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    भीषण गर्मी में माइग्रेन का 'अटैक':AC से सीधे धूप में निकलना पड़ रहा भारी, हैलेट अस्पताल में 3 गुना बढ़े मरीज

    1 hour ago

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    शहर में बढ़ती भीषण गर्मी न केवल आम सेहत पर भारी पड़ रही है, बल्कि यह माइग्रेन जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या को भी तेजी से बढ़ा रही है। तपिश और लू के बीच सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में माइग्रेन के मरीजों की संख्या में सामान्य दिनों के मुकाबले दो से तीन गुना तक उछाल आया है। एलएलआर (हैलट) और उर्सला अस्पताल के न्यूरो और मनोरोग विभाग में युवा से लेकर बुजुर्ग तक, सभी आधे सिर के असहनीय दर्द की शिकायत लेकर इलाज के लिए कतारों में खड़े दिख रहे हैं। पानी की कमी और तापमान का बड़ा अंतर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. एसके गौतम ने बताया कि, गर्मी में माइग्रेन के दौरे बढ़ने के पीछे मुख्य कारण डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी होना है। पसीने के जरिए शरीर से पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से बाहर निकल जाते हैं, जिसका सीधा असर दिमाग की नसों पर पड़ता है और वे सिकुड़ने लगती हैं। सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों के लिए है जो एसी कमरों या ठंडी गाड़ियों से निकलकर अचानक भीषण गर्मी और तेज धूप के संपर्क में आते हैं। तापमान में यह अचानक बदलाव शरीर के तालमेल को पूरी तरह बिगाड़ देता है, जिससे माइग्रेन का दर्द ट्रिगर हो जाता है। एलएलआर अस्पताल के न्यूरो विभाग में ही रोजाना 35 से 40 मरीज इसी समस्या के साथ मदद के लिए पहुंच रहे हैं। माइग्रेन को सामान्य दर्द समझने की भूल न करें एलएलआर अस्पताल के मनोरोग विभागाध्यक्ष प्रो. धनंजय चौधरी का कहना है,कि माइग्रेन को सिर्फ सामान्य सिरदर्द समझकर नजरअंदाज करना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। यह एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। इसमें सिर के एक तरफ नब्ज चलने जैसा तेज दर्द होता है। अक्सर मरीज इसे मामूली थकान मानकर खुद ही पेन-किलर खा लेते हैं, जो आगे चलकर स्वास्थ्य को और अधिक नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लंबे समय तक माइग्रेन का इलाज न कराना नेत्र विकारों का कारण भी बन सकता है। बचाव के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी माइग्रेन से बचने के लिए दिनचर्या में अनुशासन लाना सबसे जरूरी है। गर्मी के दिनों में घर से खाली पेट बाहर निकलने की गलती न करें। शरीर में पानी की कमी न होने दें और कोशिश करें कि इलेक्ट्रोलाइट्स युक्त तरल पदार्थों का सेवन नियमित रूप से करते रहें। इसके अलावा देर रात तक कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि स्क्रीन की रोशनी भी माइग्रेन के खतरे को बढ़ाती है। खुद से दवाइयां लेने के बजाय योग, मेडिटेशन और गहरी सांस लेने वाले व्यायामों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। यदि सिरदर्द के साथ जी मिचलाने, तेज रोशनी से चिड़चिड़ाहट और आंखों के सामने धुंधलापन महसूस हो, तो इसे हल्के में न लें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
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