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    सपा का नया मुख्य सचेतक कौन?:कमाल अख्तर के बाद मुस्लिम, दलित या कुर्मी; अखिलेश किस पर लगाएंगे दांव?

    4 hours ago

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    सपा के विधानसभा मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) कमाल अख्तर ने पद से इस्तीफा दे दिया। बड़ा सवाल है कि अखिलेश यादव अब यह अहम जिम्मेदारी किसे सौंपेंगे? अखिलेश का यह फैसला 2027 के चुनाव के लिए सपा का जातीय फार्मूला भी सेट करेगा। अखिलेश के सामने 2 विकल्प हैं- मुस्लिम प्रतिनिधित्व को बरकरार रख सकते हैं। 'PDA' फॉर्मूले को और धार दे सकते हैं। गैर यादव ओबीसी चेहराला सकते हैं। ऐसे में उनके सामने 3 तरह के मुख्य दावेदार हैं। इनकी चेहरों सियासी ताकत को समझ लेते हैं। विकल्प 1- दमदार मुस्लिम चेहरा अगर मुख्य सचेतक कोई मुस्लिम चेहरा होता है, तो 2027 में अल्पसंख्यक वोट बैंक पर सपा की पकड़ और मजबूत हो जाएगी। सपा का सबसे मजबूत आधार मुस्लिम-यादव (M-Y) रहा है। हालांकि, सपा यह फैसला करती है तो भाजपा को तुष्टिकरण का आरोप लगाने का एक बार फिर मौका मिल जाएगा। संभावित चेहरों को जानिए विकल्प 2- दलित चेहरे से PDA को धार 2024 के लोकसभा चुनाव में PDA फॉर्मूले की सफलता के बाद सपा दलितों को बड़ा संदेश देना चाहती है। इसलिए माना जा रहा है कि पार्टी हाईकमान मुख्य सचेतक के लिए कोई दलित चेहरा आगे कर सकती है। पिछड़े वोट बैंक को अपनी तरफ खींचने का ये सपा का मास्टरस्ट्रोक हो सकता है। संभावित चेहरे को जानिए विकल्प 3- गैर-यादव ओबीसी चेहरे से BJP को डैमेज यूपी की राजनीति में कुर्मी समाज का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। भाजपा के इस मजबूत गढ़ में सेंध लगाने और यह दिखाने के लिए कि सपा सिर्फ M-Y फैक्टर तक सीमित नहीं है। सपा कोई गैर-यादव ओबीसी चेहरा सामने कर सकती है। संभावित चेहरे को जानिए कमाल अख्तर के इस्तीफे पर अखिलेश यादव ने 2 जुलाई को कहा कि वही पार्टियां चलती हैं, जिनका डिसीजन उसके नेता स्वीकार करते हैं। कमाल अख्तर हमारे पुराने कार्यकर्ता और नेता हैं। एक समय में वो यंगेस्ट राज्यसभा सांसद थे। वो बहुत समझदार हैं। मुख्य सचेतक- समन्वय से लेकर पार्टी लाइन तय करता है विधानसभा के अंदर मुख्य सचेतक की भूमिका बेहद अहम होती है। पार्टी विधायकों की उपस्थिति सुनिश्चित करना, मतदान के दौरान व्हिप (पार्टी लाइन) का पालन कराना, विधायी रणनीति तय करना और विपक्षी दलों के साथ समन्वय बनाना उसकी जिम्मेदारी होती है। लेकिन, सपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं की मानें तो यह पद एक तरह का 'सिरदर्द' भी है- सपा के नेता बताते हैं- मुख्य सचेतक केवल जातीय संतुलन साधने का पद नहीं है। विधानसभा के अंदर सरकार को घेरने की रणनीति और विधायकों को एकजुट रखने के लिए अखिलेश को एक ऐसे चेहरे की जरूरत है, जिसकी संगठन में स्वीकार्यता हो। जो सभी गुटों से संवाद रख सके। केवल जातीय समीकरण इस नियुक्ति का एकमात्र आधार नहीं हो सकता। लेकिन, 2027 की तैयारियों के लिहाज से अखिलेश का यह फैसला पार्टी की अगली दिशा जरूर तय कर देगा। मुख्य सचेतक कमाल अख्तर का इस्तीफा क्यों हुआ? सांसद रुचिवीरा और कमाल अख्तर के बीच अनबन कमाल अख्तर और रुचि वीरा के रिश्तों में खटास लोकसभा चुनाव (2024) से ही चली आ रही है। लेकिन, अभी तक मामला अंदरखाने चल रहा था। यह कलह सतह पर उस वक्त आई, जब मुरादाबाद में 14 जून को पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) सम्मान सम्मेलन हुआ। इसमें सांसद रुचि वीरा को न तो बुलाया गया और न ही कार्यक्रम में फोटो लगाई गई। इस पर रुचि वीरा नाराज हो गईं। