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    बलरामपुर में महिला वोटर्स की संख्या घटी:विधानसभा चुनाव से पहले बदले सियासी समीकरण

    1 hour ago

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    बलरामपुर में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, बड़ी संख्या में महिला मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जिससे पुरुष और महिला वोटरों के बीच लगभग 23 प्रतिशत का बड़ा अंतर आ गया है। इस बदलाव से जिले का चुनावी गणित प्रभावित होने की आशंका है। जिले की चारों विधानसभा सीटें – तुलसीपुर, गैसड़ी, उतरौला और बलरामपुर – इस बदलाव से प्रभावित हुई हैं। सर्वाधिक असर उतरौला में देखा गया, जहाँ 47,772 महिला मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। इसके बाद बलरामपुर में 47,542, तुलसीपुर में 31,820 और गैसड़ी में 28,984 महिला मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के अलग-अलग तर्क हैं। विपक्षी दल इसे प्रशासनिक खामी और 2003 की पुरानी मतदाता सूची के सत्यापन में विफलता का परिणाम बता रहे हैं। वहीं, सत्तारूढ़ दल का कहना है कि शादी के बाद महिलाओं का दूसरे जिलों या राज्यों में स्थानांतरण इसका मुख्य कारण है। बलरामपुर की नेपाल सीमा से सटी भौगोलिक स्थिति भी इसमें एक अहम भूमिका निभाती है, जहाँ बड़ी संख्या में बेटियों की शादी पड़ोसी देश में होता है। ऐसे में पुराने रिकॉर्ड का सत्यापन न हो पाने के कारण उनके नाम सूची से हटना स्वाभाविक माना जा रहा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जिले में कुल महिला मतदाताओं की संख्या 5,73,091 है, जबकि पुरुष मतदाताओं की संख्या 7,37,627 है। यह बड़ा अंतर राजनीतिक दलों के लिए चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि महिला वोट बैंक कई सीटों पर जीत-हार में निर्णायक भूमिका निभाता रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाताओं की संख्या में इस तरह की गिरावट सीधे चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकती है। इससे न केवल दलों की जमीनी पकड़ कमजोर हो सकती है, बल्कि विरोधियों को अप्रत्याशित बढ़त भी मिल सकती है। इन बदलते आंकड़ों के बीच, सभी प्रमुख राजनीतिक दलों को अपनी चुनावी रणनीति पर नए सिरे से विचार करना होगा। खासकर महिला मतदाताओं की घटती संख्या ने आगामी विधानसभा चुनावों के समीकरणों को अनिश्चित बना दिया है।
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