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    Shaurya Path: Indian Army Chief Dhiraj Seth ने पहले ही दिन जवानों को दे दिया VIJAY मंत्र, देश के दुश्मनों की उड़ी नींद

    22 hours ago

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    भारतीय सेना की कमान अब ऐसे सैन्य अधिकारी के हाथों में आ गई है, जो केवल युद्धक अनुभव ही नहीं, बल्कि बदलते युद्धक्षेत्र की नई चुनौतियों को समझने वाली आधुनिक सोच भी रखते हैं। जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना के 31वें सेना प्रमुख के रूप में पदभार संभालते ही साफ कर दिया कि आने वाले वर्षों में सेना का सबसे बड़ा लक्ष्य तकनीक आधारित, तेज, आत्मनिर्भर और बहुआयामी युद्ध क्षमता वाली फौज तैयार करना होगा। उन्होंने अपने पहले ही संबोधन में यह संकेत दे दिया कि भारतीय सेना अब पारंपरिक युद्ध की सीमाओं से आगे बढ़कर भविष्य के युद्ध की तैयारी में पूरी ताकत झोंकने जा रही है।सेना प्रमुख का पद संभालने के बाद जनरल धीरज सेठ ने कहा कि यह जिम्मेदारी उनके लिए गर्व और विनम्रता दोनों का विषय है। उन्होंने कहा कि वह “ड्यूटी, ऑनर और नेशन फर्स्ट” के सिद्धांतों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के साथ इस दायित्व को निभाएंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री का आभार जताते हुए कहा कि देश ने उन पर जो भरोसा जताया है, वह उसे पूरी निष्ठा से निभाएंगे। साथ ही उन्होंने देश के उन वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने राष्ट्र सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया।इसे भी पढ़ें: कौन हैं Lt General Dhiraj Seth, जिन्हें मिली Indian Army की कमान? जानें 39 साल का बेमिसाल सफ़रजनरल धीरज सेठ के पदभार ग्रहण समारोह का सबसे भावुक क्षण वह रहा, जब उन्होंने अपने पिता सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल केएम सेठ और अपने छोटे भाई रियर एडमिरल रवीनीश सेठ को सलामी दी। यह दृश्य पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया। एक ओर सेना के नए प्रमुख, दूसरी ओर नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी पुत्र और सामने वही पिता जिन्होंने स्वयं भारतीय सेना में सर्वोच्च जिम्मेदारियां निभाई थीं। यह केवल एक सैन्य परंपरा नहीं थी, बल्कि राष्ट्र सेवा की पीढ़ियों का जीवंत प्रतीक बन गया।हम आपको बता दें कि जनरल धीरज सेठ ने ऐसे समय सेना की कमान संभाली है जब भारतीय सेना बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है। सेना “परिवर्तन के दशक” की जिस व्यापक योजना पर काम कर रही है, उसमें संरचनात्मक बदलाव, नई तकनीकों का समावेश, ड्रोन युद्ध क्षमता, एकीकृत युद्ध समूहों की स्थापना और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल जैसे कई बड़े कदम शामिल हैं। माना जा रहा है कि उनके कार्यकाल में एकीकृत थिएटर कमांड की दिशा में भी निर्णायक प्रगति हो सकती है, जिससे सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच सामरिक समन्वय और मजबूत होगा।अपने विजन को स्पष्ट करते हुए जनरल सेठ ने “विजय” नाम का मंत्र दिया। इस विजन के हर अक्षर में सेना की भविष्य की दिशा छिपी है। “वी” यानी सतर्कता और तत्परता। उनका कहना है कि भारतीय सेना सीमाओं और उभरते खतरों पर लगातार नजर रखेगी और हर चुनौती का मुकाबला करने के लिए हर समय तैयार रहेगी।“आई” यानी नवाचार और परिवर्तन। जनरल सेठ ने साफ कहा कि भविष्य का युद्ध केवल सैनिकों की संख्या से नहीं, बल्कि तकनीक, सूचना और तेज निर्णय क्षमता से जीता जाएगा। इसलिए सेना में नई सोच, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियां, ड्रोन, निगरानी तकनीक और आधुनिक हथियारों का समावेश तेजी से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नवाचार सेना की मानसिकता, कार्यशैली और क्षमता निर्माण का स्थायी हिस्सा बनेगा।“जे” यानी संयुक्तता और एकीकरण। उनका मानना है कि आधुनिक युद्ध अब केवल एक सेना नहीं लड़ सकती। इसलिए थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर तालमेल ही भारत की सामरिक ताकत को नई ऊंचाई देगा। यह केवल सैन्य रणनीति नहीं, बल्कि विकसित भारत 2047 की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।''ए” यानी आत्मनिर्भरता। जनरल सेठ ने स्पष्ट कहा कि भविष्य की भारतीय सेना स्वदेशी तकनीक और घरेलू रक्षा उत्पादन पर आधारित होगी। उनका जोर ऐसी सैन्य क्षमता विकसित करने पर है जो विदेशी निर्भरता को कम करे और युद्ध के समय देश को रणनीतिक मजबूती दे।''वाई” यानी योद्धा फर्स्ट। उन्होंने कहा कि सबसे नए अग्निवीर से लेकर सबसे वरिष्ठ पूर्व सैनिक तक, हर व्यक्ति भारतीय सेना की ताकत है। सैनिकों का मनोबल, कल्याण और सम्मान उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगा।हम आपको यह भी बता दें कि जनरल धीरज सेठ का सैन्य कॅरियर भी बेहद मजबूत और व्यापक अनुभव से भरा हुआ है। वह वर्ष 1986 में आर्मर्ड कोर की प्रसिद्ध दूसरी लांसर्स रेजिमेंट में कमीशन हुए थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों से लेकर पश्चिमी सीमा पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। वह उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं जिन्होंने पश्चिमी मोर्चे पर दो अलग-अलग सैन्य कमानों का नेतृत्व किया। पुणे स्थित दक्षिणी कमान और जयपुर स्थित दक्षिण पश्चिमी कमान दोनों की जिम्मेदारी उन्होंने संभाली। इन दोनों कमानों का सीधा संबंध पाकिस्तान सीमा से जुड़ी सामरिक तैयारियों से है।उन्होंने भोपाल स्थित इक्कीसवीं कोर का नेतृत्व किया और दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर के सैन्य समारोहों की जिम्मेदारी भी निभाई। क्षमता विकास और दीर्घकालिक सैन्य रणनीति से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए उन्होंने सेना के आधुनिकीकरण की दिशा तय करने में भी अहम भूमिका निभाई।रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जनरल सेठ के सामने सबसे बड़ी चुनौती सेना की संरचना को भविष्य के युद्ध के अनुरूप ढालना होगी। आधुनिक युद्ध अब संपर्क आधारित नहीं, बल्कि तकनीक संचालित और दूर से मार करने वाली प्रणाली पर आधारित होता जा रहा है। ऐसे में सेना की कमान संरचना, नेतृत्व प्रणाली और तकनीकी समावेश में व्यापक बदलाव आवश्यक होंगे।हम आपको यह भी बता दें कि जनरल धीरज सेठ राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, भारतीय सैन्य अकादमी, पेरिस के कमांड एंड स्टाफ कोर्स और राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के छात्र रहे हैं। उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक, उत्तम युद्ध सेवा पदक और अति विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया जा चुका है।उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भी सैन्य गौरव से जुड़ी रही है। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल कृष्ण मोहन सेठ सेना में एडजुटेंट जनरल रहे और बाद में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश तथा त्रिपुरा के राज्यपाल भी बने। पिता और पुत्र दोनों ने सुदर्शन चक्र कोर की कमान संभाली। वहीं उनके छोटे भाई रियर एडमिरल रवीनीश सेठ नौसेना में वरिष्ठ जिम्मेदारी निभा रहे हैं।इधर सेना और वायुसेना में भी बड़े स्तर पर नेतृत्व परिवर्तन देखने को मिले हैं। जनरल धीरज सेठ के सेना प्रमुख बनने के बाद लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन नए उप सेना प्रमुख बने हैं। लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर ने दक्षिणी कमान की जिम्मेदारी संभाली है, जबकि लेफ्टिनेंट जनरल मोहित मल्होत्रा दक्षिण पश्चिमी कमान के नए प्रमुख बने हैं। लद्दाख क्षेत्र में तैनात चौदहवीं कोर, जिसे फायर एंड फ्यूरी कोर कहा जाता है, उसकी कमान अब लेफ्टिनेंट जनरल मदनराज पांडे के हाथों में है।भारतीय वायुसेना में भी एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने उप वायुसेना प्रमुख का पद संभाला है। कुल मिलाकर भारतीय सशस्त्र बलों में यह व्यापक नेतृत्व परिवर्तन ऐसे समय हुआ है जब देश की सुरक्षा चुनौतियां तेजी से बदल रही हैं और सेना को तकनीक आधारित युद्ध की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ना है।बहरहाल, जनरल धीरज सेठ के सामने चुनौती बड़ी है, लेकिन उनका पहला संदेश साफ है कि भारतीय सेना अब केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य के युद्धक्षेत्र में तकनीक, आत्मनिर्भरता, संयुक्त संचालन और सैनिकों के मनोबल के दम पर नई शक्ति के रूप में उभरेगी।-नीरज कुमार दुबे
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