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    West Bengal BJP: West Bengal में BJP का अर्श से फर्श तक का सफर, जानें पार्टी के Political Graph की पूरी कहानी

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    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के कार्यक्रम का ऐलान हो चुका है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में संपन्न होने वाला है। वहीं वोटों की गिनती 04 मई 2026 को होगी। इस विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ दल और भारतीय जनता पार्टी के बीच में उभर रहा है। वहीं राज्य में अन्य पार्टियां इस तीव्र मुकाबले के कारण हाशिए पर धकेल दिए गए हैं।पार्टी की स्थापनाभारतीय जनता पार्टी की स्थापना साल 1980 में हुई थी। यह भारत की एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी है। साल 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना पूर्व केंद्रीय मंत्री और स्वतंत्रता सेनानी श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की थी। भाजपा कल्याणकारी सामाजिक नीतियों, सुदृढ़ आर्थिक विकास, राष्ट्रवादी एजेंडा और आत्मनिर्भरता से प्रेरित विदेश नीति और मजबूत राष्ट्रीय रक्षा की वकालत करती है। हालांकि पश्चिम बंगाल में भाजपा के सियासी रूप से उतार-चढ़ाव की कहानी काफी दिलचस्प है।इसे भी पढ़ें: Murshidabad में Owaisi की रैली से गरमाई सियासत, Humayun Kabir के साथ मिलकर चुनावी समीकरण बदलेराज्य में भाजपासाल 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य के 42 सीटों में से 18 सीटों पर जीत हासिल की। लेकिन साल 2021 के विधानसभा चुनाव में जबरदस्त माहौल बनाने के बाद भी भाजपा सत्तारूढ़ पार्टी को हरा नहीं पाई। जिसके बाद से राज्य की सियासी कहानी फिर बदल गई और राज्य में बीजेपी को कई झटके लगे। एक ओर साल 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन काफी खराब रहा, तो वहीं हालिया विधानसभा उपचुनाव में भी सत्तारूढ़ पार्टी ने सभी 4 सीटों पर अपना कब्जा जमाया।बता दें कि बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग रणनीति का सबकसे अहम पहलू हिंदू एकजुटता को माना जाता है। पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों की आबादी करीब 30% बताई जाती है। बीजेपी को उम्मीद जताई थी कि पार्टी को हिंदू एकजुटता के अलावा मुस्लिम वोटों का भी फायदा मिलेगा। लेकिन मध्य और दक्षिण बंगाल में वोटों का कोई खास विभाजन नहीं हुआ। यहां पर मुसलमानों ने सत्तारूढ़ पार्टी का समर्थन किया।साल 2019 में बीजेपी की राजनीतिक बढ़त को बड़े पैमाने पर मतुआ-नामसुद्र, राजबंशी और जंगलमहल के आदिवासी समूहों जैसे दलित समूहों के समर्थन से मदद मिली थी। वहीं साल 2024 के नतीजे पूरी तरह से भाजपा के लिए निराशाजनक नहीं रहे। वहीं पश्चिम बंगाल में कभी सत्ता में न आने वाली भारतीय जनता पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कमर कस चुकी है। राज्य में दो चरणों में चुनाव होने हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या राज्य में भारतीय जनता पार्टी की रणनीति सफल होगी।पश्चिम बंगाल में भाजपा की स्थितिसाल 1977 के चुनावों में जनसंघ ने जनता पार्टी के घटक के रूप में 29 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। इस तरह से हरिपाड़ा भारती बंगाल इकाई के पहले अध्यक्ष बने।फिर साल 1982 में भारतीय जनता पार्टी ने पहला विधानसभा चुनवा लड़ा। साल 1984 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 9 सीटों पर चुनाव लड़ा और 0.4% वोट हासिल किए।साल 1991 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 291 सीटों पर चुनाव लड़ा। इस दौरान मत प्रतिशत 0.51% से बढ़ाकर 11.34% तक पहुंचा।साल 1998 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अपने दम पर लोकसभा सीट जीती, जोकि पार्टी की राज्य में पहली जीत थी।फिर साल 2014, 2019 और 2024 के चुनावों में पार्टी ने खुद को राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी के मुख्य प्रतिद्वंदी के रूप में खुद को स्थापित किया है।
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