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    स्वदेशी इनोवेशन से बढ़ेगी युद्ध क्षमता:टारगेट एयरक्राफ्ट 'शिकरा' 100 किमी तक करेगा वार, V-BAT UAV बनेगा गेम-चेंजर

    1 hour ago

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    भारतीय सेना अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए नई-नई तकनीकों पर जोर दे रही है। प्रयागराज में हुए नॉर्थ टेक सिंपोजियम में प्रदर्शनी में लगे एयर डिफेंस कॉलेज में विकसित 'टारगेट एयरक्राफ्ट', 915 आर्मी बेस वर्कशॉप का रडार एमिशन सिस्टम, स्मार्ट फेंस तकनीक और JSW डिफेंस का V-BAT UAV जैसे इनोवेशन सेना को युद्धक्षेत्र में नई ताकत देंगे। इनके परीक्षण और विकास से ट्रेनिंग, निगरानी व सीमा सुरक्षा में क्रांति आने वाली है। 3 तस्वीरें देखिए… मल्टीपर्पस टारगेट एयरक्राफ्ट, ट्रेनिंग से ऑपरेशनल यूज तक ऑफिसर कमांडिंग मेजर वैभव शर्मा बताते हैं कि टारगेट एयरक्राफ्ट मुख्य रूप से एयर डिफेंस गन व मिसाइल फायरिंग ट्रेनिंग के लिए है, लेकिन हमने इसे मॉडिफाई कर डुअल यूज बना दिया। विंग टिप पर बॉम्बलेट ड्रॉपिंग मैकेनिज्म व ISR (इंटेलिजेंस, सर्विलांस, रेकी) मॉड्यूल जोड़कर इसे मल्टीपर्पस बनाया गया। पेलोड क्षमता विंग्स में 4-6 किलो व बेली पॉड में 3-4 किलो है। बंशी वर्जन 25 किमी रेंज का, जबकि अपग्रेडेड शिकरा 100 किमी तक मार कर सकता है। ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन से पायलट संचालित यह युद्ध में दुश्मन लक्ष्य को निशाना बनाने में मददगार साबित होगा। स्मार्ट फेंस, डिमार्केशन लाइन हिरेन कोसे ने बताया स्मार्ट फेंस डिमार्केशन लाइन है, चढ़ना या काटना असंभव। इलेक्ट्रॉनिक सेंसर्स कंपन पकड़ते हैं, मिलीसेकंड्स में कंट्रोल रूम को अलर्ट करता है। कैमरों से विजुअल फीड मिलता है। MS स्टील पर गैल्वनाइजेशन व थर्मोप्लास्टिक कोटिंग से जंगरोधी व दीर्घायु बनाता है। V-BAT UAV निगरानी का गेम-चेंजर JSW डिफेंस हैदराबाद में अमेरिकी Shield AI के साथ V-BAT टैक्टिकल UAV बना रहा। 18,000 फीट ऊंचाई, 130 किमी रेंज (सैटकॉम से 1200 किमी), 120-130 किमी/घंटा स्पीड। हाई-टेक कैमरा-रडार से ग्राउंड मैपिंग व ट्रूप मूवमेंट ट्रैकिंग। रिटायर्ड नेवल ऑफिसर लेफ्टिनेंट कमांडर श्रीकांत वडलमानी बोले इंटेलिजेंस-सर्विलांस में यह सेना के लिए क्रांतिकारी। रडार एमिशन सिस्टम, प्रशिक्षण में नया आयाम 915 आर्मी बेस वर्कशॉप से जुड़े अधिकारी मुरली ने कहा यह रडार एमिशन सिस्टम विभिन्न फ्रीक्वेंसी उत्सर्जित करने के लिए है। पूरे रडार लगाने की बजाय एमिटर्स लगाए जाते हैं।" एडी कॉलेज में सैनिकों की ट्रेनिंग के लिए L, S व C बैंड वाली वैरिएबल एमिटर विकसित की गई। अब जैमिंग सिस्टम पर काम चल रहा है, जो ट्रेनिंग को और प्रभावी बनाएगा। मिसाइल कंटेनर हनीकॉम्ब इंजीनियर कम्पोजिट तकनीक से सेना के लिए क्रांतिकारी उत्पाद विकसित किए हैं। अंजनी कंपनी के डायरेक्टर राघव गुप्ता ने बताया कि यह तकनीक आकाश मिसाइल के लिए दुनिया का पहला हल्का प्रेशराइज्ड कंटेनर बना चुकी है, जो मिसाइलों की उम्र चार गुना बढ़ा देती है। हनीकॉम्ब सैंडविच पैनल से हमने आकाश, अस्त्र, नाग व ATGM मिसाइलों की सुरक्षित पैकेजिंग तैयार की। यह तकनीक मिसाइलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखती है, जिससे सेना की लॉजिस्टिक्स मजबूत होती है। पारंपरिक तरीकों से कहीं बेहतर, यह हल्का व टिकाऊ है। मैन-पोर्टेबल शेल्टर कंपनी का अगला इनोवेशन मैन-पोर्टेबल शेल्टर है। हर पार्ट 25 किलो से कम वजन का, चार सैनिक बिना मशीनरी के चार घंटे में असेंबल कर सकते हैं। इसमें इलेक्ट्रिकल फिटिंग, बेड व प्लिंथ जैसी सुविधाएं हैं। गुप्ता ने जोर देकर कहा, "यह PUF पैनल से तीन गुना ज्यादा इंसुलेशन देता है, जिससे भीषण गर्मी में सैनिक सुरक्षित व कंफर्टेबल रहें।
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