिन माहौल देखकर लगता है कि मुझे यहां बरसों पहले आ जाना चाहिए था। अब देर से आने का थोड़ा अफसोस है। ज्योतिर्लिंग यात्रा पूरी करने की इच्छा उन्होंने कहा कि वह अब तक 10 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर चुकी हैं। आगे बद्रीनाथ मंदिर और अमरनाथ गुफा के दर्शन कर द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा पूरी करना चाहती हैं। मंच से उन्होंने “हर-हर महादेव” और “भोलेनाथ की जय” का उद्घोष कर लोगों का दिल जीत लिया। मंच पर आते ही गूंज उठीं तालियां कार्यक्रम में अपने बेटे आनंद भोसले का हाथ पकड़कर आशा ताई मंच पर पहुंचीं तो दर्शक खड़े होकर उनका स्वागत करने लगे। इस प्यार से भावुक होकर उन्होंने कहा- आपके अथाह प्यार पर मैं नि:शब्द हूं, क्या बोलूं। शिवनगरी पहुंचकर उन्होंने खुद को भगवान शिव की भक्त बताया और प्रशंसकों की मांग पर चार चुनिंदा गीत गाए। गिरिजादेवी संग दी प्रस्तुति इस आयोजन में उन्होंने पद्म विभूषण से सम्मानित शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी के साथ भी प्रस्तुति दी। उन्होंने नगर निगम और ‘पहल’ संस्था द्वारा आयोजित इस संगीत महोत्सव में अपनी सुरीली आवाज का जादू बिखेरा। अपनी परफॉर्मेंस के दौरान उन्होंने ‘पिया तू अब तो आजा’ जैसे सदाबहार गीत गाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। काशी आने में देर कर दी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने काशी की खूब तारीफ की और कहा कि गंगा आरती और मंदिर दर्शन के बाद उन्हें यहां का माहौल बेहद दिव्य लगा। उन्होंने बताया- मैंने बनारसी थाली चखी, वह बहुत स्वादिष्ट थी। पूरा शाकाहारी खाना था। भरवां करेला और परवल खास पसंद आए। अगर ऐसा खाना रोज मिले तो मैं शाकाहारी हो जाऊंगी। काशी की सफाई, घाटों की सुंदरता और शहर में हुए बदलाव को उन्होंने अद्वितीय बताया और कहा कि यहां की आध्यात्मिकता दिल को छू लेने वाली है।
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