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    14 फीट गहरे गड्‌ढे में गिरे मजदूर, एक की मौत:अलीगढ़ में पाइप लाइन का चल रहा था काम, भाई बोला-जेई ने लात मारकर उतारा

    3 hours ago

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    अलीगढ़ के रेलवे रोड पर शनिवार को जलकल विभाग के जेई की लापरवाही से मजदूर की मौत हो गई। सीवर लाइन की खुदाई के बाद क्षतिग्रस्त हुई पानी की पाइपलाइन सही करते समय 14 फीट गहरे गड्ढे में मिट्टी धंसने से मजदूर महेंद्र (32) की दबकर मौत हो गई। आरोप है कि मिट्टी खिसकती देख मजदूरों ने काम करने से मना किया था, लेकिन जूनियर इंजीनियर ने गाली-गलौज कर और लात मारकर उन्हें जबरन गड्ढे में धकेल दिया। हादसे के बाद आरोपी अफसर मौके से भाग निकला, जिसके बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। सूचना पर थाना बन्नादेवी पुलिस भी जिला अस्पताल पहुंच गई। यहां पर शव को पोस्टमार्टम ले जाने के दौरान परिजन की पुलिस से जमकर नोकझोंक हुई। परिजन ने शव को पुलिस से छीन लिया। परिजन आरोपी जेई पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। ​लात मारकर भाई को नीचे भेजा, विरोध पर दी गालियां हादसे के चश्मदीद और मृतक के भाई राजकुमार ने बताया कि रेलवे रोड पर सीवर लाइन डालने के दौरान पानी की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी। उसे सही करने का काम चल रहा था। गड्ढा करीब 14 फीट गहरा था और उसकी मिट्टी ऊपर से दरक रही थी। राजकुमार ने बताया कि उन्होंने जेई नरेंद्र सिंह के हाथ जोड़े कि मिट्टी गिर रही है, अभी काम बंद कर दो, जान को खतरा है। लेकिन जेई नरेंद्र सिंह आगबबूला हो गए। उन्होंने कहा कि कामचोरी मत करो और मेरे भाई महेंद्र को लात मारकर जबरदस्ती गड्ढे के अंदर घुसा दिया। ​बिना सुरक्षा इंतजाम के चल रहा था काम राजकुमार ने आरोप लगाया कि यह काम किसी ठेकेदार को टेंडर देकर नहीं कराया जा रहा था, बल्कि जेई साहब खुद पैसे कमाने के चक्कर में प्राइवेट तरीके से मजदूरों को बुलाकर काम करवा रहे थे। मौके पर न तो कोई सुरक्षा मशीन थी और न ही मजदूरों के लिए हेलमेट या बेल्ट का इंतजाम। मजदूरों का आरोप है कि उन्हें रात के 2-2 बजे तक भी जबरन काम पर बुलाया जाता था और मना करने पर बुरी तरह प्रताड़ित किया जाता था। ​मिट्टी की ढांग गिरी और दब गया महेंद्र काम के दौरान अचानक मिट्टी का एक भारी टीला नीचे गिर गया। गड्ढे में राजकुमार, महेंद्र और एक अन्य मजदूर मौजूद थे। राजकुमार ने बताया कि उसने किसी तरह एक साथी को तो खींच लिया, लेकिन उसका भाई महेंद्र भारी मलबे के नीचे पूरी तरह दब गया। वहां मौजूद अन्य मजदूरों ने आनन-फानन मिट्टी हटाकर महेंद्र को बाहर निकाला और जिला अस्पताल ले गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। ​परिजन का हंगामा, पुलिस से नोकझोंक मजदूर की मौत की खबर की सूचना पर थाना बन्नादेवी पुलिस और परिजन मौके पर पहुंच गए। जब पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने की कोशिश की, तो परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने नगर निगम और जेई के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पुलिस से शव को ले लिया। परिजन की मांग थी कि जब तक आरोपी जेई पर हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं होता, वे पोस्टमार्टम नहीं होने देंगे। काफी देर तक पुलिस और परिजनों के बीच तीखी नोकझोंक होती रही। बाद में अधिकारियों के आश्वासन पर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा सका। ​पीछे छूट गए दो मासूम बच्चे और बूढ़ी मां मृतक महेंद्र जवां इलाके का रहने वाला था और अलीगढ़ में किराए के कमरे में रहकर अपने परिवार का पेट पाल रहा था। उसकी मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। महेंद्र के दो छोटे बच्चे हैं। एक 16 साल का बेटा और एक 11 साल की बेटी। सुरक्षा के थे इंतजाम, दी जाएगी आर्थिक सहायता इस संबंध में नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा का कहना है कि काम के दौरान सुरक्षा के पूरे इंतजाम थे। हादसा बहुत ही दुखद है, पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। इस मामले मजदूर के परिजन को आर्थिक सहायता भी मुहैया कराई जाएगी।
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