Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    भारत-रूस ने तोड़ डाले दोस्ती के सारे रिकॉर्ड, मॉस्को ने डबल की तेल की सप्लाई

    3 hours from now

    1

    0

    भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर इस वक्त एक बड़ी कहानी सामने आ रही है और इस कहानी के केंद्र में है भारत और रूस की मजबूत होती हुई दोस्ती और साझेदारी। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ हार्मोंस के लगभग ठप हो जाने से वैश्विक तेल सप्लाई बुरी तरीके से प्रभावित हुई है और इसका सीधा असर भारत पर भी देखने को मिला है। जहां मार्च महीने में कच्चे तेल का आयात करीब 13% तक गिर गया है। यह गिरावट मुख्य तौर पर ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के कारण मिडिल ईस्ट से तेल सप्लाई रुकने की वजह से आई है। लेकिन इस संकट की स्थिति में भी भारत और रूस ने एक बार फिर से दिखा दिया कि इन दोनों देशों की दोस्ती इतनी गहरी क्यों है और एक बार फिर देखने को मिला जहां भारत ने रूस से भारी मात्रा में तेल को आयात किया है।इसे भी पढ़ें: भारत को पृथ्वी की सबसे जादुई जगह ले गया रूस, दुनिया में हड़कंप दरअसल हॉर्मोज स्ट्रेट से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल गुजरता है। लेकिन युद्ध जैसे हालात के चलते यह रास्ता लगभग बंद हो गया है। कई टैंकर रास्ते में ही फंस गए हैं और कुछ पर हमलों की खबरें भी सामने आ रही हैं। जिससे भारत जैसे बड़े आयातक देश पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे संकट के समय में भारत की मदद के लिए रशिया सामने आया है और एक बड़ा सहारा बनकर तेल सप्लाई जारी की है। मार्च के महीने में रूस से भारत का तेल आयात लगभग दोगुना होकर 22.5 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया है। जो कि भारत के कुल आयात का लगभग आधा हिस्सा है। यानी कि भारत ने मार्च में जो भी तेल आयात किया है उसका आधा हिस्सा सिर्फ रूस से लिया है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। उसके लिए यह बढ़ती सप्लाई बेहद अहम है। मार्च महीने में कुल आयात करीब 45 लाख बैरल प्रतिदिन का रहा और इसमें रूस की साझेदारी सबसे ज्यादा थी। इन सबके बीच भारत की मिडिल ईस्ट से तेल सप्लाई में भारी गिरावट देखने को मिली है। यूनाइटेड अरब एमिरेट्स यानी यूएई और इराक जैसे देशों से भारत के तेल आयात कई सालों के निचले स्तर पर पहुंच गया है और कुल आयात में मिडिल ईस्ट की हिस्सेदारी भी घटकर सिर्फ 26.3% रह गई है। इसे भी पढ़ें: दो भाई, दोनों तबाही...क्या है भारत-रूस का RELOS समझौता? चीन-पाक और US की हेकड़ी निकलीआपको बता दें कि एक दिलचस्प बात यह भी है कि अमेरिका ने भी इस स्थिति में एक अहम भूमिका निभाई है। जहां अमेरिका ने वैश्विक तेल कीमतों को काबू में रखने के लिए रूसी तेल पर लगाए गए प्रतिबंध को हटा दिया था और रूस से तेल खरीदने पर छूट दी थी। तो भारत ने भी इस छूट का पूरा फायदा उठाते हुए रूस से दबाकर तेल खरीदा है और भारत ने समुद्र में उपलब्ध रूसी तेल को बढ़ाकर खरीदा जिसकी वजह से भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में आसानी हुई। मिडिल ईस्ट से सप्लाई कम होने के कारण भारत ने कुछ अफ्रीकी देश जैसे कि अंगोला से भी तेल आयात को बढ़ाया है। लेकिन इसके बावजूद रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बनकर सामने आया है। कुल मिलाकर यह स्थिति एक साफ संकेत देती है कि वैश्विक संकट के समय भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग और भी ज्यादा मजबूत हो गया है। 
    Click here to Read more
    Prev Article
    China ने ईरान को भेजा था गिफ्ट, ट्रंप बोले- हमने पकड़ लिया, ड्रैगन ने किया इनकार
    Next Article
    China से जा रहे ईरानी जहाज पर टूट पड़ा अमेरिका, अंदर जो मिला...उड़े ट्रंप के होश!

    Related विदेश Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment