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    54 African Countries के नेता Modi के साथ मंथन करने दिल्ली आएंगे, Jaishankar बोले- हम वैश्विक शासन को दिशा देंगे

    3 hours from now

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    दुनिया एक ओर संघर्षों में उलझी हुई है लेकिन भारत वैश्विक चुनौतियों और विकासशील देशों की चिंताओं का समाधान निकालने की दिशा में बड़ी पहल करने जा रहा है। इसी कड़ी में दिल्ली में अफ्रीकी देशों के शीर्ष नेता जुटने वाले हैं, जहां चौथा भारत अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन 28 मई से 31 मई 2026 तक आयोजित होगा। इस सम्मेलन में अफ्रीकी महाद्वीप के विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष, अफ्रीकी संघ आयोग और क्षेत्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भाग लेंगे, जिसका उद्देश्य भारत और अफ्रीका के बीच बहुआयामी साझेदारी को और मजबूत करना तथा भविष्य के सहयोग के लिए एक स्पष्ट और ठोस रूपरेखा तैयार करना है।विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने आज नई दिल्ली में इस सम्मेलन का प्रतीक चिन्ह, विषय और वेबसाइट का अनावरण किया। इस बार सम्मेलन का विषय है 'भारत अफ्रीका रणनीतिक साझेदारी नवाचार लचीलापन और समावेशी परिवर्तन', जो इस रिश्ते की व्यापकता और गहराई को दर्शाता है। हम आपको यह भी बता दें कि सम्मेलन से पहले 28 मई को वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक और 29 मई को विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित की जाएगी, जिनमें दोनों पक्षों के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा होगी।इसे भी पढ़ें: भारत व दक्षिण कोरिया के बीच हुई नई डील के सियासी निहितार्थभारत अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन एक महत्वपूर्ण मंच है, जो आपसी संवाद को मजबूत करने और परस्पर लाभकारी सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर देता है। यह साझेदारी समानता, परस्पर सम्मान, एकजुटता और साझा समृद्धि के सिद्धांतों पर आधारित है। पिछले सम्मेलनों के परिणामस्वरूप अफ्रीका में भारत की विकास सहायता और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है, जिसने दोनों पक्षों के संबंधों को और सुदृढ़ किया है।रणनीतिक दृष्टि से यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब विश्व जटिल भू राजनीतिक चुनौतियों से गुजर रहा है। इस संदर्भ में अफ्रीका का महत्व लगातार बढ़ रहा है और भारत ने भी अपनी विदेश नीति में अफ्रीका को केंद्रीय स्थान दिया है। भारत ने अफ्रीका में अपने राजनयिक संबंधों का विस्तार किया है और आज वह अफ्रीका के प्रमुख व्यापारिक भागीदारों तथा निवेशकों में शामिल है। यह दर्शाता है कि भारत का अफ्रीका के साथ जुड़ाव दीर्घकालिक और स्थायी है।इस साझेदारी की जड़ें ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों में निहित हैं। सदियों से सांस्कृतिक आदान प्रदान और मानवीय संपर्कों ने इस रिश्ते को मजबूत किया है। इसके अतिरिक्त उपनिवेशवाद के विरुद्ध संघर्ष के दौरान भारत ने अफ्रीकी देशों के साथ एकजुटता दिखाई, जिससे यह संबंध और गहरा हुआ। दोनों क्षेत्रों का साझा इतिहास संघर्ष, आत्मबल और विकास की आकांक्षाओं से जुड़ा रहा है, जो आज भी इस साझेदारी को दिशा देता है।सामरिक महत्व के दृष्टिकोण से यह सम्मेलन कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है। एक तो यह ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने का माध्यम है। भारत ने लगातार अफ्रीका को वैश्विक शासन व्यवस्था में उचित स्थान दिलाने का समर्थन किया है। वर्ष 2023 में जी-20 में अफ्रीकी संघ को शामिल करना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था, जिससे वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अफ्रीका की भागीदारी सुनिश्चित हुई। इसके अलावा, यह सम्मेलन आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को नई गति देगा। ऊर्जा, आधारभूत संरचना, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को और विस्तार मिलने की संभावना है। भारत की तकनीकी क्षमता और अफ्रीका की संसाधन संपन्नता मिलकर दोनों के लिए विकास के नए अवसर पैदा कर सकती है। साथ ही यह सम्मेलन सुरक्षा और स्थिरता के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण है। हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग और आपदा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर समन्वय दोनों पक्षों के लिए आवश्यक है। इस मंच के माध्यम से इन विषयों पर साझा रणनीति विकसित की जा सकती है। इसके अलावा, यह सम्मेलन भारत के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य और अफ्रीका के एजेंडा 2063 के बीच सामंजस्य स्थापित करने का अवसर प्रदान करता है। दोनों ही पहल सतत विकास, समावेशी वृद्धि और सामाजिक न्याय पर आधारित हैं, जिससे सहयोग के नए आयाम खुलते हैं।आगामी शिखर सम्मेलन को एक ऐतिहासिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है, जो भारत और अफ्रीका के बीच मित्रता और सहयोग के संबंधों को और मजबूत करेगा। यह विकासशील देशों के बीच साझेदारी का एक प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत करेगा। साथ ही यह सम्मेलन भारत की सुशासन और समावेशी विकास की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने का भी मंच बनेगा। समग्र रूप से यह कहा जा सकता है कि चौथा भारत अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देगा, बल्कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में एक संतुलित और न्यायपूर्ण विश्व व्यवस्था के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।जहां तक आज के कार्यक्रम में विदेश मंत्री के संबोधन की बात है तो आपको बता दें कि डॉ. एस जयशंकर ने कहा है कि आज भारत की विदेश नीति में अफ्रीका का अहम स्थान है और नयी दिल्ली का अफ्रीका के साथ संबंध समानता, परस्पर सम्मान और साझा प्रगति के सिद्धांतों पर आधारित एक स्पष्ट दृष्टिकोण से निर्देशित है। उन्होंने कहा, ‘‘हम यहां भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन ढांचे के माध्यम से भारत और अफ्रीका के बीच स्थायी साझेदारी में एक नया अध्याय शुरू करने के लिए एकत्रित हुए हैं।’’ विदेश मंत्री ने कहा कि भारत-अफ्रीका संबंध "हमारे सभ्यतागत संबंधों" पर आधारित हैं, जो सदियों से सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संबंध के माध्यम से विकसित हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष में भारत ने अफ्रीकी देशों के प्रति एकजुटता दिखाई थी और इससे हमारे संबंध और भी मजबूत हुए।’’विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की कहानी अफ्रीका से भी गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा, ‘‘संघर्ष, एकजुटता, लचीलेपन और आकांक्षाओं का हमारा साझा इतिहास हमारी साझेदारी को आकार देता है।’’ जयशंकर ने कहा कि आज अफ्रीका भारत की विदेश नीति में अहम स्थान रखता है। मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना और अफ्रीका का ‘एजेंडा 2063’ सतत विकास और समावेशी विकास के माध्यम से समृद्धि और प्रगति की दिशा में पूरक रोडमैप हैं। जयशंकर ने यह भी कहा कि कई उच्च स्तरीय राजनीतिक वार्ताओं के साथ भारत और अफ्रीका के बीच प्रमुख स्तंभों पर संबंध मजबूत हुए हैं, और भारत वैश्विक व्यवस्था में अफ्रीका के उचित स्थान का लगातार समर्थन कर रहा है। मंत्री ने कहा कि इस दिशा में एक "महत्वपूर्ण कदम" 2023 में भारत की जी20 की अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को समूह में शामिल करना था। उन्होंने कहा, "यह हमारे इस दृढ़ विश्वास को दर्शाता है कि आने वाले समय में वैश्विक शासन को दिशा देने में ग्लोबल साउथ की आवाज़ों का विशेष महत्व होगा।''
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