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    अमेरिका ने घटाया टैरिफ, रूस ने खोले दरवाजे:कानपुर लेदर कारोबार को राहत; ऑर्डर में तेजी; रिकॉर्ड निर्यात की उम्मीद

    3 hours ago

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    उत्तर प्रदेश के एक्सपोर्ट हब कानपुर के लिए राहत भरी बड़ी खबर सामने आई है। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध की हलचल और वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव के बीच शहर के लेदर कारोबारियों के लिए ‘अच्छे दिन’ लौटते दिख रहे हैं। अमेरिका द्वारा टैरिफ दरों में बड़ी कटौती किए जाने के बाद ठप पड़ा निर्यात एक बार फिर पटरी पर लौट आया है। वहीं, संकट के इस समय में रूस ने भी भारतीय उत्पादों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं, जिससे निर्यातकों के चेहरे खिल उठे हैं। स्थानीय निर्यातकों को उम्मीद है कि इस साल के अंत तक कारोबार के आंकड़े पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं। टैरिफ का संकट हुआ दूर पिछले कुछ समय से कानपुर का लेदर उद्योग कठिन दौर से गुजर रहा था। अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच जब अमेरिका ने टैरिफ दरों में बढ़ोतरी की, तब निर्यातकों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया था। लेकिन 6 फरवरी 2026 को अमेरिका ने टैरिफ दरों को घटाकर 18 प्रतिशत करने का फैसला लिया। इसका असर तुरंत देखने को मिला। कारोबारियों का कहना है कि 11 फरवरी के बाद से ही विदेशी ऑर्डर्स की बाढ़ आ गई। अब निर्यातकों को उसी रफ्तार और मात्रा में ऑर्डर मिल रहे हैं, जैसे उन्हें अप्रैल 2025 से पहले मिला करते थे। मुश्किल वक्त में रूस बना ‘संकटमोचक’ जब अमेरिकी बाजार में ऊंचे टैरिफ की दीवार खड़ी थी और कारोबार मंदा था, तब भारतीय निर्यातकों ने नए बाजारों की तलाश शुरू की। इस दौरान रूस एक बड़े मददगार और रणनीतिक साझेदार के रूप में उभरा। रूसी कारोबारियों ने न केवल भारतीय लेदर उत्पादों की गुणवत्ता को सराहा, बल्कि उनमें गहरी रुचि भी दिखाई। अब रूस के साथ बड़े पैमाने पर व्यापारिक गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। निर्यातकों का मानना है कि अमेरिका की वापसी और रूस का साथ, दोनों मिलकर कानपुर के लेदर उद्योग को विकास के नए सोपान पर ले जाएंगे। यूपी के कुल निर्यात में अमेरिका की बड़ी हिस्सेदारी फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) की वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट कानपुर की ताकत को दर्शाती है। उस दौरान उत्तर प्रदेश से कुल 1.86 लाख करोड़ रुपये का निर्यात हुआ था, जिसमें अकेले अमेरिका की हिस्सेदारी 19 प्रतिशत रही। यह आंकड़ा लगभग 35 हजार करोड़ रुपये के आसपास था। अब चूंकि स्थितियां दोबारा सामान्य हो रही हैं और रूस जैसा नया बाजार भी जुड़ गया है, तो जानकारों का मानना है कि इस बार कारोबार की वैल्यू पुराने आंकड़ों को पीछे छोड़ सकती है। 2030 तक 50 बिलियन डॉलर का बड़ा लक्ष्य काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट (सीएलई) के वाइस चेयरमैन मुख्तारुल अमीन इस बदलाव को लेकर काफी उत्साहित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि, टैरिफ दरें कम होने से निर्यातकों का आत्मविश्वास बढ़ा है और अब लक्ष्य साल 2030 तक 50 बिलियन डॉलर का कुल कारोबार करने का है। हालांकि मिडिल ईस्ट के हालात पर नजर बनी हुई है। लेकिन उम्मीद है कि वहां भी स्थितियां जल्द सामान्य होंगी। दूसरी ओर, सीएलई के पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष असर इराकी का मानना है कि जिन देशों के साथ भारत का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) हुआ है, वहां भारतीय उत्पाद अपनी क्वालिटी के दम पर छा जाएंगे। अब अमेरिका और रूस के साथ-साथ कई अन्य नए देशों में भी कारोबार विस्तार की मजबूत योजना तैयार कर ली गई है।
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