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    अयोध्या में कारसेवकों पर गोली किसने चलवाई?:पूर्व IAS बोले- 90 फीसदी फैसले राजनीतिक होते हैं; अखिलेश को भी जवाब दिया

    2 hours ago

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    राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के मुख्य सचिव रहे नृपेंद्र मिश्रा ने अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने से जुड़ी घटनाओं पर बात की। उन्होंने कारसेवकों पर गोली चलाने वाले आरोपों पर भी अपनी चुप्पी तोड़ी। पूर्व आईएएस नृपेंद्र मिश्रा ने शनिवार को अयोध्या में कहा, इस तरह के फैसले मुख्य सचिव के स्तर पर नहीं लिए जाते। ऐसे लगभग 90 प्रतिशत फैसले राजनीतिक होते हैं और 10 प्रतिशत फैसलों में गृह सचिव, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से मिले सुझावों को शामिल किया जाता है। दरअसल, दो महीने पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव संसद में मनरेगा पर भाषण दे रहे थे। उन्होंने कहा- मनरेगा का नया नाम वीबीजी रामजी कर दिया है। भाजपा सांसद अरुण गोविल की तरफ इशारा करते हुए पूछा- हमारे रामजी कहां हैं। हम उन्हें बचपन से देखते आए हैं। लोकसभा में रामजी को सबसे पीछे बैठाया है। जबकि उन्हें आगे लाकर नंबर 2 सीट पर बैठाना चाहिए। इसी दौरान सत्ता पक्ष के सांसदों ने कहा- कार सेवकों पर गोली चलाने वाले ये बात कर रहे हैं। यह सुनते ही अखिलेश भड़क गए। उन्होंने कहा- जिन्होंने गोली चलवाई, वो राम मंदिर बनवा रहे हैं। अगर कुछ पता ना हो तो जाकर के पूछ लेना पता कर लेना। आधी-अधूरी जानकारी के साथ मत आया करो यहां पर। जब गोलीबारी की गई, तब मैं सचिव था प्रेस वार्ता में नृपेंद्र मिश्रा से सवाल किया गया कि अखिलेश यादव ने 1990 में अयोध्या में कारसेवकों पर गोलीबारी पर आप पर सवाल उठाया है। उस वक्त आप प्रमुख सचिव थे। इस पर नृपेंद्र मिश्रा ने कहा, हां मैं मुलायम सिंह यादव की सरकार में प्रमुख सचिव था। लेकिन इस तरह के फैसले मुख्य सचिव के स्तर पर नहीं लिए जाते। ऐसे लगभग 90 प्रतिशत फैसले राजनीतिक होते हैं और 10 प्रतिशत फैसलों में गृह सचिव, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से मिले सुझावों को शामिल किया जाता है। वह (अखिलेश) देश के सम्माननीय नेता के बेटे हैं। इसलिए उनको तो सभी जानकारी होगी। नृपेंद्र मिश्रा ने मुलायम और कल्याण के कार्यकाल का अंतर बताया नृपेंद्र मिश्रा ने अलग-अलग सरकारों के अधीन अपने कार्यकाल का भी जिक्र किया, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत मुलायम सिंह यादव का कार्यकाल भी शामिल है। उन्होंने संकट के समय इन दोनों नेताओं की ओर से अपनाए गए अलग-अलग रवैयों में मौजूद अंतर को भी बताया। नृपेंद्र मिश्रा ने कहा, मैंने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और कल्याण सिंह, दोनों के ही मुख्य सचिव के तौर पर काम किया है। आपको भी पता होगा कि जब 1992 में कल्याण सिंह के सामने यह रिपोर्ट पेश की गई थी कि अयोध्या में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ चुकी है, तो उन्होंने लिखित आदेश दिया था कि इस पवित्र नगरी में किसी भी तरह की गोलीबारी नहीं होगी। अयोध्या में 30 अक्टूबर और 2 नवंबर को पुलिस ने चलाई थी गोली मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल के दौरान 30 अक्टूबर और 2 नवंबर 1990 को पुलिस ने कारसेवकों पर गोली चलाई थीं, उस समय विश्व हिंदू परिषद की ‘कार सेवा’ के हिस्से के तौर पर बड़ी संख्या में भगवान राम के भक्त अयोध्या में इकट्ठा हुए थे। रिपोर्टों के अनुसार, निहत्थे कारसेवकों पर पुलिस की गोलीबारी में 28 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने बाद में कहा था, यह कार्रवाई उनके आदेश पर की गई थी, और उन्होंने इसे विवादित ढांचे की सुरक्षा तथा राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने के लिए जरूरी बताते हुए सही ठहराया था। इसके विपरीत, 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचे को गिराए जाने के दौरान उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने निर्देश दिया था कि हालात बेहद तनावपूर्ण होने के बावजूद कारसेवकों पर गोली न चलाई जाए। कहा जाता है कि कल्याण सिंह ने कहा था कि एक इमारत के लिए कारसेवकों पर गोली नहीं चलाई जाएगी। बाद में 6 दिसंबर 1992 की शाम को विवादित ढांचे के विध्वंस के बाद मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। ---------------- यह खबर भी पढ़िए… वृंदावन हादसे से पहले के 4 VIDEO:पंजाब का युवक गा रहा था- नजर सांवरे लग न जाए कहीं... अचानक नाव डूब गई मथुरा के वृंदावन में यमुना नदी में हुए नाव हादसे से पहले के पंजाब के श्रद्धालुओं के 4 वीडियो सामने आए। जिनमें हादसे से ठीक पहले का मंजर साफ दिखाई दे रहा है। जिसमें श्रद्धालु भजन करते दिख रहे हैं। वीडियो में साफ देखा जा सकता है किसी भी श्रद्धालु ने सुरक्षा के लिए लाइफ जैकेट नहीं पहन रखी थी। सभी लोग ‘राधे-राधे’ का जाप करते हुए भजन-कीर्तन कर रहे थे। ढोलक और मंजीरे की थाप पर भजन गाए जा रहे थे। एक युवक मंजीरा बजाते हुए भजन गा रहा है- नजर सांवरे लग न जाए कहीं…। पढ़ें पूरी खबर…
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