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    103वां संकट मोचन संगीत समारोह:11 पद्म अवॉर्डी और 14 मुस्लिम कलाकार शास्त्रीय संगीत से करेंगे संकट मोचन की स्तुति

    2 hours ago

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    महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने कहा - पहली बार 14 मुस्लिम कलाकार भी हनुमान जी पर प्रस्तुतियां देंगे। उन्होंने कहा कि हमारे यहां अगर कोई अपनी प्रस्तुति देना चाहता है तो हम उनकी जाति नहीं पूछते हैं। यह हनुमान जी का दरबार है यहां सब का स्वागत है। इस बार वहीं कार्यक्रम में 11 पद्म अवॉर्डी भी होंगे, जिसमें से कई कलाकार तो पहली बार आयेंगे। महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने कहा कि आग्रह है कि एक मंदिर ऐसा रहने दिया जाए जिसमें सभी धर्मों और विचारों के लोगों को आने की अनुमति हो। 2-5 अप्रैल तक रामायण सम्मेलन का होगा आयोजन इससे पहले दो से पांच अप्रैल तक मंदिर में संकटमोचन हनुमान की जयंती पर भव्य रामायण सम्मेलन का आयोजन होगा। साथ-साथ कई शहरों से प्रसिद्ध रामायण मंडलियां और मानस वक्ता शामिल होंगे। अधिवेशन में अखिल ब्रह्माण्डनायक सीताराम महाराज सभापति के आसन को सुशोभित करेंगे। 2 अप्रैल को सुबह 6 से 9 बजे तक श्री हनुमान जी की पूजन-आरती और झांकी निकलेगी। 9 बजे से श्री रामायण जी की पूजन-आरती और मानस का एकाह पाठ होगा। शाम को भजन और रामायण मंडलियों द्वारा पूरी रात अखंड गान होगा। शिवमणि के ड्रम और यू राजेश के मेंडोलिन की होगी जुगलबंदी संकट मोचन संगीत समारोह के लिए कलाकारों की सूची फाइनल हो गई है।लोकगायिका मालिनी अवस्थी, मुंबई से प्रख्यात भजन और गजल गायक अनूप जलोटा अपनी टीम के साथ हनुमत दरबार में भजनों से हाजिरी लगाने आएंगे। वहीं, भुवनेश्वर से पं. रतिकांत महापात्रा, पुणे से पं. उल्हास काशलकर का गायन होगा। इसके अलावा मुंबई से रोनू मजूमदार के बांसुरी वादन की प्रस्तुति भी होगी। मुंबई से पं. हरिप्रसाद चौरसिया के साथ शिवमणि के और यू राजेश के मेंडोलिन की जुगलबंदी होगी। सांस्कृतिक परंपरा बन गया है संगीत समारोह 103 साल पहले 1923 में संकट मोचन मंदिर के महंत अमरनाथ मिश्र ने संकट मोचन संगीत की जो नींव स्थानीय स्तर पर डाली वह यात्रा शताब्दी तक पंहुच बेमिसाल आयोजन बन गयी। आज यह सिलसिला सिर्फ अखिल भारतीय स्तर का संगीत समारोह न होकर एक सांस्कृतिक परम्परा बन गया है। शुरू-शुरू में इस आयोजन में पहले रामायण सम्मेलन होता फिर आखिरी दिन संगीत सम्मेलन बाद में संगीत समारोह तीन रोज का हुआ।‌ फिर चार, और अब सात रोज का।‌ अब जानिए कैसे बदला मंच का स्वरूप महंत अमरनाथ खुद बड़े पखावज वादक थे। उसके बाद के महंत पं. वीरभद्र मिश्र ने इसे जारी रखा। वे बीएचयू में सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर थे। बड़े पर्यावरणविद स्वच्छ गंगा अभियान के ध्वज वाहक थे। उनके बेटे वर्तमान मंहत विशम्भर नाथ मिश्र भी बीएचयू आईटी में प्रोफेसर हैं और पखावज पर सिद्धहस्त हैं। अब यह समारोह उन्हीं के हवाले है और परम्परा निर्बाध गति से चल रही है। संकट मोचन संगीत समारोह पहले बाबा की मुख्य ड्योढ़ी पर ही होता। बाद में मंदिर के सामने कुएं का जगत इसका मंच बना। तभी से संगीत समारोह दो दिन फिर तीन दिन का हुआ। तब इसका जिम्मा महंत बांकेराम मिश्र जी के पास था। उस वक्त इस समारोह में बनारस के कलाकार ही भाग लेते थे। लेकिन अब लोगों की क्राउड बढ़ी तो पवनपुत्र के आंगन में रात भर श्रोता संगीत समारोह का आनंद लेते हैं। नीचे पोस्टर में देखें कब किस कलाकार की होगी प्रस्तुति
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