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने 25 जून को इमरजेंसी मीटिंग बुलाई। इसमें सांसद रुचि वीरा, राज्यसभा सांसद जावेद अली, पूर्व मंत्री कमाल अख्तर और पूर्व विधायक यूसुफ अंसारी मौजूद थे। मीटिंग में रुचि वीरा ने कहा- मुरादाबाद में कमाल अख्तर मेरा विरोध करते हैं। पार्टी में गुटबाजी कर रहे हैं। पीडीए सम्मेलन में कमाल अख्तर ने ही मेरी फोटो नहीं लगने दी। इससे भाजपा और सहयोगी दलों को बोलने का मौका मिल गया कि सपा में महिलाओं का सम्मान नहीं है। कमाल अख्तर ने रुचि वीरा पर गुटबाजी करने का आरोप लगाया था। कमाल ने कहा था कि जबसे रुचि वीरा सांसद बनी हैं, वो किसी विधायक या सपा नेता की फोटो अपने होर्डिंग में लगने नहीं देतीं। जब वह किसी का फोटो नहीं लगाती हैं, तो कोई उनकी फोटो क्यों लगाएगा? इसके बाद मुरादाबाद की कांठ विधानसभा सीट से सपा विधायक कमाल अख्तर ने 30 जून को विधानमंडल के मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दे दिया। दोपहर 2.30 बजे कमाल अख्तर लखनऊ पहुंचे। पार्टी मुख्यालय में अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की और उन्हें इस्तीफा सौंप दिया। मुरादाबाद से लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते थे कमाल अख्तर कमाल अख्तर और रुचि वीरा के बीच अनबन की मूल वजह मुरादाबाद लोकसभा सीट है। कमाल अख्तर की गिनती अखिलेश यादव के करीबी और भरोसेमंद नेताओं में होती है। अखिलेश सरकार में मंत्री रह चुके कमाल अख्तर इसके पहले सपा के राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों में कमाल अख्तर मुरादाबाद सीट से लड़ना चाहते थे। अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी सिंबल भी दे दिया था। लेकिन, ऐन वक्त पर सपा नेता आजम खान के वीटो लगाने पर अखिलेश को कमाल अख्तर से सिंबल वापस लेकर रुचि वीरा को देना पड़ा था। बेटी को लड़ाना चाहती हैं रुचि वीरा सांसद रुचि वीरा मुरादाबाद शहर सीट से 2027 में अपनी बेटी स्वाति वीरा को चुनाव लड़ाना चाहती हैं। स्वाति वीरा बिजनौर से नगर पंचायत का चुनाव लड़ चुकी हैं, लेकिन वह हार गई थीं। मनोज पांडेय के बागी होने के बाद बने थे चीफ व्हिप सपा ने कमाल अख्तर को 28 जुलाई, 2024 को यूपी विधानसभा में अपना मुख्य सचेतक बनाया था। उनसे पहले रायबरेली विधायक मनोज कुमार पांडेय चीफ व्हिप थे। लेकिन, मनोज ने फरवरी, 2024 में राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी रुख अपनाते हुए मुख्य सचेतक के पद से इस्तीफा दे दिया था। भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया था। उनके पाला बदलने के बाद ही यह पद खाली हो गया था। इस पर बाद में कमाल अख्तर को नियुक्त किया गया था। ------------------------- ये खबर भी पढ़ें… सपा विधायक कमाल अख्तर का मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा:बोले- अखिलेशजी का आदेश था; सांसद रुचि वीरा ने शिकायत की थी कमाल अख्तर की मुरादाबाद की सपा सांसद रुचि वीरा से अनबन चल रही है। विवाद को सुलझाने के लिए 25 जून को पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में दोनों के साथ बैठक भी की थी। रुचि वीरा और कमाल अख्तर ने एक-दूसरे पर गुटबाजी के आरोप लगाए थे। पूरी खबर पढ़ें…
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