Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    अब सुई का दर्द नहीं सहेगा मरीज:कानपुर में लार से होगी हेपेटाइटिस-C की जांच, चंद मिनटों में मिलेगी सटीक रिपोर्ट

    3 hours ago

    2

    0

    हेपेटाइटिस-सी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी सुपर स्पेशियलिटी पीजीआई (GSVSS PGI) से एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। संस्थान में हुए एक वैश्विक ट्रायल के ऐसे चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं, जो आने वाले समय में इलाज की पूरी तस्वीर बदल देंगे। अब मरीजों को न तो जांच के लिए बार-बार खून देने की जरूरत पड़ेगी और न ही महीनों तक दवाइयों का भारी डोज लेना होगा। शोध के मुताबिक, महज 8 हफ्ते यानी दो महीने के इलाज से ही मरीज गंभीर संक्रमण से मुक्त हो रहे हैं। खून की जगह लार से जांच और चंद मिनटों में रिपोर्ट सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के गैस्ट्रो मेडिसिन विभाग ने एक ऐसी विशेष किट पर शोध किया है, जिसमें मरीज के खून के बजाय उसकी लार यानी सलीवा का सैंपल लिया जाता है। लार में मौजूद एंटीबॉडीज के जरिए संक्रमण की पहचान की जाती है। यह तकनीक न केवल जांच को आसान बनाती है, बल्कि चंद मिनटों में सटीक रिपोर्ट भी दे देती है। करीब 550 हाई रिस्क मरीजों पर किए गए इस शोध में यह तकनीक 98 प्रतिशत तक सटीक पाई गई है। इससे समय रहते संक्रमित व्यक्ति की पहचान करना और इलाज शुरू करना अब बेहद आसान हो गया है। दवा का डोज हुआ आधा, कम समय में बेहतर रिकवरी अभी तक हेपेटाइटिस-सी के मरीजों को ठीक होने के लिए 12 से 24 सप्ताह तक लगातार दवा खानी पड़ती थी। लेकिन ग्लोबल ट्रायल के तीसरे चरण में शामिल मरीजों पर हुए शोध ने इलाज को छोटा और प्रभावी बना दिया है। गैस्ट्रो विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार ने बताया कि, नई दवा के असर से अब मात्र आठ सप्ताह में ही वैसे ही सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं, जो पहले छह महीने के लंबे कोर्स के बाद मिलते थे। ट्रायल के दौरान मरीजों को दो समूहों में बांटकर पुरानी और नई दवा का तुलनात्मक अध्ययन किया गया, जिसमें नई दवा का कम अवधि वाला कोर्स बेहद कारगर साबित हुआ है। वैश्विक स्तर पर मिली सफलता, अब मरीजों को मिलेगा लाभ हेपेटाइटिस की रोकथाम के लिए चल रहे इस वैश्विक अभियान में पहले और दूसरे चरण के दौरान करीब 2200 मरीजों पर दवा का प्रयोग किया गया था। इन चरणों की सफलता के बाद कानपुर में 30 मरीजों पर तीसरे चरण का ट्रायल पूरा किया गया। डॉ. विनय कुमार का कहना है कि ट्रायल के परिणाम स्पष्ट करते हैं कि अब क्रोनिक स्थिति वाले मरीजों में भी गंभीरता को बहुत कम समय में नियंत्रित किया जा सकता है। सफल ट्रायल के बाद अब इस नई पद्धति और दवा को सामान्य मरीजों के लिए जल्द ही लागू करने की तैयारी की जा रही है। इससे न केवल मरीजों का पैसा बचेगा, बल्कि उन्हें लंबे समय तक दवा खाने से होने वाली परेशानियों से भी छुटकारा मिलेगा।
    Click here to Read more
    Prev Article
    लखनऊ में मंत्री असीम अरुण ने बांटी पूड़ी-सब्जी:पहले बड़े मंगल पर 1000 से अधिक भंडारे, मैंगो शेक का प्रसाद बंटा...VIDEO
    Next Article
    आगरा के शमसाबाद में लावारिस हालत में मिला नवजात:मिट्टी से सने शिशु को नोचती रहीं चींटियां, झाड़ियों के बीच पॉलिथीन में लिपटा था

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment