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    बलिया में 2295 गोवंश का संरक्षण:गौसेवा आयोग उपाध्यक्ष बोले- 30 आश्रय स्थल संचालित

    5 hours ago

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    उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश कुमार शुक्ला ने सोमवार को बलिया में बताया कि जनपद में 30 गौ-आश्रय स्थल क्रियाशील हैं, जहाँ 2295 गौवंश का संरक्षण और पालन-पोषण किया जा रहा है। उन्होंने पीडब्लूडी गेस्ट हाउस में मीडिया से बात करते हुए कहा कि राज्य सरकार गौ सेवा को केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि मानवीय, सामाजिक और आध्यात्मिक उत्तरदायित्व मानकर कार्य कर रही है। शुक्ला ने बताया कि राज्य सरकार निराश्रित एवं असहाय गौवंश के संरक्षण, संवर्धन और देखभाल के लिए व्यापक योजनाएं चला रही है, जिनके सकारात्मक परिणाम पूरे प्रदेश में दिख रहे हैं। उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है, जहाँ निराश्रित गोवंश के भरण-पोषण के लिए सरकार द्वारा प्रतिदिन 50 रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश सरकार की गौ संरक्षण नीति के तहत वर्तमान में राज्य के विभिन्न जनपदों में 7700 से अधिक गौ आश्रय स्थल सक्रिय रूप से संचालित हो रहे हैं। इन आश्रय स्थलों में 16 लाख से अधिक निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आवास, नियमित आहार, स्वच्छ पेयजल और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। यह व्यवस्था गोवंश के संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक संतुलन को भी मजबूत कर रही है। गौशालाओं के प्रभावी संचालन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने 5446 गौशालाओं में 7592 सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए हैं। यह अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली 24 घंटे कार्यरत रहकर गोवंश की सुरक्षा, देखभाल की गुणवत्ता और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित कर रही है। मुख्यमंत्री 'निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना' के माध्यम से सरकार ने गौ-संरक्षण को जन आंदोलन का रूप दिया है। इस योजना के अंतर्गत अब तक 1,67,065 गोवंश इच्छुक एवं जिम्मेदार गौपालकों को सुपुर्द किए गए हैं। सरकार द्वारा प्रत्येक गोवंश के लिए 50 रुपये प्रतिदिन की दर से पोषण भत्ता सीधे गौपालकों के खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजा जा रहा है, जिससे गौपालकों की आय में भी वृद्धि हो रही है। बलिया में जिला प्रशासन द्वारा गौ संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। जनपद में 30 गौ-आश्रय स्थलों में 2295 गौवंश का संरक्षण हो रहा है। इसके अतिरिक्त, 407 गौपालकों ने सहभागिता योजना के तहत 1130 गोवंश को अपनाकर सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस अवसर पर दीपक गोयल भी उपस्थित थे।
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