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    बिना ट्यूशन के गोरखपुर की दिव्या ने की पढ़ाई:95. 67% के साथ जिला टॉप किया, बनेंगी इंजीनियर, बाबा के छलके आंसू

    3 hours ago

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    यूपी बोर्ड की ओर से जारी हाईस्कूल के रिजल्ट में गोरखपुर के संस्कार एकेडमी की दिव्या यादव ने 95. 67% के साथ जिला टॉप किया है। रिजल्ट आने के बाद परिवार और टीचर्स में खुशी का माहौल है। स्कूल के टीचर्स ने उनके घर पहुंच का माला पहना कर सम्मानित किया। साथ ही मिठाई खिलाकर बधाई दी। पोती को सम्मान पाता देख बाबा के आंखों से आंसू छलक गए। दैनिक भास्कर से बातचीत में दिव्या ने बताया कि पहले ही उन्होंने जिला टॉप करने का सपना देखा था। जो आज सच हो गया है। दिव्या रात के 2 बजे तक पढाई करती थी। बिना किसी ट्यूशन के उन्होंने टीचर्स के गाइडेंस और सेल्फ स्टडीज के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। उन्होंने अपने सफलता का श्रेय अपने स्कूल के टीचर्स के साथ बड़े भाई और बहनों को दिया है। दिव्या आगे चलकर IIT की तैयारी कर एक अच्छा इंजीनियर बनाना चाहती है। उनके पिता नोएडा में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं। मां हाऊस वाइफ हैं। जानिए सफलता की पूरी कहानी… सहजनवां क्षेत्र के टड़वा कला गांव की रहने वाली 16 साल की दिव्या यादव बचपन से ही पढ़ाई में तेज थीं। दिव्या का कहना है कि जब उन्होंने क्लास 9th में एडमिशन लिया था। तभी से 10th में टॉपर बनने का सपना था। यहीं उद्द्देश्य लेकर वह ज्यादा से ज्यादा से समय पढाई में बिताती थी। उन्होंने बताया कि पढ़ाई करने के लिए परिवार का पूरा सपोर्ट मिला। घर का कोई काम नहीं करता पड़ता था। मम्मी और दीदी मिलकर करती थी। मेरा पूरा शेड्यूल पढ़ाई करने का ही था। साईकिल से जाती थी स्कूल सुबह 5 बजे उठने के बाद फ्रेस होकर सबसे पहले 1 घंटे पढ़ती थी। उसके बाद स्कूल के रेडी हो जाती थी। मेरा स्कूल घर से 3 किलोमीटर दूर है। रोज साईकिल से मैं क्लास करने जाती थी। वहां हर टीचर के पढ़ाएं गए बातों को ध्यान से सुनती थी। एक भी क्लास मिस नहीं किया। उसके बाद घर आकर दिन में थोड़ी देर सोकर अपनी नींद पूरी करती थी। उसके बाद शाम से फिर पढ़ाई शुरू कर देती थी। शाम 5 बजे से रात 2 बजे तक करती थी पढ़ाई दिव्या ने बताया कि घर आने के बाद भी मैंने अपना पूरा शेड्यूल बना रखा था। शाम पांच बजे से फिर पढ़ने बैठ जाती थी। 12 बजे तक पढ़ाई करती थी। फिर खाना खा के थोड़ी देर रेस्ट करती और आधे घंटे बाद फिर पढ़ाई शुरू कर देती थी। फिर रात के 2 बजे तक पढ़ती थी। सोशल मीडिया से दूर रही दिव्या का कहना है कि मेरे पास कोई मोबाइल नहीं है। मैं कभी सोशल मीडिया के माध्यम से पढ़ाई के लिए निर्भर नहीं रही। अपना खुद का नोट्स बनाया। टीचर्स की गाइडेंस को फॉलो किया और सेल्फ स्टडी पर फोकस किया। बिना किसी ट्यूशन के की तैयारी दिव्या ने बताया कि उनके दो बड़े-भाई बहन हैं। बहन का BSC कंप्लीट हो चुका है और भाई B. COM कर रहा है। पिता नॉएडा में इलेक्ट्रिशियन का काम करते हैं। घर में तीन- तीन लोगों के पढ़ाई का खर्चा उठाना आसान नहीं है। इसलिए पिता पर ट्यूशन करवाने का बोझ नहीं डालना चाहती थी। इसलिए खुद पर विश्वास किया। और जितना साधन था उसी में तैयारी की। उनका कहना है कि मेनहत से बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है। आगे चल कर IIT की तैयारी करेंगी दिव्या का कहना है कि मुझे आगे चलकर एक बढ़िया इंजिनियर बनाकर देश का नाम रोशन करना है। इसलिए मैं IIT की तैयारी करुंगी। उन्होंने बताया कि मैथ्स मेरा फेवरेट सब्जेक्ट है। इसलिए 12th में PCM सब्जेक्ट से पढ़ाई करेंगी। कॉन्सेप्ट को समझ कर करें पढ़ाई दिव्या ने अपने से छोटे छात्रों को यह सुझाव दिया है कि कॉन्सेप्ट बेस्ड पढ़ाई करें। सिर्फ घंटों किताब लेकर बैठने से नहीं होता है। जो कुछ भी पढ़ रहे उसे समझ कर पढ़ें। उनका कहना है कि सेल्फ स्टडी सबसे बड़ा हथियार है। बेहद ही साधारण है परिवार दिव्या के परिवार में उनके पिता अखिलेश यादव एक प्राइवेट जॉब करते हैं। माता रीता देवी हाऊस वाइफ हैं। एक भाई बीकॉम की पढ़ाई करता है और बहन का बीएससी कंप्लीट हो चुका है। दादा जी घर पर ही रहते हैं।
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