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    अधिवक्ता की मौत मामले में प्रधान ने सरेंडर किया:देवरिया में 26 दिन बाद वकील के साथ कोर्ट पहुंचा, सपाइयों ने किया था प्रदर्शन

    2 hours ago

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    देवरिया में वरिष्ठ अधिवक्ता विजेंद्र सिंह की मौत के मामले में फरार चल रहे ग्राम प्रधान राजेश यादव ने शुक्रवार को देवरिया न्यायालय के सीजेएम कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। घटना के 26 दिन बाद प्रधान अपने अधिवक्ता वीरेंद्र कुमार साहनी के साथ अदालत में पेश हुए, जहां सुनवाई के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। बरहज तहसील क्षेत्र के लक्ष्मीपुर गांव में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं तहसील बार के पूर्व अध्यक्ष विजेंद्र सिंह की मौत के बाद से ही पुलिस राजेश यादव की लगातार तलाश कर रही थी। राजेश यादव की गिरफ्तारी को लेकर पिछले कई दिनों से अधिवक्ताओं, स्थानीय लोगों और राजनीतिक दलों की ओर से लगातार दबाव बनाया जा रहा था। पुलिस, एसओजी और स्थानीय थाना टीम लगातार दबिश देने का दावा कर रही थी। मुख्य आरोपी के लंबे समय तक गिरफ्त से बाहर रहने को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठते रहे। प्रधान के अचानक कोर्ट में आत्मसमर्पण करने के बाद क्षेत्र में चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय स्तर पर लोग इसे संभावित पुलिस एनकाउंटर के डर से जुड़ा मान रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब लगातार दबिश और गिरफ्तारी की बात हो रही थी, तब पुलिस आरोपी तक नहीं पहुंच सकी और आखिरकार उसने खुद अदालत में सरेंडर कर दिया। चकनाली की जमीन पर सीसी रोड निर्माण बना विवाद की वजह पूरा मामला 5 अप्रैल का है। लक्ष्मीपुर गांव में चकनाली की जमीन पर सीसी रोड निर्माण को लेकर विवाद शुरू हुआ था। बताया गया कि वरिष्ठ अधिवक्ता विजेंद्र सिंह इस निर्माण का विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि चकनाली की जमीन पर बिना उचित प्रक्रिया के निर्माण कराया जा रहा है। इसी दौरान ग्राम प्रधान राजेश यादव और उनके समर्थकों से अधिवक्ता विजेंद्र सिंह की कहासुनी हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद इतना बढ़ गया कि धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। आरोप है कि इसी दौरान विजेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजन उन्हें तत्काल इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन हालत बिगड़ने पर उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया। अधिवक्ताओं ने इसे गंभीर मामला बताते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर कई दिनों तक प्रदर्शन किया। दो बेटे पहले गिरफ्तार मृतक के पुत्र प्रशांत सिंह की तहरीर पर पुलिस ने ग्राम प्रधान राजेश यादव, दुबौली गांव के प्रधान गामा यादव, तारकेश्वर यादव, कुलवंत यादव, सुखवंत यादव उर्फ बीरू सहित आठ अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने जांच के दौरान 17 अप्रैल को ग्राम प्रधान के दो पुत्रों कुलवंत यादव और सुखवंत यादव उर्फ वीरू को गिरफ्तार कर लिया था। दोनों की गिरफ्तारी के बाद भी मुख्य आरोपी ग्राम प्रधान राजेश यादव लगातार फरार चल रहे थे। पुलिस का कहना था कि उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। प्रधान की गिरफ्तारी न होने से अधिवक्ताओं और विपक्षी दलों में नाराजगी बढ़ती जा रही थी। लगातार यह सवाल उठ रहा था कि आखिर मुख्य आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर क्यों है। सपा ने किया धरना-प्रदर्शन का आह्वान, प्रशासन ने नहीं दी अनुमति मामले को लेकर समाजवादी पार्टी ने गुरुवार को बरहज तहसील परिसर में विशाल धरना-प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी नेताओं का कहना था कि वरिष्ठ अधिवक्ता की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सभी आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। हालांकि प्रशासन ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद सपा कार्यकर्ता आंदोलन की तैयारी में जुटे रहे। पुलिस प्रशासन ने पहले ही कई नेताओं को हाउस अरेस्ट कर दिया था। इसके बाद भी बड़ी संख्या में सपा नेता बरहज तहसील पहुंच गए। तहसील परिसर को पुलिस छावनी में बदल दिया गया था। भारी संख्या में पुलिस बल, पीएसी, महिला पुलिस, फायर ब्रिगेड और डायल 112 की टीमें तैनात रहीं। कई नेताओं को हिरासत में लेकर अलग-अलग स्थानों पर भेजा गया। एसडीएम निलंबित, एसपी अटैच इस पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा असर डाला। वरिष्ठ अधिवक्ता विजेंद्र सिंह की मौत के मामले में तत्कालीन एसडीएम विपिन द्विवेदी को निलंबित कर दिया गया था। वहीं आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी और मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक संजीव सुमन को मुख्यालय अटैच कर दिया गया था। अब ग्राम प्रधान राजेश यादव के आत्मसमर्पण के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अधिवक्ता संगठन और परिजन अभी भी बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े हुए हैं। क्षेत्र में अब भी राजनीतिक हलचल बनी हुई है। लोगों का कहना है कि इस मामले में पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। प्रधान के सरेंडर के बाद भी यह मामला फिलहाल शांत होता नहीं दिख रहा है।
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