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    उठक-बैठक लगाने वाले अफसर बोले- IAS एसोसिएशन धोखेबाज:रिंकू सिंह ने इस्तीफा वापस लिया, कहा- मुझे पोस्टिंग का लालच नहीं

    3 hours ago

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    उठक-बैठक करके चर्चा में आए यूपी के IAS रिंकू सिंह राही ने इस्तीफा वापस ले लिया है। इसके लिए उन्होंने सरकार को लिखित आवेदन दिया है। इस्तीफा वापस लेने के सवाल पर रिंकू सिंह ने दैनिक भास्कर से कहा- मुझे पोस्टिंग का कोई लालच नहीं है, मैं बस काम करना चाहता हूं। सरकार मुझसे जहां चाहे काम कराए। शासन के अधिकारियों ने मुझे भरोसा दिलाया है कि आगे से मेरे साथ ऐसा नहीं होगा। मुझे जल्द सम्मानजनक पोस्टिंग भी दी जाएगी। रिंकू सिंह ने कहा- IAS एसोसिएशन पर भरोसा करना गलत है। वह किसी का साथ नहीं देती। एसोसिएशन सबसे ज्यादा धोखेबाज है। मेरे साथ वैसा ही हुआ, जैसा महाभारत में कर्ण के साथ हुआ था, जिस तरह कर्ण से कुंडल ले लिए गए थे। रिंकू सिंह राही ने 26 मार्च को राष्ट्रपति को कंडीशनल इस्तीफा भेजा था। कहा- उन्हें वेतन तो मिल रहा था, लेकिन जनसेवा का अवसर नहीं मिल रहा था। उन्होंने अपनी पुरानी नौकरी यानी पीसीएस में वापस भेजे जाने की भी अपील की थी। 44 साल के रिंकू को 9 महीने पहले शाहजहांपुर से हटाकर राजस्व परिषद भेजा गया था। तब से उन्हें फील्ड में कोई पोस्टिंग नहीं मिली थी। रिंकू 2021 बैच के IAS अफसर हैं। अभी उनकी 16 साल की नौकरी बची है। बसपा शासन में 26 मार्च, 2009 को रिंकू सिंह पर फायरिंग हुई थी। जिसमें उन्हें सात गोलियां लगी थीं। इनमें से दो उनके चेहरे पर लगी थीं, जिससे उनका चेहरा बिगड़ गया था। कैसे मानें रिंकू सिंह, जानिए 26 मार्च को रिंकू के इस्तीफे के बाद शासन में हड़कंप मच गया था। इसके बाद सरकार के अधिकारी हरकत में आए। सूत्रों के मुताबिक, रिंकू की पूर्व नौकरी के दौरान किए गए कार्यों की जांच कराई गई। उनके स्कूल-कॉलेज के शैक्षणिक दस्तावेजों और जाति प्रमाण पत्र की भी जांच हुई, लेकिन कहीं गड़बड़ी के सबूत नहीं मिले। इसके बाद शासन के अधिकारियों और राजस्व परिषद के अध्यक्ष अनिल कुमार ने रिंकू से बात की और भविष्य में उनके सम्मान का ध्यान रखने का आश्वासन दिया। इसके बाद उन्होंने इस्तीफा वापस ले लिया। हालांकि, इसकी डेट सामने नहीं आई है। इस्तीफा देने के बाद रिंकू ने भास्कर से क्या कहा था, हूबहू पढ़िए सवाल- आप अनुसूचित जाति से आते हैं, क्या इस कारण ऐसा हुआ? रिंकू : मुझे नहीं पता। मैंने इस बारे में कभी सोचा नहीं है, इसलिए उत्तर नहीं दे सकता। मेरी जगह कोई और अधिकारी होता, तो उसे भी यह झेलना पड़ता। मैं यह कहना चाहता हूं कि SC जाति के अलावा एक और जाति होती है- ईमानदारी वाली जाति। ईमानदारी भी दो तरह की होती है। एक, जो सिर्फ पैसा नहीं लेते। दूसरी, जो