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    सूफी-संतों की मजारों वाले वार्ड में उफना रहे सीवर:प्रयागराज के वार्ड-98 दायरा शाह अजमल आते हैं लाखों जायरीन, फिर भी अनदेखी

    9 hours ago

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    सूफी संतों की मजारों वाला वार्ड-98 दायरा शाह अजमल बदहाली का शिकार है। बदहाली भी ऐसी कि यहां रहने वालों का जीना मुश्किल हो रहा है। लोगों ने बताया कि हर साल लाखों जायरीन आते हैं। खास धार्मिक और एतिहासिक पहचान होने के बावजूद विकास के मामले में इसे बिसरा दिया गया है। सीवर सिस्टम डैमेज है, नाले उफना रहे हैं। रास्तों पर गंदा पानी भरा रहता है। घरों में नलों से दूषित पानी निकल रहा है। दैनिक भास्कर की 'वार्ड परिक्रमा' में सामने आया कि कई जगहों पर सीवर और पेयजल लाइनें एक साथ गुजर रही हैं। इसकी वजह से लोगों को गंदा पानी पीना पड़ रहा है। नखास कोहना से दायरा शाह अजमल तक जाम, गंदगी और जलभराव ने लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है। व्यापारियों का कहना है कि बारिश के दिनों में दुकानें खोलना तक मुश्किल हो जाता है, जबकि स्थानीय लोग वर्षों से स्थायी समाधान का इंतजार कर रहे हैं। दैनिक भास्कर न्यूज एप पर वार्ड परिक्रमा अभियान चल रहा है। इसी कड़ी में वार्ड-98 का जायजा लिया गया… वार्ड की कई गलियों में नालियां गंदगी और कूड़े-कचरे से पटी मिलीं। कई स्थानों पर पानी का बहाव रुकने से बदबू फैली हुई थी। पुराने शहर की तंग गलियों में बिजली के तारों का जाल लटका मिला। नखास और आसपास के बाजार क्षेत्र में अतिक्रमण और अव्यवस्थित यातायात से जाम लग रहा है। कई स्थानों पर नालों के ऊपर मकान और निर्माण होने के कारण सफाई नहीं हो पा रही है। पहले ये नजारा देखिए... बिजली के तारों का जंजाल और आवारा पशुओं का आतंक वार्ड की गलियों में बिजली के तारों का जाल फैला हुआ है। लोगों का कहना है कि कई जगह तार झूल रहे हैं, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों ने आवारा पशुओं और आवारा कुत्तों की समस्या भी उठाई। उनका कहना है कि सुबह और रात के समय लोगों को इनसे खतरा बना रहता है। वार्ड की बड़ी समस्याएं 🔹 गंदे पेयजल की समस्या : पुरानी पाइपलाइन और क्षतिग्रस्त सीवर लाइन के कारण दूषित पानी घरों तक पहुंच रहा है। 🔹 जलभराव और नाले ओवरफ्लो : बारिश के दौरान घंटों तक सड़क और बाजार पानी में डूबे रहते हैं। 🔹 नालों पर अतिक्रमण : नालों के ऊपर निर्माण होने से सफाई कार्य नहीं हो पाता। 🔹 जाम की समस्या : बाजार क्षेत्र और नखास कोहना तिराहे पर अक्सर भीषण जाम लगता है। 🔹 गंदगी और चोक नालियां : नियमित सफाई न होने से नालियां कूड़े और मलबे से भरी रहती हैं। 🔹 बिजली के तारों का जंजाल : गलियों में लटकते तार दुर्घटना का खतरा बढ़ा रहे हैं। 🔹 आवारा कुत्ते और पशु : लोगों ने इसे भी बड़ी समस्या बताया। लोग बोले- नई पाइपलाइन और नालों की सफाई ही समाधान क्षेत्रवासियों ने मांग की कि पुरानी पेयजल पाइपलाइन को बदला जाए और सीवर व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए। लोगों ने नालों पर हुए अतिक्रमण हटाने और नियमित सफाई कराने की भी मांग की। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक जलनिकासी व्यवस्था मजबूत नहीं होगी, तब तक हर बारिश में वार्ड को जलभराव और गंदगी की समस्या झेलनी पड़ेगी। नालों पर कब्जे से बढ़ी जलभराव की समस्या वार्ड की सबसे बड़ी समस्या नाले और जलनिकासी व्यवस्था है। कई स्थानों पर लोगों ने नालों के ऊपर निर्माण कर लिया है, जिससे उनकी सफाई नहीं हो पाती। स्थानीय लोगों के अनुसार बारिश के दौरान नाले ओवरफ्लो हो जाते हैं और सड़कों से लेकर दुकानों तक पानी भर जाता है। कई बार एक घंटे की बारिश के बाद छह घंटे तक पानी भरा रहता है। गंदे पानी से परेशानी, आरओ पर निर्भर कई परिवार क्षेत्रवासियों ने बताया कि वार्ड में पेयजल की समस्या बेहद गंभीर है। दशकों पुरानी पाइपलाइन जर्जर हो चुकी है और कई जगह सीवर लाइन के साथ गुजरती है। लोगों का कहना है कि कई घरों में बदबूदार और दूषित पानी पहुंचता है। मजबूरी में अधिकांश परिवार आरओ, फिल्टर और एक्वागार्ड का पानी इस्तेमाल कर रहे हैं। जाम बना व्यापारियों की सबसे बड़ी परेशानी पुराने शहर के बाजार क्षेत्र और नखास कोहना तिराहे पर दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों के दौरान स्थिति और खराब हो जाती है। व्यापारियों का कहना है कि जाम के कारण ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होती है, जिससे कारोबार पर असर पड़ता है। ----------------- ये खबर भी पढ़िए… मेरठ की पॉश कालोनी में नालियां चोक, सड़कों पर गड्‌ढे: वार्ड-50 के लोग बोले- सीवर का पानी घरों में घुसता है, कोई सुन नहीं रहा मेरठ का वार्ड-50 शहर के पॉश इलाकों गंगानगर और साकेत के बीच स्थित है। बाहर से तस्वीर भी बेहतर दिखती है। लेकिन जैसे-जैसे वार्ड के अंदर की कालोनियों में पहुंचेंगे तो विकास के दावे डूबते नजर आएंगे। सीवर का पानी रास्तों पर भरा मिलेगा। सड़क पर गड्ढे मिलेंगे। बारिश में हालात और बदतर हो जाते हैं। लोग बताते हैं कि जरा सी बारिश में गंदा पानी घरों में पहुंच जाता है। पूरी खबर पढ़ें… ----------------- ये खबर भी पढ़िए… कागजों में गांव हुआ शहर, जमीन पर बदला कुछ नहीं:प्रयागराज के वार्ड-17 में नल सूखे, सड़क पानी में डूब रहीं; टैंकर का इंतजार करते लोग प्रयागराज का वार्ड-17 चाका करीब तीन साल पहले नगर निगम में शामिल हुआ था। लोगों को उम्मीद थी कि अब गांव नहीं, शहर जैसी सुविधाएं मिलेंगी। लेकिन हकीकत इसके उलट है। घर-घर नल कनेक्शन पहुंच गए, मगर पानी नहीं पहुंचा। लोग टैंकरों और निजी समरसेबल के भरोसे हैं। नालियां या तो बनी नहीं हैं या जाम पड़ी हैं। सड़कों पर गंदा पानी जमा है। कूड़ा खाली प्लॉटों में फेंका जा रहा है। कई बस्तियों में बिजली के खंभे तक नहीं लगे हैं। पूरी खबर पढ़ें…
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