Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    Yes Milord: जज बदलने के बाद नमाज पर आया बड़ा फैसला, HC ने अब क्या कहा?

    3 hours from now

    2

    0

    बरेली में घर के अंदर नमाज पढ़ने का मामला इन दिनों सुर्खियों में बना हुआ है। जहां निजी संपत्ति में धार्मिक गतिविधियों और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज हो गई। इसी मामले में दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि घर के अंदर बड़ी संख्या में लोगों को इकट्ठा करना सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है। यह पूरा विवाद बरेली के एक इलाके से जुड़ा है। जहां याचिकाकर्ता तारिक खान पर आरोप था कि वह सुरक्षा का लाभ उठाकर अपने घर में रोजाना 50 से 60 लोगों को नमाज के लिए बुला रहा था। प्रशासन ने इस पर आपत्ति जताते हुए कोर्ट में हलफनामा और तस्वीरें पेश की थी। जिनमें भीड़ जुटने की स्थिति दिखाई गई थी। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने दलील दी कि इस तरह की गतिविधि से इलाके की शांति और सौहार्द प्रभावित हो सकता है। इसलिए इसे अनुमति नहीं दी जा सकती। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति करिमा प्रसाद की खंडपीठ ने की। याचिकाकर्ता की तरफ से दिए गए जवाब में कोर्ट को भरोसा दिलाया गया कि भविष्य में विवादित स्थान पर बड़ी संख्या में लोगों को नमाज के लिए नहीं बुलाया जाएगा। इस संबंध में एक अंडरटेकिंग भी दी गई। याचिकाकर्ता की इस प्रतिबद्धता को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाई कोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया। साथ ही साथ यह भी स्पष्ट कर दिया कि अगर भविष्य में अंडरटेकिंग का उल्लंघन होता है तो दोबारा भीड़ जुटाई जाती है। जिससे कानून व्यवस्था को खतरा पैदा होता है तो प्रशासन और पुलिस कानून के मुताबिक सख्त कारवाई करने के लिए स्वतंत्र होंगे। कोर्ट ने इस दौरान बरेली के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को जारी अवमान नोटिस भी उनका निरस्त कर दिया है। इसके अलावा याचिकाकर्ता और अन्य के खिलाफ जारी चालान को तुरंत वापस लेने के निर्देश दिए हैं। इसे भी पढ़ें: एक छात्र को राहत, लाखों को झटका! Rajasthan SI Exam पर Supreme Court ने क्यों बदला अपना आदेश?घटनाक्रम पर एक नजरइससे पहले, न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एक अन्य खंडपीठ ने खान की रिट याचिका की सुनवाई करते हुए 12 फरवरी को आदेश दिया था कि 'मरनाथा फुल गॉस्पेल मिनिस्ट्रीज बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और 2 अन्य' मामले में उच्च न्यायालय के 27 जनवरी के आदेश का उल्लंघन करने के लिए बरेली के डीएम और एसएसपी को न्यायालय की अवमानना ​​अधिनियम, 1971 के तहत नोटिस जारी किया जाए। पीठ ने कहा था कि निजी परिसरों में प्रार्थना सभाएं आयोजित करने के लिए राज्य की अनुमति आवश्यक नहीं है। 11 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति श्रीधरन और नंदन की पीठ ने दोनों अधिकारियों को 23 मार्च को न्यायालय में उपस्थित रहने का निर्देश दिया था, अन्यथा न्यायालय गैर-जमानती वारंट के माध्यम से उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करेगा। न्यायालय ने निजी संपत्ति के मालिक हसीन खान को पुलिस सुरक्षा प्रदान करने का भी आदेश दिया था। हाल ही में बेंचों की सूची में हुए बदलाव के बाद, 25 मार्च को जस्टिस श्रीवास्तव और प्रशाद की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। अतिरिक्त महाधिवक्ता (एएजी) ने संपत्ति की तस्वीरें पेश करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता प्रतिदिन नमाज़ अदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों को इकट्ठा कर रहा है। एएजी ने तर्क दिया कि यदि इस प्रथा को जारी रहने दिया गया तो यह क्षेत्र की शांति और सुव्यवस्था के लिए हानिकारक होगा। उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्तिगत सुरक्षा की आड़ में इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।इसे भी पढ़ें: आखिर पश्चिम बंगाल में 'चुनावी जंगलराज' के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं?चालान तुरंत वापस लेने का निर्देशएएजी ने आगे कहा कि चूंकि अधिकारियों का दायित्व है कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखें, और यदि कानून-व्यवस्था में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना हो, तो अधिकारियों के पास कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। इन कथनों के जवाब में याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता यह आश्वासन देता है कि वह संपत्ति पर नमाज़ अदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों को इकट्ठा नहीं करेगा। दलीलें सुनने के बाद, पीठ ने अपने आदेश में कहा कि हमें आशा और विश्वास है कि याचिकाकर्ता अपने द्वारा दिए गए वचन का पालन करेगा। यदि याचिकाकर्ता उपरोक्त वचन का उल्लंघन करता है और इस याचिका में उल्लिखित संपत्ति पर बड़ी संख्या में लोगों को नमाज अदा करने के लिए इकट्ठा करता है, और यदि इससे क्षेत्र में शांति और व्यवस्था को खतरा होता है, तो प्रतिवादी अधिकारियों को कानून के अनुसार कार्रवाई करने की स्वतंत्रता है। पीठ ने आगे कहा कि हम राज्य अधिकारियों को याचिकाकर्ता और अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध जारी चालान तुरंत वापस लेने का निर्देश देते हैं। अवमानना ​​नोटिस भी रद्द किए जाते हैं। याचिकाकर्ता के वकील द्वारा यह कहने के बाद कि संपत्ति मालिक को अदालत द्वारा पहले दिए गए पुलिस सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है, अदालत ने अधिकारियों को हसीन खान को दी गई सुरक्षा वापस लेने का निर्देश दिया।
    Click here to Read more
    Prev Article
    24 घंटे में ईरान किया अमेरिका को चारों खाने चित, कई एयरक्राफ्ट, अटैक जेट, हेलीकॉप्टर और F-35 जैसे फाइटर को मार गिराया
    Next Article
    Assam Election: हिमंता का Owaisi पर तीखा हमला, मिया समुदाय को बना रहे हैं हथियार

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment