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    बंगाल- एक एग्जिट पोल में भाजपा, दूसरे में TMC सरकार:असम में फिर भाजपा, NDA को 88-100 सीटें, कांग्रेस को 24-36 सीटों का अनुमान

    3 hours ago

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    पश्चिम बंगाल में पीपुल्स पल्स ने TMC को 177 से 187 सीटें मिलने का अनुमान जताया है। भाजपा को 95 से 110 सीटें मिलने की बात कही है। इधर, मैट्रिज के एग्जिट पोल में भाजपा को 146 से 161 सीटें मिलने की बात कही है। TMC को 125 से 140 सीटें मिलने का अनुमान है। बंगाल में प्रजा पोल में भाजपा को 177 सीटें मिलने का अनुमान है, टीएमसी को 100 सीटें मिल सकती हैं। पी-मार्क के एग्जिट पोल में भाजपा को 150 से 175 और TMC को 118 से 138 सीटें दी गई हैं। एक्सिस माय इंडिया के एग्जिट पोल में असम में फिर भाजपा सरकार बनती दिख रही है। इसमें NDA को 88 से 100, जबकि कांग्रेस को 24 से 36 सीटें मिलने का अनुमान है। वोट वाइब ने केरल में कांटे की टक्कर दिखाई है। यहां UDF को 70 से 80 सीटें, जबकि सत्ता पर काबिज LDF को 58 से 68 सीटें दी गई है। जानिए पिछले एग्जिट पोल कितने सही, कितने गलत 1. पश्चिम बंगालः 2. तमिलनाडुः 3. केरलमः 4. असमः पांचों राज्यों में 3 से 12% मतदान बढ़ा: पांचों राज्यों में इस बार रिकॉर्ड वोटिंग हुई। सबसे बड़ा फैक्टर वोटर लिस्ट रिविजन (SIR) को बताया जा रहा है। इसमें बड़ी संख्या में डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं के नाम हटाए गए। इससे कुल वोटर्स की संख्या घट गई, लेकिन वोट डालने वाले लोगों की संख्या लगभग समान रही, जिससे प्रतिशत बढ़ गया। महिलाओं को कैश सहायता, मुफ्त यात्रा और आरक्षण जैसे वादों ने महिला वोटर्स को बड़ी संख्या में बाहर निकाला। इस बार महिलाओं का वोट प्रतिशत पुरुषों की तुलना में बंगाल-तमिलनाडु में 2%, असम में 1%, केरल में 5% और पुडुचेरी में 3% ज्यादा रहा। एग्जिट पोल से जुड़े 5 सवाल और उनके जवाब 1. एग्जिट पोल क्या होता है? जवाब: चुनाव के दौरान जनता का मूड जानने के लिए दो तरह के सर्वे किए जाते हैं। वोटिंग से पहले के सर्वे को ओपिनियन पोल कहते हैं, जबकि वोटिंग के दौरान होने वाले सर्वे को एग्जिट पोल कहा जाता है। आम तौर पर एग्जिट पोल के नतीजे आखिरी फेज की वोटिंग खत्म होने के एक घंटे बाद जारी किए जाते हैं। 2. एग्जिट पोल की शुरुआत कब और कैसे हुई? जवाब: चुनावी सर्वे की शुरुआत सबसे पहले अमेरिका में हुई। 1930 में जॉर्ज गैलप और क्लॉड रोबिंसन ने अमेरिकी सरकार के कामकाज पर लोगों की राय जानने के लिए ये सर्वे किया था। एग्जिट पोल की शुरुआत काफी बाद में हुई। टाइम मैगजीन के मुताबिक 1967 में पहली बार दुनिया में बड़े स्तर पर कोई एग्जिट पोल किया गया था। अमेरिका के पॉलिटिकल रिसर्चर वॉरेन मिटोफस्की ने केंटुकी राज्य में होने वाले गवर्नर चुनाव के दौरान पहली बार एग्जिट पोल किया था। दुनिया में पहली बार किस मीडिया कंपनी ने ये तरीका अपनाया, इसकी सटीक जानकारी नहीं है। 3. भारत में एग्जिट पोल की शुरुआत कब हुई? जवाब: भारत में एग्जिट पोल की शुरुआत इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक ओपिनियन (IIPU) के तत्कालीन प्रमुख एरिक डी कोस्टा ने की थी। 1980 के दशक में भारत में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर एग्जिट पोल को लेकर पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रणय रॉय और यूके के पॉलिटिकल एक्सपर्ट डेविड बटलर ने मिलकर काम किया। 1996 में सरकारी चैनल दूरदर्शन ने CSDS के साथ मिलकर पहली बार एग्जिट पोल जारी किए। 4. भारत में एग्जिट पोल को लेकर क्या कानून और नियम हैं? जवाब: एग्जिट पोल का मामला अलग-अलग वजहों से तीन बार सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा है। रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट- 1951 के सेक्शन 126A के मुताबिक मतदान खत्म होने के आधे घंटे बाद ही एग्जिट पोल जारी किया जा सकता है। अगर कोई कंपनी या व्यक्ति मतदान खत्म होने से पहले एग्जिट पोल जारी करता है तो उसे अपराध माना जाएगा। ऐसा करने वाले को दो साल तक की जेल और जुर्माना या दोनों हो सकता है। 5. कौन-से फैक्टर्स तय करते हैं कि एग्जिट पोल कितना सटीक होगा? जवाब: एग्जिट पोल कितना स्टीक है, ये 3 मुख्य फैक्टर पर निर्भर करता है… 1. सैंपल साइज: जिस एग्जिट पोल का सैंपल साइज जितना बड़ा होता है, उसे उतना ही ज्यादा एक्यूरेट माना जाता है। मतलब ये हुआ कि सर्वे में जितना ज्यादा से ज्यादा लोगों से संपर्क किया जाए, उतना ज्यादा अच्छा है। 2. सर्वे में पूछे जाने वाले सवाल: सैंपल सर्वे में पूछा गए सवाल जितना न्यूट्रल होगा, एग्जिट पोल का रिजल्ट भी उतना ही सटीक होगा। 3. सर्वे का रेंज: सर्वे का दायरा जितना बड़ा होगा, रिजल्ट एक्यूरेट होने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी। मान लीजिए किसी विधानसभा में सिर्फ दो या तीन पोलिंग बूथ से सैंपल लिए जाते हैं, जहां किसी एक पार्टी के उम्मीदवार की पकड़ है। इससे एग्जिट पोल के रिजल्ट पर असर पड़ सकता है। कार्टूनिस्ट चंद्रशेखर हाडा और मंसूर नकवी की नजर से एग्जिट पोल
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