ईमानदारी से काम करते हैं। मैं ईमानदारी से काम करने वालों में हूं। सवाल : आपने लिखा कि भ्रष्टाचार का समानांतर तंत्र चल रहा है, इसका आधार? रिंकू : बिल्कुल सही कहा है। आप देखते होंगे कि कई जगह सड़क नहीं होती, लेकिन कागजों में सड़क बन चुकी होती है। यह भ्रष्टाचार का तंत्र है, जिससे राजनीतिक लोग भी परेशान हैं। सवाल : इस भ्रष्टाचार के तंत्र को कौन चला रहा है? रिंकू : ब्यूरोक्रेसी ही इस भ्रष्टाचार का तंत्र चला रही है। बिना पैसा दिए यह तंत्र चलता ही नहीं। जब कागजों में ही काम हो रहा है, तो इसका क्या मतलब है। सवाल : आपको कई महीनों से पोस्टिंग नहीं मिली है, क्या कहेंगे? रिंकू : आजादी के बाद शायद यह पहला मौका होगा, जब किसी जूनियर IAS के साथ ऐसा व्यवहार हुआ है। मैंने पहले ही कह दिया था कि अगर काम नहीं मिलेगा, तो वेतन भी नहीं लूंगा। अगर जूनियर IAS के साथ ऐसा होगा, तो उसका क्या संदेश जाएगा। मैं तो पहले ही पोस्टिंग और पनिशमेंट झेल चुका हूं, लेकिन किसी नए अधिकारी के साथ ऐसा हुआ तो वह हमेशा के लिए नेगेटिव हो जाएगा। सवाल- क्या पोस्टिंग के लिए आपको प्रताड़ित किया गया? रिंकू : मुझे प्रताड़ित नहीं किया गया। मैं व्यक्तिगत रूप से बहुत खुश हूं। घूमने-फिरने का समय मिल रहा है। मैं नौकरी व्यक्तिगत सुविधा के लिए नहीं, बल्कि लोगों की सेवा के लिए करने आया हूं। यह नैतिक मामला है। मेरे आदर्श और सिद्धांत आड़े आ रहे हैं। पढ़िए, SDM से क्यों हटाए गए थे रिंकू सिंह 9 महीने पहले रिंकू सिंह राही मथुरा में जॉइंट मजिस्ट्रेट थे। वहां से ट्रांसफर होकर 24 जुलाई, 2025 को दोपहर 2 बजे पुवायां SDM का चार्ज संभाला था। इसी दौरान उनकी नजर परिसर के अंदर ही दीवार के पास टॉयलेट कर रहे वकील आज्ञाराम के मुंशी विजय (38) पर पड़ी। उन्होंने उसे टोक दिया और शौचालय का इस्तेमाल करने के लिए कहा। मुंशी ने रिंकू सिंह को जवाब दिया कि शौचालय गंदे हैं। इस पर एसडीएम बिफर गए थे। कहने लगे थे कि ये गलती तहसील कर्मचारियों की है। उन्होंने मौके पर ही मुंशी से उठक-बैठक लगवा दी थी। तहसील परिसर में वकील अपनी कुछ मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। तभी उनको मंशी से उठक-बैठक लगवाने की बात पता चल गई। इस पर वकील भड़क गए थे। उन्होंने एसडीएम को मौके पर बुलवा लिया था। एसडीएम ने वकीलों से कहा था कि मुंशी ने गलती की है। इस पर वकीलों ने कहा था कि गलती है, तो उठक-बैठक लगवाना सही नहीं है। क्या आप उठक-बैठक लगा सकते हैं? इस पर रिंकू सिंह ने कहा था कि इसमें कोई शर्म नहीं है। मैं उठक-बैठक लगा सकता हूं। इसके बाद उन्होंने 5 बार उठक-बैठक लगाई थी। जानिए कौन हैं रिंकू सिंह राही… हाथरस के रहने वाले, पहले PCS फिर IAS बने रिंकू सिंह राही का जन्म 20 मई, 1982 को हाथरस में एक दलित परिवार में हुआ था। वह थाना सासनी के गांव ऊसवा के रहने वाले हैं। दो भाइयों में बड़े रिंक के पिता सौदान सिंह राही आटा चक्की चलाकर परिवार का पालन करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से उन्होंने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की थी। अच्छे नंबरों से 12वीं पास करने पर उन्हें स्कॉलरशिप मिली थी। इसकी मदद से उन्होंने जमशेदपुर के टाटा इंस्टीट्यूट से बीटेक किया था। 2004 में रिंकू सिंह ने पीसीएस परीक्षा पास की थी। नौकरी के दौरान उन्होंने दिव्यांग कोटे से यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी। 2021 में उन्हें 683वीं रैंक मिली और वे आईएएस बने थे। परिवार में पत्नी सुलेखा योगा टीचर रही हैं। 10 साल का एक बेटा ध्रुव राही है। ताऊ रघुवीर सिंह राही बसपा शासनकाल में जिलाध्यक्ष रहे हैं। भ्रष्टाचार का खुलासा करने पर 7 गोलियां मारी गई थीं पीसीएस बनने के बाद 2008 में रिंकू सिंह की पहली पोस्टिंग मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी के रूप में हुई थी। वहां उन्होंने छात्रवृत्ति और पेंशन में हो रहे भ्रष्टाचार का खुलासा किया था। रिंकू ने दैनिक भास्कर को बताया था- जांच में मुझे पता चला था कि 100 करोड़ रुपए गबन हुआ। इसके पीछे राजनीतिक पार्टी के अलावा पूरा गैंग था। उस समय बसपा सरकार थी। 26 मार्च, 2009 को रिंकू एक सहकर्मी के साथ बैडमिंटन खेल रहे थे। तभी उन पर दो हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थीं। इसमें रिंकू राही को सात गोलियां लगी थी। इनमें से दो उनके चेहरे पर लगी थीं। उनका जबड़ा तक बाहर आ गया और चेहरा बिगड़ गया था। साथ ही एक कान खराब हो गया और एक आंख की रोशनी चली गई थी। एक महीने अस्पताल में भर्ती रहे, धरना दिया था इस हमले के बाद रिंकू को हायर सेंटर मेरठ ले जाया गया था। करीब एक महीने मेरठ के सुभारती मेडिकल कॉलेज में भर्ती रहे थे। ऑपरेशन के बाद वह ठीक होकर लौटे थे। इसके बाद घोटाला के खुलासे के लिए रिंकू ने RTI के तहत विभाग से कुछ सूचनाएं मांगी थीं। लेकिन, एक साल बाद भी उन्हें सूचनाएं नहीं दी गईं। इसके बाद 26 मार्च, 2012 को रिंकू राही ने लखनऊ निदेशालय के बाहर अनशन शुरू कर दिया था। पुलिस ने रिंकू राही को वहां से उठाकर मेंटल हॉस्पिटल लखनऊ भेज दिया था। --------------------- ये खबर भी पढ़िए गंगा एक्सप्रेस-वे से मेरठ चमकेगा, उन्नाव की इंडस्ट्री डेवलप होगी:प्रतापगढ़ का आंवला-आम ज्यादा बिकेगा; 12 जिलों को होगा फायदा यूपी में गंगा एक्सप्रेस-वे बनकर तैयार है। 29 अप्रैल को पीएम मोदी इसका उद्घाटन करेंगे। 594 किलोमीटर का यह एक्सप्रेस-वे मेरठ को प्रयागराज से जोड़ेगा। ये उन 12 जिलों की तस्वीर बदल देगा, जहां से गुजर रहा है। एक्सप्रेस-वे 11 घंटे के सफर को घटाकर 6 घंटे कर देगा। पढ़ें पूरी खबर
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