Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    Basava Jayanti 2026 | प्रधानमंत्री मोदी ने जगद्गुरु बसवेश्वर को श्रद्धांजलि दी, जातिवाद के खिलाफ शंखनाद करने वाले महापुरुष की गौरव गाथा

    3 hours from now

    1

    0

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बसव जयंती के अवसर पर सोमवार को जगद्गुरु बसवेश्वर को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि न्यायपूर्ण समाज के उनके दृष्टिकोण और लोगों को सशक्त बनाने के उनके अटूट प्रयासों से हम सभी को हमेशा प्रेरणा मिलती रहेगी। मोदी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘बसव जयंती के इस विशेष अवसर पर जगद्गुरु बसवेश्वर और उनके उपदेशों को नमन। एक न्यायपूर्ण समाज का उनका सपना और जनसशक्तीकरण के उनके अटूट प्रयास हमें सदैव प्रेरित करते रहेंगे।’’ बसवेश्वर, 12वीं शताब्दी के कवि-दार्शनिक और लिंगायत संप्रदाय के संस्थापक थे, उन्हें बसवन्ना के नाम से भी जाना जाता है।बसव जयंती मुख्य रूप से 12वीं सदी के महान समाज सुधारक, दार्शनिक और कवि महात्मा बसवेश्वर (जिन्हें 'बसवन्ना' भी कहा जाता है) के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। यह त्योहार मुख्य रूप से कर्नाटक, महाराष्ट्र और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है।बसव जयंती मनाने के पीछे के प्रमुख कारण और उनके विचार निम्नलिखित हैं:जातिविहीन समाज की स्थापनाबसवन्ना ने उस समय के समाज में फैली जाति व्यवस्था, छुआछूत और ऊंच-नीच के भेदभाव का कड़ा विरोध किया था। उन्होंने "मानव धर्म" को सर्वोपरि माना और सिखाया कि जन्म के आधार पर कोई बड़ा या छोटा नहीं होता।2. 'अनुभव मंटप' (लोकतंत्र की नींव)उन्होंने दुनिया की पहली लोकतांत्रिक संसद मानी जाने वाली 'अनुभव मंटप' की स्थापना की थी। यहाँ समाज के हर वर्ग (महिला, पुरुष, गरीब, अमीर) के लोग एक साथ बैठकर आध्यात्मिक और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा करते थे।3. 'कायका वे कैलास' (काम ही पूजा है)बसवन्ना का सबसे प्रसिद्ध सिद्धांत था—"कायका वे कैलास"। इसका अर्थ है कि ईमानदारी से किया गया परिश्रम ही स्वर्ग के समान है। उन्होंने श्रम की गरिमा को बढ़ावा दिया और कहा कि हर व्यक्ति को मेहनत करके ही अपना जीविकोपार्जन करना चाहिए।4. महिला सशक्तिकरण12वीं सदी में उन्होंने महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार देने की वकालत की। उन्होंने महिलाओं को शिक्षित होने और सामाजिक चर्चाओं में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।5. 'वचन' साहित्य के जरिए शिक्षाउन्होंने जटिल धार्मिक ग्रंथों के बजाय आम लोगों की भाषा (कन्नड़) में छोटे-छोटे 'वचन' लिखे, ताकि आम आदमी भी नैतिक और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त कर सके। 
    Click here to Read more
    Prev Article
    Kerala Violence: संपत्ति विवाद ने लिया राजनीतिक मोड़, भाजपा और माकपा कार्यकर्ताओं में खूनी झड़प, 3 पुलिसकर्मी घायल
    Next Article
    N Chandrababu Naidu Birthday: Politics के 'Kingmaker' चंद्रबाबू नायडू का 76वां बर्थडे, जानें कैसे लिखी दमदार Comeback की कहानी

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment