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    देवरिया में बाल विवाह रोकने डीएम ने दिलाई शपथ:अक्षय तृतीया से पहले जागरूकता अभियान, दोषियों पर होगी कार्रवाई

    2 hours ago

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    देवरिया में अक्षय तृतीया से पहले बाल विवाह की रोकथाम के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। शनिवार को सदर तहसील में आयोजित कार्यक्रम में जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को बाल विवाह रोकने की शपथ दिलाई। इस दौरान आमजन को बाल विवाह के दुष्परिणामों और कानूनी प्रावधानों से अवगत कराया गया। वन स्टॉप सेंटर की मनोवैज्ञानिक मीनू जायसवाल ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाल विवाह कराना या इसमें शामिल होना दंडनीय अपराध है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना और दो वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। जायसवाल ने स्पष्ट किया कि विवाह के लिए लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष निर्धारित है। इससे कम उम्र में विवाह कराना संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध माना जाता है। जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने उपस्थित सभी लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई। उन्होंने जनपद को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि इस कुप्रथा पर प्रभावी रोक लगाने के लिए समाज के सभी वर्गों की भागीदारी आवश्यक है। जिला प्रोबेशन अधिकारी ने आमजन, धर्मगुरुओं, विवाह स्थल संचालकों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों से अपील की। उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिले, तो तुरंत संबंधित विभागों को सूचित करें। सूचना देने के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला हेल्पलाइन 181 और पुलिस हेल्पलाइन 112 जैसे नंबरों का उपयोग किया जा सकता है। जिला बाल संरक्षण इकाई के संरक्षण अधिकारी जय प्रकाश तिवारी ने सभी का आभार व्यक्त किया और बाल संरक्षण से जुड़े नियमों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक, उप जिलाधिकारी, क्षेत्राधिकारी नगर, जनपद स्तरीय अधिकारी, खंड विकास अधिकारी, थाना प्रभारी और महिला कल्याण विभाग के प्रतिनिधियों सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि अक्षय तृतीया के दौरान बाल विवाह को रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरती जाएगी। कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिलने पर तत्काल और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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