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    अधिवक्ता के पिता बोले-अब मैं परिवार का सामना कैसे करूंगा:सिर की हडि्डयां चकनाचूर, 8 पसलियां टूटी, कोमा में जाने से हुई मौत

    3 hours ago

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    कानपुर कचहरी परिसर की पांचवी मंजिल से कूदकर सुसाइड करने वाले अधिवक्ता प्रियांशु श्रीवास्तव का आज पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में प्रियांशु के सिर की हडि्डयां चकनाचूर होने की बात सामने आई। अधिवक्ता की मौत कोमा में जाने के कारण हुई, साथ ही उनके 8 पसलियां हाथ पैरों में भी फ्रेक्चर मिला। बेटे की मौत के बाद मृतक के पिता बदहवास दिखे। घटना के बाद एसीपी कोतवाली आशुतोष कुमार ने जब उनसे सुसाइड का कारण पूछा तो वह सिर्फ एक बात बोले कि– अब मैं अपने परिवार का सामना कैसे करूंगा… उन्होंने कहा कि प्रियांशु उनके जिगर का टुकड़ा था, लेकिन वह शायद इस बात को समझ न सका। इतना कहते ही वह फफक कर रो पड़े। अब पढ़िए पूरा प्रकरण… बर्रा 8, वरुण विहार निवासी अधिवक्ता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव का 23 साल का बेटा प्रियांशु श्रीवास्तव लॉ ग्रेजुएशन करने के बाद पिता के साथ प्रेक्टिस कर रहा था। गुरुवार दोपहर तकरीबन 3 बजे प्रियांशु कचहरी परिसर की पांचवी मंजिल पर पहुंचा, जहां टूटी हुई खिड़की की बाउंड्री पर जाकर बैठ गया। करीब 15 मिनट तक खिड़की के पास बैठने के बाद खिड़की से कूद कर सुसाइड कर लिया। तेज धमाके की आवाज सुनकर अधिवक्ता मौके पर पहुंचे तो प्रियांशु का सिर बुरी तरह से फट चुका था, मांस के टुकड़े जगह–जगह पर पड़े हुए थे। आनन–फानन में पुलिस उसे उर्सला अस्पताल लेकर पहुंची, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। घटना की जानकारी पर जिला जज अनमोल पाल समेत अन्य न्यायिक अधिकारी, डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता, एडीसीपी अंजलि विश्वकर्मा समेत मौके पहुंचे थे। 2 पेज का लिखा था सुसाइड नोट मृतक के मोबाइल से 2 पेज का सुसाइड नोट भी मिला था, जिसमें उसने अपने परिजनों पर बेइज्जत करने का आरोप लगाया था। शुक्रवार को प्रियांशु का पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे मामा ने जब प्रियांशु का शव देखा तो वह अपने आंसू रोक नहीं सके। हालांकि इस दौरान परिजनों ने बात करने से इंकार कर दिया। यह लिखा था सुसाइड नोट मेरी ये अंतिम इच्छा है कि सब लोग मेरे इस सुसाइड नोट को अंत तक पूरा पढ़े… मैं प्रियांशु श्रीवास्तव निवासी वरुण विहार, बर्रा-8 कानपुर का रहने वाला हूं। आज 23 अप्रैल समय लगभग दोपहर 12.05 बजे मैं अपने पूरे होश में बिना किसी जोर–दबाव और जबरदस्ती के यह सुसाइड नोट लिख कर अपनी जान दे रहा हूं। मैं एक रजिस्टर्ड अधिवक्ता हूं, जिसने अपनी लॉ की पढ़ाई कानपुर नगर से 2025 में पूरी की है। समय की कमी होने के कारण मैं अपना पंजीकरण उत्तर प्रदेश बार कांउसिल प्रयागराज से प्राप्त नहीं कर सका हूं। कहानी शुरू होती है मेरे बचपन से, जहां करीब 5 या 6 वर्ष की उम्र में ही मुझे मानसिक यातनाएं मिलनी शुरू हो गई। बताने में तो मुझे बहुत शर्म महसूस हो रही है, लेकिन मैं आज ये सारी बातें जरूर बताना चाहूंगा, क्योकि जो आज मैं यह कदम उठाने जा रहा हूं… भविष्य में ऐसी नौबत किसी के साथ न आ जाए। फ्रिज से जूस पी लिया तो निर्वस्त्र कर पीटा था करीब 6 वर्ष की उम्र में मुझे चोरी से सिर्फ फ्रिज में रखे आम के जूस को पीने के चलते निर्वस्त्र करके घर से बाहर भगा दिया गया। माना कि हर मां–बाप को शुरू से ही सख्त रवैया अपनाना चाहिए, ताकि उनके बच्चों का भविष्य संवर सके। परंतु इतनी भी सख्ती न हो कि बच्चों को हर पल घुटन महसूस होने लगे। मैंने कई बार कोशिश की कि इन सब माहौल से निकल आगे बढ़कर जिंदगी जी सकूं। परंतु 23 साल की उम्र तक आज तक जो चीजें मेरे साथ घटित हुई हैं, मुझे नहीं लगता कि इस तरह से बेगैरत की जिंदगी जीने के लायक है। पढ़ाई के लिए जरूरत से ज्यादा प्रेशर करना, परीक्षा से एक दिन पहले अगर सिलेबस पूरा तैयार नहीं है तो मारने लग जाना। ये सब तो एक हद तक समझ आया है। लेकिन, हर समय हर मिनट शक की नजरों से देखना, जरूरत से ज्यादा, एक एक मिनट का हिसाब लेना, कहीं न कहीं ये मानसिक टॉर्चर ही है। इस टॉर्चर के साथ मैं ज्यादा समय तक और नहीं जी सकता हूं। सख्ती लगाव और प्रेम इस सीमा तक भी नहीं होना चाहिए कि वो नफरत में बदल जाए। पिता ने धमकाया था, हाईस्कूल में अच्छे नंबर न आए तो निर्वस्त्र कर घर से भगा दूंगा बात है वर्ष 2016 की। कक्षा 9 में प्रवेश के दौरान मेरे पापा ने ये शर्त रखी थी कि मैं अगर कंप्यूटर ऑफ फिजिकल एजुकेशन के विषय में कंप्यूटर का चयन नहीं करूंगा तो वो मुझे पूरा निर्वस्त्र कर घर से भगा देंगे। उनके दबाव में आकर मैंने ऐसे विषय का चयन किया, जिसमें मेरी रूचि नहीं थी। जिसका नतीजा यह रहा कि मेरे 9वीं में उस विषय को ज्यादा पढ़ने के बावजूद उसमें ज्यादा नंबर नहीं ला सका। इसके चलते अन्य विषयों में कम समय देने के कारण मेरे 9वीं के रिजल्ट में कम नंबर आए। वर्ष 2016 में घर के निर्माण काम में करीब 4 महीने का समय लग जाने के चलते मेरे हाईस्कूल की पढ़ाई ज्यादा प्रभावित हुई। रिजल्ट आने से पहले मेरे पापा द्वारा मुझे धमकी दी गई कि अगर हाईस्कूल में नंबर कम आए तो पूरा निर्वस्त्र कर घर से भगा देंगे। घर और समाज में इज्जत जाने के भय से मैंने घर से भागकर ट्रेन से मथुरा स्टेशन तक पहुंच गया था। क्योंकि मुझे पूरा विश्वास था कि अगर मेरे नंबर कम आए तो जो उन्होंने व्यवहार मेरे साथ छोटी उम्र में निर्वस्त्र कर किया था, वहीं हाल वे मेरा इस बार भी कर देंगे।
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